घर में LPG सिलेंडर का इस्तेमाल रोज होता है, इसलिए गैस से जुड़ी छोटी-सी लापरवाही भी खतरनाक हो सकती है। कई बार सिलेंडर बदलने या रेगुलेटर लगाने के बाद कनेक्शन ढीला महसूस होता है। ऐसी स्थिति में गैस चालू करके चूल्हा जलाना बिल्कुल सही नहीं है।
सबसे पहले यह जांचना जरूरी है कि रेगुलेटर सिलेंडर से ठीक तरह जुड़ा है या नहीं और कहीं गैस लीक तो नहीं हो रही।
रेगुलेटर का क्या काम होता है?
LPG सिलेंडर के अंदर गैस काफी दबाव में होती है। रेगुलेटर इस दबाव को कम करके गैस को चूल्हे तक इस्तेमाल लायक दबाव में पहुंचाता है।
इसलिए रेगुलेटर में खराबी या कनेक्शन सही नहीं होने पर गैस की सप्लाई प्रभावित हो सकती है और रिसाव का खतरा भी बढ़ सकता है।
रेगुलेटर ढीला लगे तो क्या करें?
अगर रेगुलेटर सिलेंडर पर ठीक से लॉक नहीं हो रहा या ढीला महसूस हो रहा है तो गैस की सप्लाई चालू न करें।
सबसे पहले रेगुलेटर और सिलेंडर के कनेक्शन को ध्यान से देखें। जांचें कि रेगुलेटर सीधा लगा है और उसका लॉकिंग सिस्टम सही तरीके से जुड़ा है या नहीं।
अगर रेगुलेटर टेढ़ा लगा है, ठीक से लॉक नहीं हो रहा या उसका कोई हिस्सा टूटा हुआ दिखाई दे रहा है तो उसका इस्तेमाल न करें।
गैस की गंध आए तो रहें सावधान
अगर रेगुलेटर के पास गैस की गंध आ रही है तो इसे बिल्कुल नजरअंदाज न करें। LPG में खास तरह की गंध मिलाई जाती है, जिससे रिसाव का पता चल सके।
ऐसी स्थिति में माचिस, लाइटर या मोमबत्ती से रिसाव जांचने की कोशिश न करें। इलेक्ट्रिकल स्विच को भी ऑन या ऑफ करने से बचें।
अगर सुरक्षित तरीके से संभव हो तो गैस की सप्लाई बंद करें, जगह को हवादार करें और गैस एजेंसी या प्रशिक्षित तकनीशियन से मदद लें।
गैस लीक की जांच खुद न करें
रेगुलेटर के आसपास गैस रिसाव का शक होने पर किसी भी तरह का जोखिम न लें। खुली आग से गैस लीक जांचना बेहद खतरनाक हो सकता है।
अगर कनेक्शन ढीला है, रेगुलेटर खराब है या गैस की गंध लगातार आ रही है तो इसे इस्तेमाल करने के बजाय अधिकृत गैस सर्विस या प्रशिक्षित तकनीशियन से जांच करवाएं।
रेगुलेटर को खुद खोलकर उसकी अंदरूनी मरम्मत करने से भी बचना चाहिए।
चूल्हे की लौ में बदलाव भी है संकेत
रेगुलेटर लगाने के बाद अगर चूल्हे की लौ अचानक बहुत छोटी हो जाए, बार-बार बुझने लगे या असामान्य रूप से बड़ी और तेज हो जाए तो इसे नजरअंदाज न करें।
ऐसा गैस की सप्लाई, रेगुलेटर या दबाव से जुड़ी समस्या के कारण हो सकता है। ऐसी स्थिति में किसी योग्य व्यक्ति से गैस कनेक्शन और रेगुलेटर की जांच करवाना बेहतर है।
टूटे या पुराने रेगुलेटर का इस्तेमाल न करें
समय के साथ रेगुलेटर की रबर सील और दूसरे हिस्से खराब हो सकते हैं। अगर रेगुलेटर में दरार, टूट-फूट, जंग दिखाई दे रही है या वह ठीक से लॉक नहीं हो रहा है तो उसे इस्तेमाल न करें।
रेगुलेटर को साफ और सूखा रखना भी जरूरी है। हालांकि, इसे साफ करने के लिए खोलने या अंदर के हिस्सों से छेड़छाड़ करने से बचें।
किसी भी रेगुलेटर का इस्तेमाल न करें
हर गैस रेगुलेटर एक जैसा नहीं होता। घरेलू LPG सिलेंडर के लिए उसी के अनुसार सही रेगुलेटर का इस्तेमाल करना चाहिए।
किसी दूसरे गैस सिस्टम का रेगुलेटर LPG सिलेंडर पर लगाने की कोशिश न करें। नया रेगुलेटर खरीदना हो तो अधिकृत गैस एजेंसी या प्रमाणित उत्पाद का ही इस्तेमाल करें।
कब बदलवाना चाहिए रेगुलेटर?
अगर रेगुलेटर बार-बार ढीला हो रहा है, गैस की गंध आती है, वह लॉक नहीं हो रहा, उसमें दरार या जंग दिखाई दे रही है या चूल्हे की लौ असामान्य हो गई है तो उसे बदलवाने की जरूरत हो सकती है।
बहुत पुराने रेगुलेटर को सिर्फ इसलिए इस्तेमाल करते रहना ठीक नहीं है कि वह ऊपर से सही दिखाई दे रहा है।
सबसे जरूरी बात
रेगुलेटर ढीला लगे तो गैस जलाने की जल्दबाजी न करें। पहले कनेक्शन की स्थिति देखें। गैस की गंध, रिसाव, टूट-फूट या लौ में असामान्य बदलाव दिखाई दे तो गैस का इस्तेमाल रोक दें और अधिकृत गैस एजेंसी या प्रशिक्षित तकनीशियन से जांच करवाएं।
सुरक्षा में थोड़ी सी सावधानी बड़ी दुर्घटना से बचा सकती है।
Disclaimer:
इस लेख में दी गई जानकारी सामान्य जागरूकता और सुरक्षा संबंधी जानकारी के उद्देश्य से है। LPG सिलेंडर, रेगुलेटर या गैस कनेक्शन में किसी भी तरह की खराबी होने पर खुद से मरम्मत या छेड़छाड़ न करें। ऐसी स्थिति में अधिकृत गैस एजेंसी या प्रशिक्षित तकनीशियन से संपर्क करें। किसी भी जानकारी को अपनाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ की सलाह लेना उचित है।
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