करवा चौथ का त्योहार आते ही महिलाएं व्रत और पूजा की तैयारियों में जुट जाती हैं। कोई अपनी साड़ी के साथ मैचिंग चूड़ियां चुनती है, तो कोई मेहंदी लगवाने और शादी की चुनरी निकालने की तैयारी करती है। इस दिन पूजा की सामग्री के साथ सोलह श्रृंगार का भी खास महत्व माना जाता है।
खासकर पहली बार करवा चौथ का व्रत रखने वाली महिलाओं के मन में सवाल रहता है कि सोलह श्रृंगार में कौन-कौन सी चीजें शामिल होती हैं और इनका धार्मिक महत्व क्या है। ज्योतिष में इनका संबंध शुक्र ग्रह और चंद्रमा से भी जोड़ा जाता है।
इस साल करवा चौथ 29 अक्टूबर 2026, गुरुवार को मनाया जाएगा। इस दिन विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करते हुए व्रत रखती हैं। शाम को पूजा करने और चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद व्रत खोलने की परंपरा है।
शादी की चुनरी और पुरानी चूड़ियों का है खास महत्व
करवा चौथ पर महिलाएं अक्सर अपनी शादी की साड़ी, चुनरी और पारंपरिक गहने पहनना पसंद करती हैं। मां की दी हुई चूड़ियां, सास से मिली पायल या शादी में पहना गया हार उनके लिए खास यादों से जुड़ा होता है।
सिंदूर, चूड़ियां, मंगलसूत्र और बिछिया को कई भारतीय परंपराओं में सुहाग और वैवाहिक जीवन का प्रतीक माना जाता है। इसलिए करवा चौथ पर इन चीजों को पहनने का विशेष महत्व है।
हालांकि, हर परिवार और क्षेत्र में श्रृंगार की परंपराएं अलग-अलग हो सकती हैं। इसलिए जरूरी नहीं कि सभी महिलाएं एक ही तरह के गहने पहनें।
सोलह श्रृंगार में कौन-कौन सी चीजें होती हैं?
सोलह श्रृंगार की सूची अलग-अलग क्षेत्रों और पारिवारिक परंपराओं के अनुसार बदल सकती है। आमतौर पर इसमें ये 16 चीजें शामिल मानी जाती हैं।
- बिंदी: माथे पर लगाई जाती है।
- सिंदूर: मांग में लगाया जाता है।
- मांग टीका: माथे और मांग का पारंपरिक आभूषण।
- काजल: आंखों का श्रृंगार।
- नथ: नाक में पहना जाने वाला आभूषण।
- कर्णफूल या झुमके: कानों की सजावट।
- हार या मंगलसूत्र: गले का पारंपरिक आभूषण।
- मेहंदी: हाथों और पैरों पर लगाई जाती है।
- चूड़ियां: कलाइयों का श्रृंगार।
- बाजूबंद: बांह पर पहना जाने वाला आभूषण।
- अंगूठी: उंगलियों में पहनी जाती है।
- कमरबंद: कमर पर पहना जाने वाला आभूषण।
- पायल: पैरों में पहनी जाती है।
- बिछिया: पैर की उंगलियों में पहनी जाती है।
- गजरा: फूलों से बालों को सजाया जाता है।
- इत्र: शरीर पर सुगंध के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
यह सोलह श्रृंगार की एक प्रचलित सूची है। कुछ परंपराओं में महावर, वस्त्र या अन्य प्रसाधन भी शामिल किए जाते हैं।
सोलह श्रृंगार का शुक्र ग्रह से क्या संबंध है?
ज्योतिष शास्त्र में शुक्र ग्रह को सुंदरता, प्रेम, आकर्षण, आभूषण, अच्छे वस्त्र और वैवाहिक सुख का कारक माना जाता है। इसी कारण सोलह श्रृंगार को शुक्र ग्रह से जोड़कर देखा जाता है।
हालांकि, केवल गहने पहनने या सजने-संवरने से कुंडली में शुक्र ग्रह मजबूत हो जाता है, ऐसा निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता। ज्योतिष में ग्रहों का प्रभाव उनकी राशि, भाव और अन्य स्थितियों के आधार पर देखा जाता है।
इसलिए सोलह श्रृंगार को वैवाहिक समस्याओं को दूर करने का निश्चित उपाय मानने के बजाय धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा के रूप में समझना चाहिए।
चंद्रमा की सोलह कलाओं से कैसे जुड़ा है श्रृंगार?
करवा चौथ की पूजा में चंद्रमा का विशेष महत्व होता है। महिलाएं चांद निकलने का इंतजार करती हैं और फिर चंद्रमा को जल अर्पित करके व्रत खोलती हैं।
धार्मिक मान्यताओं और पारंपरिक व्याख्याओं में सोलह श्रृंगार को चंद्रमा की सोलह कलाओं से भी जोड़ा जाता है। ज्योतिष में चंद्रमा को मन और भावनाओं का कारक माना जाता है।
हालांकि, सोलह श्रृंगार और चंद्रमा की सोलह कलाओं के बीच संबंध को धार्मिक मान्यता के रूप में ही समझना चाहिए। इसे किसी निश्चित ज्योतिषीय नियम या उपाय के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
सोलह श्रृंगार की कोई चीज छूट जाए तो क्या होगा?
करवा चौथ की तैयारी करते समय कई बार कोई सामान छूट जाता है। ऐसे में महिलाओं को परेशान होने की जरूरत नहीं है। किसी एक श्रृंगार की चीज उपलब्ध नहीं होने से व्रत अधूरा हो जाता है, ऐसा मानने के लिए स्पष्ट धार्मिक आधार जरूरी है।
पहली बार व्रत रखने वाली महिलाएं पूजा की परंपरा अपने परिवार के बड़ों से समझ सकती हैं। पूजा सामग्री और श्रृंगार की अलग-अलग सूची बनाने से तैयारियां आसान हो सकती हैं।
सोलह श्रृंगार के लिए हर बार नए कपड़े या गहने खरीदना भी जरूरी नहीं है। पुरानी साड़ी, पारंपरिक गहनों और अपनी पसंद के श्रृंगार के साथ भी त्योहार की तैयारी की जा सकती है।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और पारंपरिक ज्योतिषीय धारणाओं पर आधारित है। इन मान्यताओं की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है। इन्हें निश्चित वैज्ञानिक तथ्य या किसी समस्या के समाधान की गारंटी के रूप में न लें।



