TMC के बागी विधायकों की अयोग्यता को लेकर सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बागी विधायकों की अयोग्यता को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सोमवार (28 सितंबर) को सुनवाई हुई। कोर्ट ने पश्चिम बंगाल विधानसभा के स्पीकर से कहा कि वे विधायकों की अयोग्यता से जुड़े मामले में जल्द फैसला लेने की कोशिश करें।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में फैसला लेने के लिए तीन महीने की समय-सीमा तय की जा चुकी है। इसलिए कोर्ट को उम्मीद है कि 8 जुलाई को दाखिल की गई अयोग्यता याचिकाओं पर स्पीकर 8 अक्टूबर तक फैसला लेने का प्रयास करेंगे।
10 विधायकों के खिलाफ दायर हुई थी याचिका
TMC नेता सोहनदेब चट्टोपाध्याय ने 8 जुलाई को रिताब्रता बनर्जी समेत 10 विधायकों की सदस्यता रद्द करने की मांग करते हुए विधानसभा स्पीकर के सामने याचिका दाखिल की थी।
तीन महीने की समय-सीमा 8 अक्टूबर को पूरी हो रही है। मामले में जल्द फैसला लेने की मांग को लेकर सोहनदेब चट्टोपाध्याय ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।
कपिल सिब्बल ने कोर्ट में क्या कहा?
सोहनदेब चट्टोपाध्याय की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कोर्ट में कहा कि 8 अक्टूबर को तीन महीने पूरे हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि पहले भी ऐसे मामलों में कार्रवाई में देरी हुई है और बाद में चुनाव आयोग के आदेश का इंतजार किया गया।
इस पर CJI सूर्यकांत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को उम्मीद है कि विधानसभा स्पीकर कोर्ट द्वारा तय कानून और समय-सीमा का पालन करेंगे।
TMC नेता कल्याण बनर्जी ने भी दी जानकारी
TMC नेता और वकील कल्याण बनर्जी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने स्पीकर से उसी समय-सीमा में फैसला लेने की उम्मीद जताई है, जो पहले मेघालय से जुड़े मामले में तय की गई थी।
उन्होंने बताया कि उस मामले में तीन महीने के भीतर फैसला लेने की समय-सीमा तय की गई थी।
चुनाव नतीजों के बाद TMC में शुरू हुई थी बगावत
विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद TMC में बगावत सामने आई थी। पहले कुछ सांसदों और फिर विधायकों ने पार्टी नेतृत्व से अलग रुख अपनाया।
बागी विधायकों के गुट का नेतृत्व रिताब्रता बनर्जी कर रही हैं। इसके बाद ममता बनर्जी गुट ने बागी विधायकों की सदस्यता खत्म करने की मांग को लेकर विधानसभा स्पीकर के सामने याचिका दायर की।
अब इस मामले में विधानसभा स्पीकर के फैसले का इंतजार है। लोकसभा और विधानसभा से जुड़े दोनों मामलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई चल रही है।
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