नाग पंचमी 17 अगस्त 2026 को मनाई जाएगी
भारत में त्योहारों का महत्व सिर्फ धार्मिक मान्यताओं तक सीमित नहीं है। कई त्योहार रिश्तों, प्रकृति और परंपराओं से भी जुड़े होते हैं। नाग पंचमी ऐसा ही एक पर्व है, जिसमें नाग देवता की पूजा के साथ प्रकृति के प्रति सम्मान का संदेश दिया जाता है।
सनातन परंपरा के अनुसार, नाग पंचमी सावन महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाई जाती है। इस साल नाग पंचमी 17 अगस्त 2026 को मनाई जाएगी।
मान्यता है कि इस दिन नाग देवता की पूजा करने और मंत्रों का जाप करने से सर्प भय और कई तरह की परेशानियों से मुक्ति मिलती है।
नाग पंचमी पर कौन से मंत्रों का जाप करें?
1. नाग देवता का मूल मंत्र
“ॐ नमः नागाय”
नाग पंचमी के दिन इस मंत्र का 108 बार जाप करने की परंपरा है।
2. नाग गायत्री मंत्र
“ॐ फणिनायकाय विद्महे विषदन्ताय धीमहि तन्नो सर्पः प्रचोदयात्।”
इस मंत्र का जाप नाग देवता की आराधना के लिए किया जाता है।
3. अष्टनाग स्तुति
“अनन्तं वासुकिं शेषं पद्मनाभं च कम्बलम्।
शङ्खपालं धृतराष्ट्रं तक्षकं कालियं तथा॥”
इसमें आठ प्रमुख नाग देवताओं का स्मरण किया जाता है।
4. नागराज मंत्र
“ॐ नागराजाय नमः”
नाग पंचमी पर श्रद्धा से इस मंत्र का जाप किया जाता है।
नाग पंचमी की पूजा कैसे करें?
नाग पंचमी के दिन नाग देवता की मूर्ति या चित्र की पूजा की जा सकती है। पूजा में चंदन, अक्षत, फूल और दूर्वा अर्पित करें।
इसके साथ ही शिव मंदिर जाकर शिवलिंग पर जल चढ़ाना भी शुभ माना जाता है। इस दौरान “ॐ नमः शिवाय” का जाप किया जा सकता है।
कई लोग इस दिन व्रत रखते हैं और नाग पंचमी की कथा सुनते हैं। धार्मिक मान्यता में अस्तिक मुनि और नागराज तक्षक से जुड़ी कथा का विशेष महत्व बताया गया है।
नाग पंचमी पर इन बातों का रखें ध्यान
जीवित सांप को दूध न पिलाएं: सांपों को दूध पिलाना उनके लिए नुकसानदायक हो सकता है। पूजा के लिए दूध नाग देवता की मूर्ति या चित्र पर ही अर्पित करें।
जमीन की खुदाई से बचें: धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन खेत में जुताई, जमीन खोदने या गड्ढा करने से बचना चाहिए।
जीवों को नुकसान न पहुंचाएं: नाग पंचमी का संदेश प्रकृति और सभी जीवों के प्रति सम्मान का भी है। इसलिए सांपों या किसी अन्य जीव को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए।
सात्विक भोजन करें: धार्मिक परंपराओं में इस दिन सात्विक भोजन करने और मांस-मदिरा जैसी चीजों से दूर रहने की सलाह दी जाती है।
नाग पंचमी का पर्व श्रद्धा के साथ-साथ प्रकृति और जीव-जंतुओं के प्रति करुणा और सम्मान का संदेश भी देता है।
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि NAV24news किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.
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