अगर शादीशुदा जीवन में परेशानी चल रही है, संतान को लेकर चिंता है या करियर में मेहनत के बावजूद तरक्की नहीं मिल रही है, तो 25 अगस्त 2026 का दिन धार्मिक दृष्टि से खास माना जा रहा है। इस दिन सावन का आखिरी भौम प्रदोष व्रत रखा जाएगा।
खास बात यह है कि 25 अगस्त को मंगलवार होने के कारण भौम प्रदोष व्रत और मंगला गौरी व्रत एक ही दिन पड़ रहे हैं। ऐसे में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा का विशेष संयोग बन रहा है।
कब है भौम प्रदोष व्रत?
त्रयोदशी तिथि 25 अगस्त 2026 को सुबह 6:20 बजे शुरू होगी और 26 अगस्त को सुबह 7:59 बजे समाप्त होगी।
- प्रदोष पूजा का समय: शाम 6:51 बजे से रात 9:04 बजे तक
- मंगला गौरी पूजा का समय: सुबह 9:09 बजे से दोपहर 2:03 बजे तक
क्यों खास है शिव-शक्ति की पूजा?
धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान शिव और माता पार्वती को शिव-शक्ति का स्वरूप माना जाता है। सावन में प्रदोष व्रत और मंगला गौरी व्रत एक साथ पड़ना गृहस्थ जीवन, दांपत्य सुख और परिवार की खुशहाली के लिए विशेष माना जाता है।
भौम प्रदोष पर किन चीजों की कामना की जाती है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भौम प्रदोष व्रत पर लोग इन चीजों के लिए शिव पूजा करते हैं:
- कर्ज से राहत की कामना
- मंगल दोष से शांति की प्रार्थना
- स्वास्थ्य और रोगों से राहत की कामना
- साहस और आत्मविश्वास बढ़ाने की प्रार्थना
- आर्थिक परेशानियों से राहत की कामना
- परिवार में सुख-शांति और दांपत्य जीवन में सामंजस्य
- भगवान शिव की कृपा और आध्यात्मिक उन्नति
ध्यान रखें कि ये धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताएं हैं। इनके परिणामों की वैज्ञानिक पुष्टि नहीं हुई है।
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि NAV24news किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.
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