सावन में कब करें रुद्राभिषेक? जानिए किस तिथि पर मिलेगा सबसे अधिक शुभ फल
सावन का महीना भगवान शिव की पूजा के लिए सबसे पवित्र माना जाता है। इस महीने में श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक और रुद्राभिषेक करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि रुद्राभिषेक करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं।
हालांकि, शास्त्रों के अनुसार सावन में हर दिन रुद्राभिषेक का समान फल नहीं मिलता। अलग-अलग तिथियों पर भगवान शिव का अलग-अलग स्थानों पर निवास माना गया है। इसलिए सही तिथि पर रुद्राभिषेक करना अधिक शुभ माना जाता है।
इन तिथियों पर रुद्राभिषेक करना सबसे शुभ माना गया है:
- कृष्ण पक्ष की अष्टमी और अमावस्या, तथा शुक्ल पक्ष की द्वितीया और नवमी को भगवान शिव माता पार्वती के साथ विराजमान रहते हैं। इन तिथियों पर रुद्राभिषेक करने से घर में सुख-समृद्धि और शांति आती है।
- कृष्ण पक्ष की चतुर्थी और एकादशी, तथा शुक्ल पक्ष की पंचमी और द्वादशी को भगवान शिव का निवास कैलाश पर्वत पर माना जाता है। इन दिनों रुद्राभिषेक करने से परिवार में खुशहाली और सुख बना रहता है।
- कृष्ण पक्ष की पंचमी और द्वादशी, तथा शुक्ल पक्ष की षष्ठी और त्रयोदशी को भगवान शिव नंदी पर सवार होकर माता पार्वती के साथ पृथ्वी पर भ्रमण करते हैं। इन तिथियों पर किया गया रुद्राभिषेक विशेष मनोकामनाओं की पूर्ति करने वाला माना जाता है।
- कृष्ण पक्ष की सप्तमी, शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा, अष्टमी और पूर्णिमा को भगवान शिव का श्मशान में ध्यानमग्न रहने का वर्णन मिलता है। मान्यता है कि इन दिनों श्रद्धापूर्वक पूजा और रुद्राभिषेक करने से जीवन के बड़े कष्ट और भय दूर होते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यदि सावन में सही तिथि पर श्रद्धा और विधि-विधान से रुद्राभिषेक किया जाए, तो भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख, शांति व समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।
बता दें कि कृष्ण पक्ष की तृतीया और दशमी और शुक्ल पक्ष की चतुर्थी और एकादशी को भगवान शिव क्रीडारत होते हैं। ऐसे में इस दिन रुद्राभिषेक करने से संतान को कष्ट बढ़ता है इसलिए इस दिन भगवान शिव का रुद्राभिषेक करने से बचना चाहिए।
शास्त्रों के अनुसार, कृष्ण पक्ष की द्वितीया और नवमी तिथि और शुक्ल पक्ष की तृतीया और दशमी को शिवजी देवताओं की समस्या सुनते हैं। इसलिए इन तिथियों पर रुद्राभिषेक नहीं करना चाहिए। इस दिन किए गए रुद्राभिषेक से आपको अपने कष्टों से मुक्ति नहीं मिलेगी।
शास्त्रों में बताया गया है कि कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी और शुक्ल पक्ष की सप्तमी और चतुर्थी को भगवान शिव भोजन करते हैं। इसलिए इस दिन भी रुद्राभिषेक नहीं करना चाहिए। वहीं, सावन मास में रुद्राभिषेक के लिए सबसे सर्वोत्तम तिथियां महाशिवरात्रि, प्रदोष, और सावन सावन मास के सोमवार है। इसके अलावा आप अगर रुद्राक्ष धारण करना चाहते हैं तो उसके लिए सावन का पूरा महीना उत्तम माना जाता है।
