हिंदू धर्म में संतान सप्तमी का व्रत संतान के सुख, अच्छे स्वास्थ्य, लंबी उम्र और कल्याण की कामना से जुड़ा माना जाता है। यह व्रत भाद्रपद शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को रखा जाता है। साल 2026 में संतान सप्तमी का व्रत 18 सितंबर, शुक्रवार को रखा जाएगा।
मान्यता के अनुसार, इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने, व्रत कथा सुनने और संतान के कल्याण के लिए प्रार्थना करने से उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है।
संतान प्राप्ति की इच्छा रखने वाले दंपती
जिन दंपतियों को अभी संतान सुख नहीं मिला है और वे संतान की इच्छा रखते हैं, उनके लिए यह व्रत धार्मिक मान्यताओं में विशेष माना जाता है। इस दिन शिव-पार्वती की पूजा करके संतान प्राप्ति की कामना से संकल्प लिया जाता है।
व्रत कथा की परंपरा में भी उत्तम संतान और भगवान शिव की कृपा की कामना का उल्लेख मिलता है।
बच्चे के बार-बार बीमार होने पर
जिन माता-पिता को अपनी संतान के स्वास्थ्य और लंबी उम्र की चिंता रहती है, वे भी संतान सप्तमी का व्रत श्रद्धा से रखते हैं।
धार्मिक परंपरा के अनुसार, इस दिन सात गांठ वाला डोरा भगवान शिव और माता पार्वती को अर्पित किया जाता है। इसे संतान की सुरक्षा, अच्छे स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना से जोड़ा जाता है।
बच्चे की पढ़ाई में आ रही बाधा
अगर बच्चे की पढ़ाई या भविष्य को लेकर परिवार चिंतित है, तो संतान सप्तमी पर शिव-पार्वती की पूजा करने के साथ जरूरतमंद बच्चों को शिक्षा से जुड़ी सामग्री दान करने की परंपरा बताई जाती है।
मान्यता है कि इससे गुरु ग्रह मजबूत होता है और भगवान शिव की कृपा से बच्चे की बुद्धि और पढ़ाई में प्रगति की कामना की जाती है।
सात गांठ वाले डोरे का महत्व
संतान सप्तमी की पूजा में सात गांठ वाले डोरे का विशेष महत्व बताया गया है। इसे संतान की रक्षा, अच्छे स्वास्थ्य, लंबी आयु और सुख-समृद्धि की कामना का प्रतीक माना जाता है।
पूजा के दौरान इस डोरे को भगवान शिव और माता पार्वती के सामने रखकर विधि-विधान से पूजा की जाती है। पूजा पूरी होने के बाद व्रती इसे धारण करते हैं। सात गांठों के साथ संतान के मंगल, स्वास्थ्य और सुखी जीवन की कामना की जाती है।
संतान सप्तमी की पूजा विधि
- सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें और संतान के सुख, स्वास्थ्य और दीर्घायु के लिए व्रत का संकल्प लें।
- पूजा स्थल को साफ करके चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं।
- चौकी पर भगवान शिव और माता पार्वती की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें।
- सबसे पहले भगवान गणेश का पूजन करें।
- पूजा स्थल पर कलश स्थापित करें और उसमें जल, अक्षत, सुपारी आदि रखें।
- सात गांठ वाला डोरा भगवान शिव-पार्वती के सामने रखें।
- शिव-पार्वती को जल, अक्षत, रोली, फूल, धूप और दीप अर्पित करें।
- अपनी परंपरा के अनुसार अन्य पूजन सामग्री भी चढ़ाएं।
- फल, मिठाई और सात्विक नैवेद्य अर्पित करें।
- संतान सप्तमी की व्रत कथा का पाठ या श्रवण करें।
- पूजा पूरी होने के बाद संतान डोरा धारण करने की परंपरा है।
- भगवान शिव और माता पार्वती की आरती करें।
- संतान के अच्छे स्वास्थ्य, लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रार्थना करें।
- अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र, फल या शिक्षा से जुड़ी उपयोगी सामग्री का दान करें।
नोट: ये बातें धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित हैं। अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में पूजा की विधि अलग हो सकती है।



