दशहरा और दिवाली से पहले आम लोगों को महंगाई का एक और झटका लग सकता है। देश में खाने के तेल की कीमतें बढ़ने की संभावना है। एडिबल ऑयल कंपनियां कीमतों में करीब 7-8% तक बढ़ोतरी करने पर विचार कर रही हैं।
कंपनियों की लागत बढ़ने की वजह से उनके मुनाफे पर दबाव बढ़ रहा है। हालांकि, आने वाले दिनों में तेल की सप्लाई बेहतर होने और इंपोर्ट ड्यूटी में संभावित कटौती से कीमतों में बढ़ोतरी सीमित भी रह सकती है।
अगर कंपनियां दाम बढ़ाती हैं तो मार्च के बाद यह तीसरी बार होगा, जब खाने के तेल की कीमतों में बढ़ोतरी होगी।
मार्च से जून के बीच भी बढ़े थे दाम
फाइनेंशियल एक्सप्रेस के मुताबिक, मार्च से जून के बीच कंपनियों ने दो चरणों में खाने के तेल की कीमतों में करीब 5-6% की बढ़ोतरी की थी। इस दौरान कुल मिलाकर कीमतों में करीब 10-12% तक इजाफा हुआ था।
क्यों बढ़ सकती हैं खाने के तेल की कीमतें?
खाने के तेल की कीमतों पर सबसे बड़ा दबाव अंतरराष्ट्रीय बाजार से आने वाले क्रूड एडिबल ऑयल की बढ़ी हुई लागत का है।
इसके अलावा:
- रुपये की कमजोरी
- महंगा समुद्री भाड़ा यानी फ्रेट
- इंश्योरेंस की बढ़ती लागत
- अंतरराष्ट्रीय बाजार में वेजिटेबल ऑयल की ऊंची कीमतें
इन सभी वजहों से कंपनियों की लागत बढ़ गई है।
क्रूड ऑयल की कीमत कितनी बढ़ी?
सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SEA) के आंकड़ों के अनुसार, 18 सितंबर को मुंबई पोर्ट पर क्रूड पाम ऑयल की लैंडेड कीमत करीब 1,265 डॉलर प्रति टन थी।
वहीं क्रूड सोयाबीन ऑयल की कीमत करीब 1,314 डॉलर प्रति टन और क्रूड सनफ्लावर ऑयल की कीमत करीब 1,380 डॉलर प्रति टन थी।
एक साल पहले की तुलना में पाम और सोयाबीन ऑयल की कीमत करीब 11%, जबकि सनफ्लावर ऑयल की कीमत करीब 7% अधिक थी।
कंपनियों पर बढ़ी लागत का दबाव
जानकारों के मुताबिक, क्रूड एडिबल ऑयल की लैंडेड कॉस्ट में करीब 8-11% की बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में कंपनियां बढ़ी हुई लागत का कुछ हिस्सा ग्राहकों पर डाल सकती हैं।
हालांकि, कीमत कितनी बढ़ेगी और कब बढ़ेगी, यह बाजार में मांग और सप्लाई की स्थिति पर निर्भर करेगा।
सप्लाई बढ़ने से मिल सकती है राहत
इंडस्ट्री के अनुसार आने वाले दिनों में क्रूड एडिबल ऑयल लेकर आने वाले जहाजों की संख्या बढ़ सकती है। इससे बाजार में तेल की सप्लाई और कंपनियों का स्टॉक बेहतर हो सकता है।
अगर घरेलू बाजार में तेल की उपलब्धता बढ़ती है, तो कंपनियों पर बढ़ी हुई अंतरराष्ट्रीय लागत का पूरा बोझ ग्राहकों पर डालने का दबाव कम हो सकता है।
भारत 58% से ज्यादा खाने का तेल करता है आयात
भारत अपनी कुल जरूरत का 58% से ज्यादा एडिबल ऑयल आयात करता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमत और रुपये की स्थिति का सीधा असर भारत में खाने के तेल के दाम पर पड़ता है।
देश में हर साल करीब 2.5-2.6 करोड़ टन खाने के तेल की खपत होती है। इसमें पाम, सोयाबीन और सनफ्लावर ऑयल की बड़ी हिस्सेदारी है।
ऐसे में अगर कंपनियां कीमतें बढ़ाती हैं, तो त्योहारों के मौसम में आम लोगों के घरेलू बजट पर इसका असर पड़ सकता है।



