ऋषि पंचमी को आम त्योहार की तरह नहीं, बल्कि एक व्रत के रूप में माना जाता है। इस दिन सप्तर्षियों यानी सात महान ऋषियों का पूजन किया जाता है। परंपरा के अनुसार यह व्रत विशेष रूप से महिलाओं से जुड़ा है और इसे शुद्धि, प्रायश्चित और ऋषियों के प्रति श्रद्धा प्रकट करने के लिए रखा जाता है।
कई क्षेत्रों और परिवारों में आज भी मासिक धर्म के दौरान महिलाओं को रसोई में जाने, धार्मिक गतिविधियों में शामिल होने या परिवार के सदस्यों को छूने की अनुमति नहीं होती। धार्मिक मान्यताओं में इन परंपराओं से जुड़े नियमों का पालन न करने को ‘रजस्वला दोष’ से जोड़ा गया है। इसी दोष से मुक्ति के लिए ऋषि पंचमी का व्रत करने की परंपरा बताई गई है।
ऋषि पंचमी पर ऋषियों की पूजा क्यों होती है?
हिंदू दर्शन में देवी-देवताओं और ऋषियों की भूमिका अलग-अलग मानी गई है। देवी-देवताओं को प्रकृति और दैवी शक्तियों से जोड़ा जाता है, जबकि ऋषियों को ज्ञान, तप और साधना की परंपरा का वाहक माना जाता है।
मान्यता है कि ऋषियों ने वेद, धर्म, संस्कार और जीवन से जुड़े ज्ञान को आगे बढ़ाया। इसलिए ऋषि पंचमी पर उनकी पूजा करके उनके प्रति सम्मान और आभार व्यक्त किया जाता है।
इसे ‘ऋषि ऋण’ की अवधारणा से भी जोड़ा जाता है। हिंदू परंपरा में देव ऋण, ऋषि ऋण और पितृ ऋण का उल्लेख मिलता है। ऋषियों के ज्ञान और योगदान को याद करना इसी ऋषि ऋण की स्मृति माना जाता है। इसलिए इस दिन देवी-देवताओं के बजाय सप्तर्षियों का पूजन प्रमुख होता है।
ऋषि पंचमी 2026 की तारीख को लेकर क्यों है कंफ्यूजन?
पंचांग के अनुसार भाद्रपद शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि 15 सितंबर 2026 को सुबह 7:44 बजे शुरू होगी और 16 सितंबर को सुबह 8:59 बजे तक रहेगी।
ऋषि पंचमी की पूजा दोपहर के समय पंचमी तिथि में करने की परंपरा है। इसलिए 15 सितंबर 2026 को ऋषि पंचमी का व्रत और पूजन किया जाएगा। इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 11:02 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक बताया गया है।
FAQ
1. ऋषि पंचमी पर सप्तर्षियों की पूजा क्यों होती है?
ऋषि पंचमी ऋषि ऋण, ज्ञान की परंपरा और प्रायश्चित से जुड़ा व्रत है। इसलिए इस दिन सप्तर्षियों की पूजा की जाती है।
2. ऋषि पंचमी पर दोपहर में पूजा क्यों की जाती है?
धार्मिक परंपरा के अनुसार पंचमी तिथि में दोपहर के समय सप्तर्षियों की पूजा करने का विधान है।
3. क्या ऋषि पंचमी सिर्फ महिलाओं का व्रत है?
परंपरागत रूप से यह व्रत महिलाओं से ज्यादा जुड़ा हुआ है। हालांकि इसका मुख्य भाव ऋषियों के प्रति श्रद्धा, सम्मान और शुद्धि से जुड़ा है।
4. ऋषि पंचमी में अरुंधती की पूजा क्यों होती है?
सप्तर्षियों के साथ अरुंधती का भी स्मरण और पूजन किया जाता है। उन्हें दांपत्य निष्ठा, तप और आदर्श जीवन का प्रतीक माना जाता है।
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