रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध को खत्म करने की कोशिशों के बीच एक नया विवाद सामने आया है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने रूस से 60 दिनों तक युद्ध रोकने की मांग की थी, ताकि देश में राष्ट्रपति चुनाव कराए जा सकें। हालांकि, रूस ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया है। रूस का कहना है कि वह कुछ दिनों के लिए युद्ध रोकने के बजाय स्थायी शांति समझौता चाहता है।
रूस के राष्ट्रपति कार्यालय क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने सोमवार को कहा कि रूस पहले भी स्पष्ट कर चुका है कि वह अस्थायी युद्धविराम के पक्ष में नहीं है। मॉस्को चाहता है कि युद्ध को खत्म करने के लिए एक व्यापक और लंबे समय तक चलने वाला शांति समझौता किया जाए।
हालांकि, पेसकोव ने यह भी कहा कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन यूक्रेन में चुनाव के दिन हमले रोकने का आदेश देने पर विचार कर सकते हैं। रूस का यह बयान जेलेंस्की की 60 दिनों तक युद्ध रोकने की मांग के जवाब में आया है।
जेलेंस्की ने 60 दिन के युद्धविराम की मांग क्यों की?
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने रविवार को अमेरिकी न्यूज चैनल ABC News को दिए इंटरव्यू में कहा कि अगर रूस 60 दिनों तक पूरी तरह युद्ध रोकने के लिए तैयार हो जाता है, तो यूक्रेन में राष्ट्रपति चुनाव कराए जा सकते हैं।
जेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेन का अगला राष्ट्रपति कौन होगा, इसका फैसला देश की जनता को करना चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि चुनाव कराने के लिए सुरक्षित माहौल जरूरी है। इसके लिए रूस को कम से कम दो महीने तक हमले रोकने होंगे।
ट्रंप ने भी यूक्रेन में चुनाव कराने की बात कही थी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में जेलेंस्की के नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए कहा था कि यूक्रेन में अब नए राष्ट्रपति के चुनाव का समय आ गया है।
इसके जवाब में जेलेंस्की ने कहा कि देश के नेतृत्व का फैसला यूक्रेन की जनता को ही करना चाहिए। रूस भी लंबे समय से यूक्रेन में चुनाव कराने की मांग करता रहा है। मॉस्को का तर्क है कि चुनाव नहीं होने के कारण जेलेंस्की के नेतृत्व की वैधता पर सवाल उठते हैं।
हालांकि, यूक्रेन में रूस के बड़े हमले के बाद लागू मार्शल लॉ के तहत युद्ध के दौरान राष्ट्रपति चुनाव कराने पर कानूनी रोक है।
फिलहाल, रूस और यूक्रेन के बीच युद्धविराम को लेकर सहमति नहीं बन पाई है। रूस लंबे समय के शांति समझौते पर जोर दे रहा है, जबकि जेलेंस्की का कहना है कि चुनाव कराने के लिए पहले सुरक्षित माहौल तैयार करना जरूरी है।



