Pratapgarh News | 24 अगस्त 2026 – उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ में प्रयागराज-लखनऊ हाईवे पर सोमवार को बड़ा हादसा होते-होते टल गया। बरई गांव के पास फोरलेन सड़क का एक हिस्सा अचानक धंस गया। सड़क धंसने की वजह से हाईवे की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। खास बात यह है कि जिस सड़क के धंसने की घटना सामने आई है, उसका निर्माण करीब एक वर्ष पहले ही कराया गया था।
बारिश के मौसम में हाईवे का इस तरह धंसना वाहन चालकों के लिए गंभीर खतरा बन सकता था। गनीमत रही कि समय रहते सड़क के क्षतिग्रस्त हिस्से पर लोगों की नजर पड़ गई और बड़ा हादसा टल गया।
बरई गांव के पास अचानक धंसी सड़क – प्रयागराज-लखनऊ
मिली जानकारी के मुताबिक प्रतापगढ़ जिले में प्रयागराज-लखनऊ मार्ग पर बरई गांव के पास सड़क का एक हिस्सा धंस गया। सड़क के बीच बने गड्ढे और धंसे हुए हिस्से ने हाईवे से गुजरने वाले वाहनों के लिए खतरा पैदा कर दिया।
यह मार्ग प्रयागराज और लखनऊ के बीच आने-जाने वाले लोगों के लिए महत्वपूर्ण है। रोजाना इस सड़क से बड़ी संख्या में छोटे-बड़े वाहन गुजरते हैं। ऐसे में सड़क का अचानक धंसना किसी बड़े हादसे की वजह बन सकता था।
एक साल पहले ही बना था फोरलेन
इस घटना ने सबसे ज्यादा सवाल इसलिए खड़े किए हैं क्योंकि संबंधित सड़क को करीब एक साल पहले ही फोरलेन के रूप में तैयार किया गया था। इतनी कम अवधि में सड़क के धंसने से निर्माण की गुणवत्ता और सड़क के नीचे की संरचना को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
हालांकि सड़क धंसने की वास्तविक वजह क्या है, इसका अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही सामने आएगा। इसे केवल बारिश या निर्माण गुणवत्ता से जोड़कर निश्चित दावा करना फिलहाल उचित नहीं होगा।
बारिश के बीच सड़क धंसने से बढ़ी चिंता
उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में इन दिनों बारिश और बाढ़ की स्थिति बनी हुई है। प्रयागराज में भी गंगा और यमुना के जलस्तर को लेकर हाल के दिनों में चिंता रही है। हालांकि 23 अगस्त को प्रयागराज में गंगा का जलस्तर घटने की जानकारी सामने आई थी, जबकि यमुना भी स्थिर या घटती बताई गई थी।
ऐसे मौसम में सड़क के नीचे पानी का रिसाव, मिट्टी का कटाव या जल निकासी की समस्या सड़क की मजबूती को प्रभावित कर सकती है। लेकिन प्रतापगढ़ में इस विशेष घटना के पीछे कौन-सा कारण रहा, इसकी आधिकारिक तकनीकी जांच जरूरी होगी।
बड़ा हादसा टलने से मिली राहत

हाईवे पर सड़क धंसने की घटना के बावजूद राहत की बात यह है कि कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ। यदि तेज रफ्तार से आने वाला कोई वाहन अचानक धंसे हिस्से में पहुंच जाता तो वाहन का संतुलन बिगड़ सकता था।
फोरलेन हाईवे पर वाहनों की गति सामान्य ग्रामीण सड़कों की तुलना में अधिक होती है। इसलिए सड़क में अचानक बने गड्ढे या धंसे हुए हिस्से को समय रहते चिन्हित करना बेहद जरूरी है।
सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर उठे सवाल
एक साल पहले बनी सड़क के धंसने की घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल सड़क निर्माण की गुणवत्ता को लेकर है।
सड़क निर्माण में केवल ऊपर से बिछाई गई डामर की परत ही महत्वपूर्ण नहीं होती। सड़क की मजबूती उसके नीचे की मिट्टी, बेस और सब-बेस की गुणवत्ता, जल निकासी और निर्माण प्रक्रिया पर भी निर्भर करती है।
अगर सड़क के नीचे पानी जमा हो जाए या मिट्टी का कटाव हो तो ऊपर की सड़क कमजोर हो सकती है और अचानक धंसाव दिखाई दे सकता है।
हालांकि इस मामले में वास्तविक कारण तकनीकी जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।
प्रयागराज-लखनऊ पर यात्रियों के लिए क्या है खतरा?
प्रयागराज-लखनऊ हाईवे पर लगातार यातायात रहता है। सड़क के धंसे हिस्से को यदि समय रहते सुरक्षित नहीं किया गया तो रात के समय दुर्घटना का खतरा और बढ़ सकता है।
रात में वाहन चालकों को सड़क के क्षतिग्रस्त हिस्से का अंदाजा देर से लग सकता है। खासकर तेज गति से चल रहे वाहन के सामने अचानक गड्ढा आने पर ब्रेक लगाने से भी दुर्घटना हो सकती है।
इसलिए क्षतिग्रस्त हिस्से के आसपास बैरिकेडिंग, चेतावनी संकेत और पर्याप्त रोशनी जैसी व्यवस्थाएं जरूरी हो जाती हैं।
प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती
बारिश के मौसम में सड़कों की निगरानी प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती होती है। एक तरफ लगातार बारिश से सड़कें प्रभावित होती हैं, वहीं दूसरी तरफ हाईवे पर यातायात को रोकना भी आसान नहीं होता।
ऐसे में सड़क धंसने या गड्ढा बनने की सूचना मिलते ही संबंधित विभाग को मौके पर पहुंचकर स्थिति का निरीक्षण करना चाहिए।
जरूरत पड़ने पर यातायात को नियंत्रित करके सड़क के क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत कराना जरूरी होगा।
आसपास के इलाकों में बारिश का असर
प्रतापगढ़ और आसपास के क्षेत्रों में बारिश का असर सड़कों और संपर्क मार्गों पर भी देखा जा रहा है। प्रयागराज क्षेत्र में भी हाल के दिनों में बाढ़ और बारिश से कई स्थान प्रभावित हुए हैं। बेलन नदी में बाढ़ के कारण प्रयागराज के कोरांव क्षेत्र में कई गांवों का संपर्क प्रभावित होने और पुलों के क्षतिग्रस्त होने की खबर भी सामने आई थी।
इस व्यापक बारिश के माहौल में हाईवे की स्थिति पर निगरानी और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
वाहन चालकों को बरतनी होगी सावधानी
जब तक सड़क के धंसे हिस्से की पूरी तरह मरम्मत नहीं हो जाती, वाहन चालकों को इस मार्ग पर अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए।
खासकर बारिश या रात के समय तेज गति से वाहन चलाने से बचना चाहिए। सड़क पर बैरिकेड या चेतावनी संकेत दिखाई दें तो उनकी अनदेखी नहीं करनी चाहिए।
यदि सड़क पर पानी भरा हो तो उसकी गहराई का अंदाजा लगाए बिना वाहन को तेज गति से निकालना भी जोखिम भरा हो सकता है।
क्या सिर्फ बारिश बनी वजह?
सड़क धंसने के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या इसका कारण सिर्फ लगातार बारिश है। इसका जवाब अभी स्पष्ट नहीं है।
बारिश के कारण सड़क के नीचे पानी जाने या मिट्टी कमजोर होने की संभावना हो सकती है, लेकिन सड़क निर्माण की गुणवत्ता, जल निकासी व्यवस्था और जमीन की स्थिति जैसे कई पहलुओं की जांच जरूरी होगी।
इसलिए किसी एक कारण को जिम्मेदार ठहराने से पहले संबंधित विभाग की तकनीकी रिपोर्ट का इंतजार करना बेहतर होगा।
जांच से सामने आएगी असली वजह
अब सबसे महत्वपूर्ण यह होगा कि संबंधित विभाग सड़क के धंसे हिस्से की जांच कैसे करता है। सड़क की ऊपरी परत के साथ-साथ उसके नीचे की संरचना और जल निकासी व्यवस्था की जांच से ही पता चल सकता है कि धंसाव क्यों हुआ।
यदि निर्माण में कोई तकनीकी कमी सामने आती है तो जिम्मेदारी तय करना भी जरूरी होगा। वहीं यदि बारिश या प्राकृतिक कारणों से सड़क प्रभावित हुई है तो भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए बेहतर ड्रेनेज और सुरक्षा उपाय किए जा सकते हैं।DAINIK JAGRAN
निष्कर्ष
प्रतापगढ़ में प्रयागराज-लखनऊ हाईवे पर सड़क धंसने की घटना ने एक बार फिर सड़क निर्माण और रखरखाव की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बरई गांव के पास फोरलेन सड़क का हिस्सा धंसने से बड़ा हादसा हो सकता था, लेकिन समय रहते खतरा टल गया। सबसे अहम बात यह है कि संबंधित सड़क का निर्माण करीब एक साल पहले ही हुआ था।



