पितृपक्ष शुरू होते ही बाजारों में खरीदारी कम हो जाती है। कई लोग नई गाड़ी खरीदने, सोने के गहने लेने या मकान की रजिस्ट्री कराने से बचते हैं। लोगों के बीच यह धारणा है कि पितृपक्ष के 16 दिनों में कोई नई चीज खरीदना अशुभ होता है और इससे पितृ दोष लग सकता है। लेकिन क्या वाकई हमारे धर्मग्रंथों में ऐसा कोई नियम बताया गया है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गरुड़ पुराण, मनुस्मृति या दूसरे प्रमुख धर्मग्रंथों में पितृपक्ष के दौरान जरूरत की चीजें खरीदने पर रोक नहीं लगाई गई है।
पितृपक्ष अशुभ समय नहीं है
सनातन परंपरा में पितृपक्ष को अशुभ समय नहीं माना गया है। यह समय अपने पूर्वजों को याद करने, उनके प्रति सम्मान जताने और तर्पण-श्राद्ध करने का होता है।
मान्यता है कि पूर्वज अपनी संतान की तरक्की और खुशहाली देखकर प्रसन्न होते हैं। इसलिए नया घर, वाहन या दूसरी जरूरी चीज खरीदना अपने आप में गलत नहीं माना जाता।
फिर खरीदारी को लेकर भ्रम क्यों है?
दरअसल, पितृपक्ष के दौरान विवाह, मुंडन, सगाई और गृहप्रवेश जैसे बड़े मांगलिक कार्यक्रमों से बचने की परंपरा रही है। इन कार्यक्रमों में उत्सव, नाच-गाना और खुशी का माहौल होता है, जबकि पितृपक्ष पूर्वजों के स्मरण और श्राद्ध का समय माना जाता है।
समय के साथ लोगों ने इस परंपरा को सामान्य खरीदारी से भी जोड़ दिया। इसी वजह से यह धारणा बन गई कि पितृपक्ष में कोई भी नई चीज खरीदना अशुभ है।
जरूरत की चीजें खरीदने पर रोक नहीं
पितृपक्ष में दिखावे और अनावश्यक खर्च से बचने की सलाह दी जाती है। इसका मतलब यह नहीं है कि इस दौरान जरूरी सामान नहीं खरीदा जा सकता।
अगर किसी को नई गाड़ी, लैपटॉप, घर, जमीन या दूसरी जरूरी चीज खरीदनी है, तो केवल पितृपक्ष होने की वजह से उसे रोकना जरूरी नहीं है।
कौन सी चीजें खरीदना शुभ माना जाता है?
धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं में पितृपक्ष के दौरान कुछ चीजों को खरीदने और दान करने को अच्छा माना गया है।
- सोना-चांदी: श्राद्ध और तर्पण में चांदी के बर्तनों का इस्तेमाल शुभ माना जाता है। इसलिए इस दौरान चांदी या सोना खरीदने को लेकर भी कोई सामान्य मनाही नहीं बताई गई है।
- घर और जमीन: घर या जमीन खरीदना या उसकी रजिस्ट्री कराना अपने आप में अशुभ नहीं माना जाता। हालांकि गृहप्रवेश जैसे मांगलिक कार्य आमतौर पर पितृपक्ष के बाद किए जाते हैं।
- दान की सामग्री: नए कपड़े, बर्तन, अनाज और छाता जैसी चीजें खरीदकर जरूरतमंदों को दान करना पुण्य का काम माना जाता है।
नई चीज खरीदें तो क्या करें?
अगर आप पितृपक्ष के दौरान कोई जरूरी सामान खरीदते हैं, तो उसे घर लाने के बाद अपने पितरों को याद कर सकते हैं। भगवान के सामने सामान रखकर प्रणाम करें और अपनी खुशी में किसी जरूरतमंद को भोजन या अपनी क्षमता के अनुसार दान करें।
कुल मिलाकर, पितृपक्ष को डर या अंधविश्वास का समय मानने के बजाय पूर्वजों को याद करने और उनके प्रति सम्मान जताने का समय माना जाना चाहिए। जरूरी सामान खरीदने पर रोक होने की बात को लेकर धर्मग्रंथों में कोई स्पष्ट सामान्य नियम नहीं बताया गया है।
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