जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव आधी रात को मनाने की परंपरा है। इस दिन बड़ी संख्या में भक्त मंदिर जाकर कान्हा का जन्मोत्सव मनाते हैं। हालांकि, छोटे बच्चों, बुजुर्गों, स्वास्थ्य या किसी दूसरी वजह से हर किसी के लिए रात में मंदिर जाना संभव नहीं होता।
ऐसे में मंदिर नहीं जा पाने की चिंता करने की जरूरत नहीं है। आप घर पर ही बाल गोपाल की पूजा, सुंदर झांकी और जन्मोत्सव का आयोजन कर सकते हैं। इस साल जन्माष्टमी 4 सितंबर को मनाई जाएगी।
घर में ऐसे करें श्रीकृष्ण की पूजा
जन्माष्टमी की रात निशीथ काल यानी करीब 12 बजे भगवान श्रीकृष्ण का ध्यान करें। सबसे पहले दीपक जलाएं और भगवान गणेश व अपने इष्ट देव का स्मरण करें।
इसके बाद बाल गोपाल का पंचामृत से अभिषेक करें। अभिषेक के बाद भगवान को साफ वस्त्र पहनाएं और मुकुट, मोरपंख, बांसुरी आदि से उनका श्रृंगार करें।
पूजा के दौरान भगवान को चंदन, अक्षत, फूल और तुलसी दल अर्पित कर सकते हैं।
जन्म के समय शंख और घंटी बजाएं
रात 12 बजे भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का समय होने पर शंख और घंटी बजाकर जन्मोत्सव मनाया जाता है। इसके बाद कान्हा की आरती करें।
भगवान को माखन-मिश्री, पंजीरी, फल और अन्य सात्विक चीजों का भोग लगाया जा सकता है।
परिवार के सभी सदस्य मिलकर ‘नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की’ जैसे भजन और पारंपरिक गीत भी गा सकते हैं।
घर में ऐसे सजाएं कान्हा की झांकी
घर में झांकी सजाने के लिए सबसे पहले पूजा की जगह को अच्छी तरह साफ करें। इसके बाद एक छोटी चौकी पर पीला, लाल या सफेद कपड़ा बिछाकर बाल गोपाल को विराजमान करें।
झांकी को सजाने के लिए आप इन चीजों का इस्तेमाल कर सकते हैं:
- पालना या छोटा झूला
- मोरपंख और बांसुरी
- फूल और छोटे मिट्टी के दीपक
- छोटी मटकी और मिट्टी के बर्तन
- गाय-बछड़े की छोटी प्रतिमाएं
अगर घर में पर्याप्त जगह है तो गोकुल या नंद भवन जैसा छोटा दृश्य भी तैयार किया जा सकता है। भगवान के जन्म के समय परिवार के सदस्य मिलकर पालना झुला सकते हैं और कृष्ण जन्म से जुड़े भजन गा सकते हैं।
जन्माष्टमी पर खीरा काटने की परंपरा
कुछ स्थानों पर जन्माष्टमी के दिन खीरा काटने की परंपरा भी है। इसके लिए साफ और बिना कटा हुआ ताजा खीरा लिया जाता है और उसे पूजा स्थान पर रखा जाता है।
कुछ परंपराओं में खीरे के ऊपरी हिस्से में छोटा कट लगाकर उसमें बाल कृष्ण की छोटी प्रतिमा या लड्डू गोपाल के प्रतीक को रखने की बात कही गई है।
निशीथ काल में कृष्ण जन्म के समय मंत्र, भजन और आरती के साथ खीरा काटने की रस्म की जाती है। इसे भगवान श्रीकृष्ण के जन्म और कारागार से उनके प्राकट्य से प्रतीकात्मक रूप से जोड़ा जाता है।
इसके बाद भगवान को माखन-मिश्री, फल आदि का भोग लगाकर प्रसाद ग्रहण किया जा सकता है।
FAQ
1. क्या जन्माष्टमी पर घर में झांकी सजाना जरूरी है?
नहीं। झांकी सजाना जरूरी नहीं है। श्रद्धा के अनुसार केवल बाल गोपाल की पूजा, भोग और आरती करके भी जन्मोत्सव मनाया जा सकता है।
2. घर में गोकुल की झांकी कैसे बनाएं?
छोटी मटकी, माखन की हांडी, गाय-बछड़े की प्रतिमा, पालना और फूलों की मदद से घर में गोकुल जैसा छोटा दृश्य बनाया जा सकता है।
3. क्या बच्चों को झांकी सजाने में शामिल कर सकते हैं?
हां, बच्चे फूल सजाने, पालना तैयार करने और कृष्ण भजन गाने जैसी गतिविधियों में शामिल हो सकते हैं।
4. जन्म के बाद कान्हा को क्या भोग लगाएं?
माखन-मिश्री, पंजीरी, फल, दूध से बनी मिठाई और अन्य सात्विक पकवानों का भोग लगाया जा सकता है। भोग में तुलसी दल रखने की परंपरा भी है।
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