बिना इंश्योरेंस वाली गाड़ियों को पेट्रोल-डीजल नहीं मिलेगा?
सुप्रीम कोर्ट ने सड़क सुरक्षा और मोटर इंश्योरेंस नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए एक नया सुझाव दिया है। कोर्ट ने कहा है कि पेट्रोल पंपों पर ईंधन देने की व्यवस्था को गाड़ी के वैध इंश्योरेंस से जोड़ा जा सकता है।
क्या है कोर्ट का प्रस्ताव?
जस्टिस संजय करोल और प्रशांत कुमार मिश्रा की बेंच ने IRDAI और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) को मिलकर एक पायलट प्रोजेक्ट तैयार करने का निर्देश दिया है।
इस प्रस्ताव के तहत, अगर किसी गाड़ी का इंश्योरेंस वैध नहीं होगा, तो उसे पेट्रोल या डीजल नहीं दिया जा सकता, जब तक कि उसका इंश्योरेंस रिन्यू न हो जाए।
क्यों दिया गया यह सुझाव?
सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि इससे:
- बिना इंश्योरेंस वाली गाड़ियों की पहचान आसान होगी।
- वाहन मालिक समय पर अपना इंश्योरेंस रिन्यू कराएंगे।
- सड़क सुरक्षा और मोटर व्हीकल एक्ट के नियमों का बेहतर पालन होगा।
थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस है जरूरी
कोर्ट ने याद दिलाया कि मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 146 के तहत हर वाहन के लिए थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस होना अनिवार्य है।
कोर्ट ने यह भी कहा कि इस व्यवस्था को ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरों की मदद से लागू किया जा सकता है। फिलहाल यह सिर्फ पायलट प्रोजेक्ट का प्रस्ताव है और इसे लागू करने पर संबंधित विभाग आगे फैसला करेंगे।
ANPR कैमरों पोर्टल से जोड़ने के आदेश
कोर्ट का यह प्रस्ताव देश भर में अनिवार्य मोटर इंश्योरेंस को बेहतर ढंग से लागू करने के लिए जारी किए गए निर्देशों का एक हिस्सा है। बेंच ने यह भी निर्देश दिया कि हाईवे और सड़कों पर लगे ANPR कैमरों को इंश्योरेंस इंफॉर्मेशन ब्यूरो डेटाबेस और VAHAN पोर्टल से जोड़ा जाए, ताकि बिना इंश्योरेंस वाले वाहनों के लिए अपने-आप ई-चालान बन सकें।
राज्य पुलिस कर्मियों को भी निर्देश दिया गया है कि वे इंश्योरेंस की स्थिति की तुरंत जांच करने और नियमों के उल्लंघन पर चालान काटने के लिए उन्हीं डेटाबेस से जुड़े हैंडहेल्ड डिवाइस या मोबाइल ऐप का इस्तेमाल करें।
56% वाहनों का इंश्योरेंस वैलिड नहीं
कोर्ट ने इस बात पर चिंता जताई कि भारतीय सड़कों पर चलने वाले लगभग 56% वाहनों का इंश्योरेंस वैलिड नहीं है। संसदीय स्थायी समिति की रिपोर्ट का हवाला देते हुए, कोर्ट ने बताया कि 30.48 करोड़ वाहनों में से लगभग 16.54 करोड़ वाहन बिना इंश्योरेंस के हैं। इससे सड़क दुर्घटनाओं के कई पीड़ितों को समय पर मुआवजा नहीं मिल पाता और उन्हें लंबी कानूनी प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है।
भारत में 4,87,705 सड़क दुर्घटनाएं हुईं
बेंच ने सरकारी आंकड़ों का भी जिक्र किया, जिनके अनुसार 2024 में भारत में 4,87,705 सड़क दुर्घटनाएं हुईं। इससे सड़क सुरक्षा को बेहतर बनाने और यह पक्का करने के लिए सख्त नियमों को लागू करने की जरुरत पर जोर दिया गया कि अनिवार्य इंश्योरेंस व्यवस्था के जरिए पीड़ितों को उचित सुरक्षा मिले।
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