गणेश चतुर्थी के दिन घर में गणपति बप्पा की स्थापना करने के बाद भक्त अपनी परंपरा और मान्यता के अनुसार उनका विसर्जन करते हैं। कुछ लोग डेढ़ दिन, तो कुछ 3, 5, 7 या 10 दिन बाद गणपति की प्रतिमा का विसर्जन करते हैं। वहीं, अनंत चतुर्दशी को गणेश विसर्जन का सबसे प्रमुख दिन माना जाता है।
इस बार गणेश चतुर्थी और स्थापना 14 सितंबर 2026 को हुई थी। ऐसे में 19 सितंबर को गणेश स्थापना का छठा दिन होगा। पंचांग परंपरा के अनुसार 3रे, 5वें और 7वें दिन विसर्जन की परंपरा ज्यादा प्रचलित है। इसलिए 19 सितंबर के बजाय 20 सितंबर को सातवें दिन गणेश विसर्जन करना शुभ माना जा सकता है।
20 सितंबर को गणेश विसर्जन का शुभ समय
सातवें दिन गणेश विसर्जन के लिए ये मुहूर्त बताए गए हैं:
- प्रातः मुहूर्त: सुबह 7:40 से दोपहर 12:14 बजे तक
- अपराह्न मुहूर्त: दोपहर 1:46 से 3:17 बजे तक
- सायाह्न मुहूर्त: शाम 6:20 से रात 10:46 बजे तक
- रात्रि मुहूर्त: रात 1:43 से 3:12 बजे तक, 21 सितंबर
- उषाकाल मुहूर्त: सुबह 4:40 से 6:09 बजे तक, 21 सितंबर
क्या महिलाएं भी कर सकती हैं गणेश विसर्जन?
गणेश विसर्जन केवल पुरुष ही कर सकते हैं, ऐसा कोई जरूरी शास्त्रीय नियम नहीं है। अगर घर में किसी महिला ने गणपति की पूजा की है, तो वह भी उत्तर पूजा और विसर्जन की प्रक्रिया में शामिल हो सकती हैं।
बच्चे भी परिवार के बड़ों के साथ पूजा और विदाई में शामिल हो सकते हैं। धार्मिक परंपरा में मुख्य रूप से श्रद्धा, स्वच्छता और विधि-विधान को महत्व दिया जाता है।
विसर्जन से पहले क्या करें?
गणेश विसर्जन से पहले उत्तर पूजा और आरती करने की परंपरा है। सबसे पहले गणपति को नैवेद्य अर्पित किया जाता है और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना की जाती है।
इसके बाद भगवान गणेश की आरती करके उन्हें सम्मानपूर्वक विदाई दी जाती है। विसर्जन का दिन आमतौर पर स्थापना के समय किए गए संकल्प और परिवार की परंपरा के अनुसार तय किया जाता है।
उत्तर पूजा क्या होती है?
उत्तर पूजा गणेश विसर्जन से पहले की जाने वाली अंतिम पूजा मानी जाती है। इसमें भगवान गणेश की दोबारा पूजा की जाती है, उन्हें फूल, दूर्वा, अक्षत, धूप और नैवेद्य चढ़ाया जाता है और आरती की जाती है।
इसके बाद भगवान गणेश से परिवार पर अपनी कृपा बनाए रखने और सुख-समृद्धि देने की प्रार्थना की जाती है। पूजा पूरी होने के बाद प्रतिमा को सम्मान के साथ विसर्जन के लिए ले जाया जाता है।
उत्तर पूजा में क्या करें?
- गणपति के सामने दीपक जलाएं।
- फूल, अक्षत, दूर्वा, धूप और नैवेद्य अर्पित करें।
- भगवान गणेश की आरती करें।
- परिवार की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करें।
- स्थापना के समय किए गए संकल्प की पूर्णता के भाव से गणपति को विदाई दें।
- इसके बाद प्रतिमा को श्रद्धापूर्वक विसर्जन स्थल तक ले जाएं।
ध्यान रखें: अलग-अलग परिवारों और क्षेत्रों में गणेश विसर्जन की परंपराएं अलग हो सकती हैं। इसलिए अपने परिवार की परंपरा और स्थानीय पंचांग के अनुसार विसर्जन का दिन और मुहूर्त तय करना उचित है। 2026 में अनंत चतुर्दशी 25 सितंबर को है, जिसे गणेश विसर्जन का प्रमुख दिन माना जाता है।
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि NAV24news किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.



