भारत में भगवान गणेश की पूजा में मोदक और लड्डू का भोग लगाने की परंपरा है। लेकिन थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक से सामने आया एक वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। यहां भक्त भगवान गणेश को लड्डू या फल की जगह बबल टी यानी बोबा मिल्क टी का भोग चढ़ाते नजर आ रहे हैं।
गणेश मंदिर के बाहर बबल टी के कप
यह वीडियो बैंकॉक की कंटेंट क्रिएटर पिया पिंग ने इंस्टाग्राम पर शेयर किया है। वीडियो में वह यूनियन मॉल के बाहर बने भगवान गणेश के मंदिर में दर्शन करने पहुंचती हैं।
मंदिर में भगवान गणेश की प्रतिमा के सामने बड़े-बड़े बबल टी के कप रखे दिखाई दे रहे हैं। इन सभी कप में स्ट्रॉ भी लगी हुई है। पिया खुद भी पूजा के लिए कई कप बबल टी लेकर मंदिर पहुंची थीं।
मंदिर के पास लगा है बबल टी का गाइड
वीडियो में मंदिर के पास एक गाइड बोर्ड भी नजर आता है। इसमें यूनियन मॉल की अलग-अलग मंजिलों पर मौजूद बोबा टी की दुकानों और ब्रांड्स की जानकारी दी गई है।
इससे श्रद्धालु अपनी पसंद की दुकान से बबल टी खरीदकर भगवान गणेश को अर्पित कर सकते हैं।
मनोकामना पूरी होने पर बढ़ जाता है भोग
वीडियो में बताया गया है कि भगवान गणेश को बबल टी चढ़ाने के पीछे एक स्थानीय मान्यता भी है।
कहा जाता है कि जब कोई भक्त पहली बार भगवान गणेश से अपनी मनोकामना मांगता है, तो वह आमतौर पर 2 या 3 कप बबल टी चढ़ाता है। अगर उसकी मनोकामना पूरी हो जाती है, तो वह धन्यवाद के तौर पर ज्यादा कप चढ़ाता है।
कई मामलों में यह संख्या बढ़कर 50 से 200 कप तक पहुंचने की बात भी कही गई है।
थाईलैंड में गणेश जी को क्यों मानते हैं?
थाईलैंड में भगवान गणेश को ‘फ्रा फिकानेत’ (Phra Phikanet) के नाम से जाना जाता है। यहां उन्हें बुद्धि, कला और सफलता से जुड़े देवता के रूप में माना जाता है।
थाई संस्कृति में हिंदू और बौद्ध परंपराओं का प्रभाव दिखाई देता है। स्थानीय मान्यता के अनुसार, भगवान को ऐसी चीज भी प्रेम और श्रद्धा से अर्पित की जा सकती है जो भक्त को खुद पसंद हो।
इसी वजह से बबल टी जैसी लोकप्रिय ड्रिंक भी भगवान गणेश के भोग का हिस्सा बन गई है।
सोशल मीडिया पर लोगों को पसंद आया वीडियो
वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इसे काफी पसंद किया जा रहा है। कई भारतीय यूजर्स ने भी इस पर प्रतिक्रिया दी है।
लोगों का कहना है कि भक्ति में सबसे ज्यादा महत्व श्रद्धा और भावना का होता है। भोग में मोदक हो या बबल टी, भक्त का प्रेम और विश्वास ही सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।



