23 अगस्त 2026 |दिल्लीा| इंटरनेशनल डेस्क – बांग्लादेश के रंगपुर शहर में एक हिंदू परिवार के चार सदस्यों की हत्या के मामले में पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। शुरुआती जानकारी में मामला रहस्यमयी मौत का लग रहा था, लेकिन अब पुलिस का कहना है कि छत पर याबा ड्रग्स लेने से रोकने के बाद दो युवकों ने कथित तौर पर परिवार के चार सदस्यों की हत्या कर दी। पुलिस ने मामले में दो युवकों को हिरासत में लिया है। मृतकों में रिटायर्ड स्कूल शिक्षक गणपति चक्रवर्ती, उनकी पत्नी प्रीतिलता, बेटी पार्थी और 12 वर्षीय बेटा प्रियम शामिल हैं।
पुलिस के अनुसार, दोनों संदिग्ध गुरुवार रात पड़ोसी इमारत के रास्ते गणपति चक्रवर्ती के घर की छत पर पहुंचे थे और वहां याबा का सेवन कर रहे थे। शोर सुनकर गणपति छत पर पहुंचे और युवकों को ऐसा करने से रोका। इसके बाद विवाद बढ़ गया और पुलिस के मुताबिक आरोपियों ने कथित तौर पर परिवार के चारों सदस्यों को एक-एक करके मार डाला।
बंद घर में मिले थे परिवार के चार शव
यह मामला शनिवार रात सामने आया था। रंगपुर के मछुआपाड़ा इलाके में एक घर के अंदर परिवार के चार सदस्यों के शव अलग-अलग जगहों पर मिले थे। घर बंद था और परिवार के मोबाइल फोन भी कई घंटों से बंद आ रहे थे। परिवार से संपर्क नहीं होने पर रिश्तेदारों को शक हुआ और वे घर पहुंचे। बाद में पुलिस ने घर में प्रवेश कर शव बरामद किए।
पुलिस के अनुसार शव करीब रात 11:30 बजे बरामद किए गए। शुरुआती जांच में मौतों को संदिग्ध माना गया था और पुलिस, CID तथा Detective Branch ने जांच शुरू की थी। कुछ रिपोर्टों में प्रारंभिक तौर पर गला घोंटने की आशंका जताई गई थी।
बाद में पुलिस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में मामले को हत्या बताते हुए दो संदिग्धों को हिरासत में लेने और कथित मकसद का खुलासा किया।
कौन-कौन थे मृतक?
मृतकों की पहचान गणपति चक्रवर्ती उर्फ ज्वेल, उनकी पत्नी प्रीतिलता चक्रवर्ती, बेटी पार्थी चक्रवर्ती अगामी और बेटे प्रियम चक्रवर्ती आयुष के रूप में हुई है। गणपति की उम्र 65 वर्ष बताई गई है और वह रंगपुर जिला स्कूल के पूर्व शिक्षक थे। उनकी पत्नी प्रीतिलता की उम्र करीब 50 वर्ष थी। बेटी पार्थी की उम्र अलग-अलग रिपोर्टों में 23 और 25 वर्ष बताई गई है, जबकि बेटा प्रियम 12 वर्ष का था और कक्षा 5 में पढ़ता था।
गणपति चक्रवर्ती पिछले साल दिसंबर में स्कूल से रिटायर हुए थे। रिटायरमेंट के बाद वह होम्योपैथी से जुड़ा काम करते थे। उनकी बेटी पढ़ाई कर रही थी, जबकि बेटा रंगपुर जिला स्कूल में पढ़ता था। देैनिक भास्कर
गुरुवार से बंद थे परिवार के मोबाइल
परिवार के रिश्तेदारों ने बताया कि गुरुवार के बाद से घर के लोगों से संपर्क नहीं हो पा रहा था। परिवार के मोबाइल फोन लगातार बंद आ रहे थे। शनिवार रात जब रिश्तेदार घर पहुंचे तो मुख्य प्रवेश द्वार बंद मिला।
परिवार की एक रिश्तेदार पूजा चक्रवर्ती ने बताया कि उन्होंने आखिरी बार अपनी बहन से गुरुवार दोपहर बात की थी। इसके बाद फोन बंद हो गया। लगातार संपर्क नहीं होने पर परिवार के लोग रंगपुर स्थित घर पहुंचे।
घर के अंदर जाने के बाद परिवार के सदस्यों को शव मिले। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई और जांच शुरू हुई।
अलग-अलग जगह मिले शव
पुलिस ने बताया कि चारों शव घर में एक ही जगह नहीं मिले थे। अलग-अलग स्थानों से शव बरामद किए गए। पुलिस के अनुसार गणपति चक्रवर्ती का शव छत पर मिला, जबकि उनकी पत्नी और बेटी के शव सीढ़ियों के पास मिले। बेटे का शव कमरे में बेड के नीचे मिला।
शवों का इस तरह अलग-अलग स्थानों पर मिलना शुरुआती जांच में पुलिस के लिए महत्वपूर्ण सुराग बना। शुरुआत में हत्या की वजह और घटना का समय स्पष्ट नहीं था। पुलिस ने घर की स्थिति, सामान और घटनास्थल से मिले दूसरे सबूतों की जांच शुरू की।
पुलिस के मुताबिक याबा सेवन से शुरू हुआ विवाद
रंगपुर मेट्रोपॉलिटन पुलिस कमिश्नर मोहम्मद अब्दुल माबूद ने रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में घटना की नई जानकारी दी। पुलिस के मुताबिक मुग्धा दास और सिद्धार्थ दास नाम के दो युवक गुरुवार रात पड़ोसी इमारत के जरिए गणपति के घर की छत पर पहुंचे थे।
पुलिस का आरोप है कि दोनों वहां याबा का सेवन कर रहे थे। इसी दौरान गणपति ने उन्हें देख लिया और विरोध किया। पुलिस के अनुसार इसके बाद आरोपियों ने कथित तौर पर गणपति का गमछे से गला घोंट दिया।
गणपति की आवाज सुनकर उनकी पत्नी प्रीतिलता ऊपर जाने लगीं। पुलिस के मुताबिक आरोपियों ने उन्हें सीढ़ियों पर ही मार दिया। इसके बाद बेटी और फिर 12 वर्षीय बेटे की भी हत्या किए जाने का आरोप है।
यह पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया घटनाक्रम है। मामले में अदालत की प्रक्रिया और आगे की जांच के बाद ही आरोपों की अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी।
12 साल के बच्चे को भी क्यों बनाया निशाना?
पुलिस कमिश्नर के अनुसार, 12 वर्षीय प्रियम आरोपियों को जानता था। पुलिस का दावा है कि प्रियम, सिद्धार्थ के छोटे भाई अपूर्व का दोस्त था।
जांच एजेंसियों के मुताबिक आरोपियों को डर था कि बच्चा उन्हें पहचान सकता है या घटना के बारे में जानकारी दे सकता है। इसी वजह से पुलिस का आरोप है कि उन्होंने बच्चे की भी हत्या कर दी।
इस पहलू ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है, क्योंकि जांच के मुताबिक बच्चे का घटना से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं था।
हत्या के बाद घर में रुके रहे आरोपी?
पुलिस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि हत्या के बाद दोनों आरोपी तुरंत घर से नहीं निकले। पुलिस के अनुसार वे कुछ समय तक घर के अंदर ही रहे।
जांच में यह भी सामने आने का दावा किया गया है कि आरोपियों ने वहां नहाया, खजूर खाए और याबा का सेवन किया। पुलिस के मुताबिक अगले दिन जुमे की नमाज के समय जब सड़कों पर अपेक्षाकृत कम आवाजाही थी, तब दोनों वहां से निकल गए।
प्रशासन का कहना है कि आरोपियों ने घटना को लूट की वारदात जैसा दिखाने के लिए घर का सामान बिखेर दिया था। इससे जांच की शुरुआती दिशा बदल सकती थी।
पुलिस को कैसे मिला बड़ा सुराग?
पुलिस के मुताबिक जांच के दौरान घर से मिले एक सोने के कंगन ने अहम सुराग दिया। पुलिस ने दावा किया कि कंगन पर आग से जांच किए जाने के निशान दिखाई दिए।
इसके बाद जांचकर्ताओं को सिद्धार्थ दास के बारे में जानकारी मिली। पुलिस के मुताबिक सिद्धार्थ करीब आठ साल से एक ज्वेलरी दुकान में गोल्डस्मिथ के तौर पर काम कर रहा था। इस कड़ी के आधार पर पुलिस ने दोनों संदिग्धों तक पहुंच बनाई।
पुलिस ने इसके बाद मुग्धा और सिद्धार्थ को रविवार तड़के हिरासत में लिया। पुलिस का कहना है कि पूछताछ के दौरान दोनों ने घटना में अपनी कथित भूमिका स्वीकार की।
लूटा गया सामान भी बरामद होने का दावा
पुलिस ने बताया कि घर से कथित तौर पर लूटे गए आभूषणों को एक सुनसान जगह से बरामद किया गया है। पुलिस का कहना है कि बरामदगी संदिग्धों से मिली जानकारी के आधार पर की गई।
इसके अलावा परिवार के दो मोबाइल फोन भी बरामद किए गए। पुलिस के मुताबिक इन मोबाइल फोन को डिटर्जेंट मिले पानी में डुबोया गया था, जिससे सबूत नष्ट करने की कोशिश का संदेह है।
जांचकर्ताओं ने घटनास्थल से याबा सेवन से जुड़े कुछ संकेत, खजूर के बीज और आधा खाया हुआ खीरा भी बरामद करने की बात कही है। खजूर के बीजों को DNA जांच के लिए भेजे जाने की जानकारी पुलिस ने दी है।
याबा सप्लायर की भी तलाश

पुलिस ने बताया कि जांच के दौरान खुशी उर्फ प्रशांत नाम के एक व्यक्ति का नाम कथित याबा सप्लायर के तौर पर सामने आया है। पुलिस इस जानकारी की पुष्टि कर रही है।
पुलिस के अनुसार, दोनों संदिग्धों ने रंगपुर के एक घर में याबा का सेवन किया था और इसके बाद मछुआपाड़ा स्थित परिवार के घर की छत पर भी कथित तौर पर ड्रग्स लिया।
अब जांच का एक हिस्सा यह पता लगाने पर भी केंद्रित है कि संदिग्धों को याबा कहां से मिला और इस पूरे मामले में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका है या नहीं।
क्या यह हिंदू परिवार को निशाना बनाकर हत्या थी?
घटना के बाद सोशल मीडिया और कुछ रिपोर्टों में इसे हिंदू परिवार को निशाना बनाए जाने से जोड़कर देखा गया। हालांकि पुलिस की 23 अगस्त की प्रेस कॉन्फ्रेंस में सामने आया प्राथमिक कारण याबा सेवन को लेकर हुआ विवाद बताया गया है।
इसलिए फिलहाल इसे सांप्रदायिक हत्या के रूप में निष्कर्षित करना उचित नहीं होगा। पुलिस की जांच के अनुसार हत्या का तत्काल कारण कथित तौर पर नशीली दवा के सेवन को लेकर विरोध था।
मामले में आगे की जांच यह स्पष्ट करेगी कि क्या इसके पीछे कोई और कारण या अन्य व्यक्ति भी शामिल था।
पहले रहस्यमयी मौत का मामला लग रहा था
जब शनिवार रात चारों शव मिले थे, तब पुलिस के पास हत्या की पूरी तस्वीर नहीं थी। घर बंद था और परिवार के सदस्य कई दिनों से संपर्क में नहीं थे। इसलिए शुरुआत में मौत की परिस्थितियों को लेकर कई सवाल थे।
प्रारंभिक रिपोर्टों में पुलिस ने संदिग्ध परिस्थितियों और संभावित गला घोंटने की बात कही थी। CID और Detective Branch ने भी जांच शुरू कर दी थी।
रविवार को दो संदिग्धों की हिरासत और पुलिस की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद मामले की जांच को नई दिशा मिली।
पुलिस ने दर्ज किया हत्या का केस
पु लिस के मुताबिक इस मामले में कोतवाली पुलिस स्टेशन में हत्या का केस दर्ज किया गया है। दोनों संदिग्धों से पूछताछ की जा रही है और जांच एजेंसियां घटनास्थल से मिले सबूतों की जांच कर रही हैं।
पुलिस ने कहा है कि जांच पूरी करने के बाद जल्द से जल्द आरोपपत्र अदालत में दाखिल करने की कोशिश की जाएगी।
हालांकि किसी भी आरोपी को अदालत द्वारा दोषी ठहराए जाने तक आरोपों को आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
बांग्लादेश में अल्पसंख्यक सुरक्षा का सवाल फिर चर्चा में
इस घटना के कारण बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि मौजूदा पुलिस जांच में हत्या का कारण ड्रग्स सेवन से जुड़ा विवाद बताया गया है, फिर भी एक हिंदू परिवार के चार सदस्यों की एक साथ हत्या ने चिंता पैदा की है।
इस घटना को लेकर बांग्लादेश की कानून-व्यवस्था और अल्पसंख्यक सुरक्षा पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। लेकिन इस मामले में सांप्रदायिक एंगल की पुष्टि अभी पुलिस जांच से नहीं हुई है।
अब जांच में किन सवालों के जवाब तलाशे जाएंगे?
जांच एजेंसियों के सामने कई अहम सवाल हैं। पहला, क्या दोनों संदिग्धों ने अकेले ही चारों हत्याएं कीं? दूसरा, क्या हत्या से पहले या बाद में किसी और व्यक्ति की भूमिका थी? तीसरा, घर से कितनी संपत्ति ले जाई गई और उसका पूरा हिस्सा बरामद हुआ या नहीं?
इसके अलावा पुलिस यह भी जांच कर रही है कि मोबाइल फोन को डिटर्जेंट वाले पानी में क्यों डाला गया और घटनास्थल से मिले DNA व अन्य फोरेंसिक सबूत आरोपों की कितनी पुष्टि करते हैं।
याबा सप्लायर बताए जा रहे व्यक्ति की भूमिका भी जांच का अहम हिस्सा है।
निष्कर्ष
बांग्लादेश के रंगपुर में हिंदू परिवार के चार सदस्यों की मौत का मामला अब रहस्यमयी मौत से आगे बढ़कर कथित पारिवारिक हत्याकांड की जांच में बदल गया है। पुलिस के मुताबिक रिटायर्ड शिक्षक गणपति चक्रवर्ती ने अपनी छत पर दो युवकों को याबा का सेवन करते देख लिया था और उन्हें रोकने की कोशिश की। आरोप है कि इसके बाद दोनों ने गणपति, उनकी पत्नी, बेटी और 12 वर्षीय बेटे की हत्या कर दी।
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