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Sat. Aug 30th, 2025

पिछले कुछ हफ्तों से थाईलैंड और कंबोडिया के बीच जो तनाव एक युद्ध जैसे हालात पैदा कर रहा था, अब उसमें एक राहत की खबर आई है। मलेशिया ने दावा किया है कि दोनों देशों के बीच सीजफायर हो चुका है और अब शांति की ओर कदम बढ़ाए जा रहे हैं।

मलेशिया की बड़ी पहल

मलेशिया के विदेश मंत्री मोहम्मद हसन ने रविवार को ऐलान किया कि उनकी कोशिशों से थाईलैंड और कंबोडिया संघर्ष रोकने पर सहमत हो गए हैं। अब दोनों देशों के शीर्ष नेता सोमवार को मलेशिया पहुंचेंगे, जहां बातचीत के ज़रिए आगे की रणनीति बनाई जाएगी।

दक्षिण-पूर्व एशिया के इस हिस्से में हालात बिगड़ते जा रहे थे। सीमा पर दोनों देशों की सेनाएं आमने-सामने थीं, और पिछले कुछ दिनों में जो हिंसा हुई है, उसमें 30 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है।

क्यों भड़की थी मलेशिया में लड़ाई?

यह विवाद पूरी तरह सीमा को लेकर था। थाईलैंड और कंबोडिया के बीच लंबे समय से कुछ इलाकों को लेकर तनाव रहा है। हाल ही में दोनों तरफ से गश्ती दस्तों में भिड़ंत हुई, जिसने पूरे क्षेत्र को हिंसा की आग में झोंक दिया।

गोलियों और तोपों की आवाज़ से सीमाई इलाकों में खौफ फैल गया था। कई गांव खाली करवाने पड़े। स्कूल बंद कर दिए गए। सैकड़ों परिवार सुरक्षित जगहों की तलाश में पलायन कर चुके थे।

30 से ज्यादा जानें गईं

इस संघर्ष में सबसे बड़ी कीमत आम जनता ने चुकाई। अब तक की जानकारी के मुताबिक, 30 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं, जिनमें महिलाएं, बच्चे और सैनिक शामिल हैं। कई लोग घायल भी हुए हैं और अस्पतालों में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे हैं।

मलेशिया बना संकटमोचक

इस पूरे विवाद को सुलझाने में मलेशिया की भूमिका बेहद अहम रही। ASEAN (एसोसिएशन ऑफ साउथईस्ट एशियन नेशंस) का सदस्य होने के नाते मलेशिया ने दोनों देशों से संपर्क साधा, मध्यस्थता की पेशकश की और आखिरकार उन्हें एक टेबल पर लाने में सफल रहा।

मलेशिया ने यह भी कहा है कि वो इस क्षेत्र में स्थायी शांति सुनिश्चित करने के लिए आगे भी दोनों देशों की मदद करता रहेगा।

आम लोग बोले – राहत की सांस

सीजफायर की खबर मिलते ही सीमाई इलाकों में रहने वाले लोगों ने राहत की सांस ली है। लोग अब अपने घरों की तरफ लौटने लगे हैं, लेकिन दिल में डर अब भी बाकी है। स्थानीय निवासी कह रहे हैं कि वे चाहते हैं यह शांति अस्थायी न हो, बल्कि स्थायी हो जाए।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर

थाईलैंड-कंबोडिया संघर्ष पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भी नजर बनी हुई थी। भारत, अमेरिका, चीन और संयुक्त राष्ट्र ने पहले ही अपील की थी कि दोनों देश बातचीत के रास्ते को अपनाएं। यह संघर्ष न सिर्फ इन दो देशों को नुकसान पहुंचा रहा था, बल्कि पूरे क्षेत्र की स्थिरता को भी खतरे में डाल रहा था।

अब आगे क्या?

सीजफायर एक अच्छी शुरुआत है, लेकिन यह अंत नहीं है। असली चुनौती अब शुरू होती है – दोनों देशों को आपसी भरोसा दोबारा बनाना होगा। सीमा को लेकर विवाद का हल करना होगा ताकि भविष्य में फिर से गोलीबारी की नौबत न आए।

मलेशिया की भूमिका यहां खत्म नहीं होती। उसे इस संवाद को आगे भी जारी रखना होगा और जरूरत पड़ी तो ASEAN जैसे मंचों को भी सक्रिय करना होगा।

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