23 अगस्त 2026, रविवार | देश-दुनिया डेस्क– उत्तर प्रदेश और बिहार में गंगा के बढ़ते जलस्तर ने एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। वाराणसी से लेकर प्रयागराज और बिहार के कई इलाकों तक नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। वाराणसी में गंगा के बढ़ते पानी से सभी 86 घाट जलमग्न हो चुके हैं और निचले इलाकों में बाढ़ का असर दिखाई दे रहा है। वहीं बिहार में भी गंगा और उसकी सहायक नदियां कई जगह खतरे के निशान के ऊपर बह रही हैं।
स्थिति को देखते हुए प्रशासन लगातार निगरानी कर रहा है। वाराणसी में गंगा और वरुणा नदी दोनों के जलस्तर पर नजर रखी जा रही है। दूसरी ओर पटना समेत बिहार के कई जिलों में बाढ़ प्रभावित इलाकों में प्रशासन और राहत एजेंसियां सक्रिय हैं।
वाराणसी में गंगा के बढ़ते पानी से हालात चिंताजनक
वाराणसी में गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ने से शहर के घाटों पर पानी फैल गया है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार गंगा चेतावनी स्तर के बेहद करीब पहुंच गई है। नदी का पानी बढ़ने के कारण शहर के सभी 86 घाट जलमग्न बताए जा रहे हैं।
बाढ़ के पानी का असर धार्मिक गतिविधियों पर भी पड़ा है। घाटों पर होने वाले नियमित कार्यक्रम प्रभावित हुए हैं और कई जगह लोगों की आवाजाही मुश्किल हो गई है। नाव संचालन पर भी असर पड़ा है।
निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए प्रशासन की ओर से सतर्कता बरतने की अपील की जा रही है।
मणिकर्णिका घाट पर भी बढ़ी परेशानी

गंगा का पानी बढ़ने से वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर अंतिम संस्कार की व्यवस्था भी प्रभावित हुई है। रिपोर्टों के मुताबिक पानी बढ़ने के कारण छत पर अंतिम संस्कार करने की स्थिति बनी हुई है। आसपास की गलियों में भी पानी पहुंचने की खबर है।
यह स्थिति इसलिए भी गंभीर है क्योंकि वाराणसी के घाट शहर की धार्मिक और सामाजिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। पानी बढ़ने के साथ प्रशासन को आम लोगों, श्रद्धालुओं और स्थानीय निवासियों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देना पड़ रहा है।
वरुणा नदी का भी बढ़ा जलस्तर
वाराणसी में सिर्फ गंगा ही नहीं, बल्कि वरुणा नदी का जलस्तर भी बढ़ा है। कुछ रिहायशी इलाकों में बाढ़ का पानी पहुंचने की रिपोर्ट सामने आई है। इसके कारण प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों की ओर जाने के लिए मजबूर होना पड़ा है।dainik bhaskar
प्रशासन की ओर से प्रभावित इलाकों पर लगातार नजर रखी जा रही है। राहत और बचाव व्यवस्था को भी सक्रिय रखा गया है।
प्रयागराज में गंगा-यमुना का जलस्तर बढ़ा
प्रयाग राज में भी गंगा और यमुना के जलस्तर में तेजी देखी जा रही है। 22 अगस्त की रिपोर्टों में दोनों नदियों के जलस्तर में फिर बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। यमुना का पानी खतरे के निशान के करीब पहुंच रहा है और निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है।
प्रयागराज में गंगा और यमुना का संगम क्षेत्र भी जलस्तर बढ़ने से प्रभावित हुआ है। कई निचले इलाकों में लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।
बिहार में भी गंगा समेत कई नदियां खतरे के ऊपर
उत्तर प्रदेश के बाद अब बिहार में भी बाढ़ की स्थिति चिंता बढ़ा रही है। बिहार के Central Flood Control Cell के 23 अगस्त 2026 सुबह 8 बजे के आंकड़ों के अनुसार राज्य के कई प्रमुख नदी निगरानी केंद्रों पर जलस्तर खतरे के स्तर से ऊपर दर्ज किया गया।
सरकारी रियल टाइम आंकड़ों के मुताबिक हथीदह में गंगा का जलस्तर 42.39 मीटर दर्ज किया गया, जबकि खतरे का स्तर 40.76 मीटर है। यहां जलस्तर बढ़ने की स्थिति बताई गई है। खगड़िया में बूढ़ी गंडक भी खतरे के स्तर से ऊपर दर्ज हुई है।
इससे साफ है कि बिहार के कई हिस्सों में बाढ़ का खतरा अभी टला नहीं है।
पटना में गंगा का बढ़ता जलस्तर चिंता का कारण
प टना में गंगा के जलस्तर में लगातार वृद्धि की रिपोर्ट सामने आ रही है। गांधी घाट पर नदी खतरे के निशान के ऊपर बह रही है। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक गांधी घाट पर जलस्तर खतरे के निशान से करीब 57 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गया था।
पटना के निचले इलाकों में गंगा का पानी पहुंचने का खतरा सबसे ज्यादा रहता है। जलस्तर बढ़ने के साथ तटवर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
प्रशासन की ओर से नदी के किनारे रहने वाले लोगों को सावधानी बरतने और अनावश्यक रूप से पानी के नजदीक नहीं जाने की सलाह दी जा रही है।
बक्सर में भी बढ़ी चिंता
बिहार के बक्सर में गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु को पार कर चुका है और नदी का पानी खतरे के निशान की ओर बढ़ रहा है। इससे तटवर्ती गांवों में चिंता बढ़ गई है।
बक्सर की स्थिति इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां गंगा का जलस्तर बढ़ने का असर आसपास के निचले और तटवर्ती इलाकों पर पड़ सकता है।
यूपी के कई जिलों में बाढ़ का असर
उत्तर प्रदेश में गंगा के बढ़ते जलस्तर का असर सिर्फ वाराणसी और प्रयागराज तक सीमित नहीं है। गाजीपुर, कन्नौज और आसपास के कई इलाकों में भी बाढ़ का असर देखने को मिल रहा है। खेतों में पानी भरने से फसलों को नुकसान की खबरें सामने आई हैं।
कई गांवों और निचले इलाकों में लोगों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
प्रशासन ने बढ़ाई निगरानी
वाराणसी में प्रशासन ने बाढ़ की स्थिति को देखते हुए राहत और बचाव की तैयारियां बढ़ा दी हैं। अधिकारियों की ओर से गंगा और वरुणा नदी के किनारे के इलाकों का निरीक्षण किया गया है।
राहत शिविर, बाढ़ चौकियां, मेडिकल टीम और बचाव दलों को तैयार रखने पर जोर दिया गया है। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य जलस्तर और प्रभावित क्षेत्रों की लगातार निगरानी करना है।
लोगों को क्या सावधानी बरतनी चाहिए?
बाढ़ के दौरान नदी और नालों के पास जाना बेहद जोखिम भरा हो सकता है। स्थानीय प्रशासन की ओर से जारी चेतावनियों का पालन करना जरूरी है।
लोगों को चाहिए कि वे:
- नदी और बाढ़ के पानी के पास जाने से बचें।
- बच्चों को जलभराव वाले इलाकों से दूर रखें।
- प्रशासन की ओर से बताए गए सुरक्षित स्थानों की जानकारी रखें।
- बिजली के तार या खंभों के पास जमा पानी में न जाएं।
- अफवाहों पर भरोसा न करें और केवल आधिकारिक जानकारी पर विश्वास करें।
- जरूरत पड़ने पर समय रहते सुरक्षित स्थान पर चले जाएं।
क्यों बढ़ रहा है बाढ़ का खतरा?
मानसून के दौरान लगातार बारिश, नदी के ऊपरी क्षेत्रों में पानी और बैराजों से छोड़े जाने वाले पानी का असर नदियों के जलस्तर पर पड़ सकता है। गंगा बेसिन में जलस्तर बढ़ने के साथ उत्तर प्रदेश और बिहार के निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है।
हालांकि किसी इलाके में बाढ़ की स्थिति केवल एक कारण से तय नहीं होती। स्थानीय बारिश, नदी का प्रवाह, बैराज संचालन, मिट्टी की स्थिति और जल निकासी जैसे कई कारक मिलकर स्थिति को प्रभावित करते हैं।
वाराणसी-पटना के बीच क्यों महत्वपूर्ण है गंगा का जलस्तर?
गंगा उत्तर भारत की सबसे महत्वपूर्ण नदियों में से एक है। वाराणसी, प्रयागराज, बक्सर और पटना जैसे बड़े शहर इसके किनारे बसे हैं। इसलिए गंगा के जलस्तर में बड़ी वृद्धि होने पर लाखों लोगों की सुरक्षा और रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो सकती है।
खासतौर पर निचले इलाकों, नदी किनारे बसे गांवों और घाटों के आसपास रहने वाले लोगों के लिए जलस्तर में हर बढ़ोतरी महत्वपूर्ण होती है।
अभी क्या है स्थिति?
23 अगस्त 2026 की सुबह उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश और बिहार के कई हिस्सों में बाढ़ की स्थिति पर नजर रखी जा रही है। वाराणसी में गंगा चेतावनी स्तर के करीब है और सभी 86 घाटों के डूबने की रिपोर्ट है।
बिहार में कई नदी निगरानी केंद्रों पर खतरे के स्तर से ऊपर पानी दर्ज किया गया है। हथीदह में गंगा और खगड़िया में बूढ़ी गंडक का जलस्तर खतरे के स्तर से ऊपर और बढ़ता हुआ दर्ज हुआ।
ऐसे में अगले कुछ दिनों में बारिश और नदी के जलस्तर की स्थिति बेहद महत्वपूर्ण रहेगी।
निष्कर्ष
वाराणसी से पटना तक गंगा के बढ़ते जलस्तर ने बाढ़ की चिंता बढ़ा दी है। वाराणसी में घाट जलमग्न हैं, मणिकर्णिका घाट पर अंतिम संस्कार की व्यवस्था प्रभावित हुई है और वरुणा नदी का पानी भी रिहायशी इलाकों तक पहुंच रहा है। प्रयागराज में गंगा-यमुना का जलस्तर बढ़ रहा है। वहीं बिहार में गंगा समेत कई नदियां खतरे के निशान के ऊपर बह रही हैं।
यह भी पढ़ें – 23 अगस्त 2026 की देश-दुनिया की 10 बड़ी ताजा खबरें: भारत में बारिश से लेकर ईरान-अमेरिका तनाव तक, पढ़ें सुबह की Top News

