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Thu. Jul 2nd, 2026

हमारे देश में हजारों की संख्या में मंदिर हैं और हर एक का अपना कोई रहस्य या कहानी है। इन्हीं में से एक है वृंदावन का बांके बिहारी मंदिर। यह मंदिर भगवान विष्णु के अवतार भगवान श्री कृष्ण को समर्पित है और भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरा करने वाला माना जाता है। आइए आपको बताते हैं बांके बिहारी मंदिर के एक ऐसे रहस्य के बारे में जिसमें ये बताया जाता है कि आज भी इस  मंदिर में आरती के समय नहीं बजाई जाती हैं घंटियां। 

भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप से जुड़ी कई कथाएं प्रचलित हैं, जिन्हें श्रद्धालु बेहद पवित्र और पूजनीय मानते हैं। उनकी बाल लीलाओं में माखन चोरी, गोपियों के साथ रास, गोवर्धन पर्वत उठाना और उनका चंचल स्वभाव सबसे प्रसिद्ध हैं। इन सभी लीलाओं के पीछे अलग-अलग धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व बताया गया है।

मंदिर में घंटी बजाने की मनाही क्यों है?

बांके बिहारी मंदिर की इस अनोखी परंपरा के रूप में ऐसा कहा जाता है कि यहां श्री कृष्ण का बाल रूप विराजमान है और यदि कोई छोटा बच्चा सो रहा हो और उसके आस-पास घंटियां बजाई जाएं तो उसकी नींद खराब हो सकती है। इसी वजह से आरती के दौरान घंटियां बजाने से मना किया जाता है। यहां मौजूद भक्तों से लेकर पुजारियों तक सभी श्री कृष्ण के बाल रूप की पूजा करते हैं और उनके सम्मान में घंटियां नहीं बजाते हैं जिससे उनकी नींद में कोई बाधा न आए। 

वहां सभी कृष्ण को केवल भगवान के रूप में नहीं, बल्कि एक ऐसे बच्चे के रूप में देखते हैं जिसे देखभाल और शांति की जरूरत होती है जिससे उनके आराम में बाधा न आए। पुजारी हमेशा मंदिर परिसर में ऐसा माहौल बनाते हैं जैसे किसी छोटे बच्चे को आराम दिया जा रहा हो। 

एक अन्य अनोखी है परंपरा 

बांके बिहारी मंदिर की एक और अनोखी परंपरा यह है कि यहां कुछ सेकंड के बाद मूर्ति के सामने पर्दा डाला जाता है। ऐसा इसलिए किया जाता है क्योंकि अगर कोई व्यक्ति कुछ देर तक श्रीकृष्ण की मूर्ति की आंखों में एकटक देखता है, तो वह भक्त के वशीभूत होकर उसके साथ ही चले जाते हैं।

मंदिर में कुछ सेकंड के बाद ही पर्दा डालकर, पुजारी यह सुनिश्चित करते हैं कि भक्त कृष्ण की मौजूदगी से बहुत ज्यादा भावुक न हों और भगवान कृष्ण भी उनके साथ जाने के लिए सम्मोहित न हो जाएं।वास्तव में इस मंदिर से जुड़े ये रहस्य भक्तों को ओर आकर्षित करते हैं और मंदिर की भव्यता को और बढ़ाते हैं।

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