दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने कई बड़े कदम उठाए हैं। आयोग ने प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए 5 नवंबर से 20 नवंबर 2026 तक कई प्रतिबंध लागू करने का आदेश दिया है। इसके तहत पूरे एनसीआर में धूल फैलाने वाले निर्माण और तोड़फोड़ के काम बंद रहेंगे। इसके अलावा सरकारी और निजी कार्यालयों में 50 फीसदी कर्मचारियों को ही ऑफिस बुलाने का निर्देश दिया गया है।
इन नियमों का असर दिल्ली के साथ नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम, फरीदाबाद और सोनीपत जैसे शहरों में भी पड़ेगा।
प्रदूषण रोकने के लिए क्यों लिया गया फैसला?
CAQM ने नवंबर 2018 से 2025 तक के वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) के आंकड़ों का अध्ययन किया। इसमें पाया गया कि नवंबर की शुरुआत से लेकर मध्य महीने तक दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण का स्तर अक्सर गंभीर और बेहद गंभीर श्रेणी में पहुंच जाता है।
इस दौरान पराली जलाने, गाड़ियों से निकलने वाले धुएं और दूसरे कारणों से प्रदूषण और बढ़ जाता है। इसी को देखते हुए आयोग ने प्रदूषण को खतरनाक स्तर तक पहुंचने से पहले रोकने के लिए ये कदम उठाए हैं।
5 से 20 नवंबर तक कौन-कौन से काम रहेंगे बंद?
आयोग के आदेश के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर में धूल फैलाने वाले निर्माण और तोड़फोड़ से जुड़े काम बंद रहेंगे। हालांकि, कुछ जरूरी परियोजनाओं को इस प्रतिबंध से छूट दी गई है।
इन कामों को मिलेगी छूट:
- रेलवे और मेट्रो से जुड़े निर्माण कार्य।
- हवाई अड्डों और अंतरराज्यीय बस टर्मिनलों के जरूरी काम।
- अस्पतालों से जुड़े निर्माण कार्य।
- पानी की सप्लाई और सफाई व्यवस्था से जुड़े काम।
- राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा से संबंधित परियोजनाएं।
- राष्ट्रीय महत्व की जरूरी परियोजनाएं।
सरकारी और निजी दफ्तरों में 50% वर्क फ्रॉम होम
प्रदूषण को कम करने के लिए दिल्ली-एनसीआर के सरकारी और निजी कार्यालयों में 50 फीसदी कर्मचारियों को घर से काम करने का निर्देश दिया गया है। यानी आधे कर्मचारी ऑफिस से काम करेंगे, जबकि बाकी कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम करना होगा।
यह नियम दिल्ली के अलावा नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम, फरीदाबाद और सोनीपत में भी लागू होगा।
हालांकि, औद्योगिक इकाइयों, जरूरी सेवाओं और ऐसे कार्यस्थलों को इस नियम से छूट दी गई है, जहां घर से काम करना संभव नहीं है।
प्रदूषण से राहत दिलाने की कोशिश
CAQM का कहना है कि नवंबर के दौरान दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण बढ़ने की आशंका को देखते हुए पहले से ही एहतियाती कदम उठाना जरूरी है। निर्माण गतिविधियों पर रोक और वर्क फ्रॉम होम जैसे उपायों का उद्देश्य सड़कों और निर्माण स्थलों से निकलने वाली धूल और वाहनों की आवाजाही से होने वाले प्रदूषण को कम करना है।



