दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण के बीच सरकार ने प्रदूषण पर रोक लगाने के लिए कई कदम उठाए हैं। 21 अक्टूबर से राजधानी में GRAP-1 के तहत पाबंदियां लागू हैं। इसके बावजूद दिल्ली के कई इलाकों में धूल और निर्माण सामग्री खुले में पड़ी मिली। एक मीडिया पड़ताल में सरकारी एजेंसियों के कामकाज पर भी सवाल उठाए गए हैं।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के मुताबिक, शुक्रवार, 23 अक्टूबर को दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 230 दर्ज किया गया, जो खराब श्रेणी में आता है।
दिल्ली में प्रदूषण रोकने के लिए क्या हैं नियम?
GRAP-1 के तहत खुले में कूड़ा और लकड़ी जलाने पर रोक सहित प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाए गए हैं। निर्माण और तोड़फोड़ के दौरान धूल को फैलने से रोकने के लिए जरूरी उपाय करना भी अनिवार्य है।
इसके अलावा, दिल्ली सरकार 1 नवंबर से विंटर एक्शन प्लान लागू करने की तैयारी कर रही है। खबर में दावा किया गया है कि इसके तहत BS-6 से नीचे के उत्सर्जन मानक वाली गाड़ियों की दिल्ली में एंट्री पर रोक लगाने का प्रावधान होगा। इन प्रतिबंधों की वास्तविक लागू स्थिति की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है।
सड़कों पर फैली मिट्टी और बालू बनी परेशानी
दिल्ली के ITO से मंडी हाउस तक कई जगह सड़कों और फुटपाथों पर मिट्टी और बालू फैली दिखाई दी। रिपोर्ट के मुताबिक, इन इलाकों में धूल हटाने के लिए पर्याप्त कार्रवाई नहीं की गई।
विशेषज्ञों के अनुसार, सर्दियों में धूल प्रदूषण का एक बड़ा कारण होती है। सड़क पर पड़ी मिट्टी वाहनों के गुजरने से हवा में उड़ती है और लोगों की सांस के जरिए शरीर में पहुंच सकती है।
प्रदूषण में गाड़ियों और धूल की बड़ी भूमिका
विशेषज्ञ समिति के आंकड़ों के अनुसार, सर्दियों में दिल्ली के प्रदूषण में वाहनों का योगदान लगभग 27 प्रतिशत, कूड़ा जलाने का 20 प्रतिशत और धूल का 15 प्रतिशत बताया गया है।
CSE की 2024 की रिपोर्ट का हवाला देते हुए खबर में कहा गया है कि दिल्ली में हर दिन बड़ी संख्या में गाड़ियां चलती हैं। उनसे निकलने वाला धुआं हवा की गुणवत्ता को प्रभावित करता है।
दिल्ली जल बोर्ड और NDMC पर भी उठे सवाल
मीडिया पड़ताल के दौरान ITO स्थित दिल्ली जल बोर्ड के एक कार्यालय में निर्माण कार्य के दौरान बालू, गिट्टी और मिट्टी खुले में रखी मिली। रिपोर्ट के मुताबिक, धूल को रोकने के लिए सामग्री को ढकने के नियमों का पालन नहीं किया जा रहा था।
इसी तरह, मंडी हाउस में नई फुटपाथ बनाने और पेड़ों के आसपास चबूतरे के निर्माण का काम चल रहा था। वहां भी बालू, मिट्टी और सीमेंट खुले में पड़े मिले। निर्माण स्थल को ढकने के लिए इस्तेमाल होने वाला हरा कपड़ा भी निर्धारित जगह पर नहीं लगा था।
इन स्थितियों ने सरकारी एजेंसियों की ओर से प्रदूषण नियंत्रण के नियमों के पालन पर सवाल खड़े किए हैं।
प्रदूषण से बच्चों और बुजुर्गों को परेशानी
डॉक्टरों के मुताबिक, प्रदूषण बढ़ने के साथ बच्चों और बुजुर्गों में खांसी और सांस लेने में परेशानी जैसी समस्याएं देखी जा रही हैं।
श्वसन रोग विशेषज्ञ डॉ. वंदना मिश्रा ने प्रदूषण से बचने के लिए जरूरी होने पर ही घर से बाहर निकलने, बाहर से लौटने पर हाथ धोने और मास्क का इस्तेमाल करने की सलाह दी है।
पर्यावरण विशेषज्ञ ने क्या सुझाव दिया?
पर्यावरण विशेषज्ञ मनु सिंह के मुताबिक, दिल्ली में प्रदूषण कम करने के उपाय केवल सर्दियों तक सीमित नहीं रहने चाहिए। पूरे साल वाहनों से निकलने वाले धुएं और धूल पर नियंत्रण के लिए काम करना जरूरी है।
उन्होंने सार्वजनिक परिवहन को बेहतर बनाने पर भी जोर दिया, ताकि निजी वाहनों पर निर्भरता कम हो और प्रदूषण को नियंत्रित किया जा सके।
दिल्ली में प्रदूषण कम करने के लिए पाबंदियां लागू करना जरूरी है, लेकिन उनके प्रभावी नतीजों के लिए सरकारी एजेंसियों को भी नियमों का पालन सुनिश्चित करना होगा। सड़कों की नियमित सफाई, निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण और वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने के प्रयास लगातार जारी रखने होंगे।



