ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने देश में नस्ल, नागरिकता और राष्ट्रीय पहचान को लेकर चिंता जताई है। संडे टाइम्स में लिखे अपने कॉलम में उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति की त्वचा के रंग को उसकी ब्रिटिश पहचान से जोड़ना सही नहीं है। उन्होंने अपनी पहचान का जिक्र करते हुए कहा कि वह ब्रिटिश और हिंदू दोनों हैं।
सुनक ने कहा कि ब्रिटेन की बहुधार्मिक और बहुजातीय लोकतांत्रिक व्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है। उन्होंने इमिग्रेशन को नियंत्रित करने में सरकारों की नाकामी और इस्लामिज्म से जुड़ी चुनौतियों समेत कई मुद्दों का जिक्र किया।
त्वचा के रंग को ब्रिटिश पहचान से जोड़ने पर सवाल
सुनक के मुताबिक सबसे बड़ी चिंताओं में से एक यह है कि लोगों की त्वचा के रंग को उनकी राष्ट्रीयता से जोड़ दिया जाए। उनका कहना है कि ऐसा होने पर ब्रिटेन में लोगों के अलग-अलग वर्ग बन सकते हैं।
उन्होंने कहा कि जो लोग बाद में ब्रिटेन आए हैं, उन्हें सिर्फ उनकी इमिग्रेशन हिस्ट्री या नस्ल के आधार पर उन लोगों से कम ब्रिटिश नहीं माना जाना चाहिए, जिनके परिवार लंबे समय से वहां रह रहे हैं।
क्या है ‘टेबिट टेस्ट’?
सुनक ने अपने कॉलम में ‘टेबिट टेस्ट’ का भी जिक्र किया। यह विचार 1990 में कंजर्वेटिव नेता नॉर्मन टेबिट ने रखा था। इसमें यह सवाल उठाया गया था कि प्रवासी अगर इंग्लैंड की क्रिकेट टीम की बजाय अपने मूल देश की टीम का समर्थन करते हैं, तो क्या यह उनके ब्रिटिश समाज में घुलने-मिलने की कमी को दिखाता है।
सुनक ने कहा कि उनके बचपन में वह इस तरह के सवाल को आसानी से पार कर सकते थे। साउथम्प्टन में जन्मे होने के कारण उनके लिए इंग्लैंड और हैम्पशायर की टीम का समर्थन करना स्वाभाविक था। उन्होंने क्रिकेट और खेल को अलग-अलग समुदायों को जोड़ने का माध्यम भी बताया।
‘मैं ब्रिटिश भी हूं और हिंदू भी’
सुनक ने अपने प्रधानमंत्री कार्यकाल का जिक्र करते हुए कहा कि उनकी नस्ल या धर्म को लेकर उन्हें कई मौकों पर ब्रिटिश पहचान से जोड़कर सवाल किया गया। इसके बावजूद वह चर्च ऑफ इंग्लैंड के बिशपों की नियुक्ति में भूमिका निभा सके, राजा के राज्याभिषेक में पाठ पढ़ सके और अपनी बेटियों के साथ डाउनिंग स्ट्रीट में दिवाली मना सके।
उन्होंने यह भी कहा कि अगर गैर-श्वेत लोगों से उनकी ब्रिटिश पहचान साबित करने के लिए लगातार अलग-अलग पैमाने पर सवाल किए जाएं, तो यह एक ऐसा ‘रिवर्स टेबिट टेस्ट’ बन जाएगा जिसे वे कभी पास नहीं कर पाएंगे। सुनक ने कहा कि ब्रिटिश राजनीति में नस्ल को फिर से जगह नहीं मिलनी चाहिए और लोगों को एक-दूसरे के खिलाफ खड़ा करने से बचना चाहिए।



