भोजपुर जिले के चर्चित भरत भूषण तिवारी मुठभेड़ मामले में नया मोड़ आ गया है। शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव निवासी भरत भूषण तिवारी की मौत के मामले में उनकी मां आशा देवी के बयान पर शाहपुर थाना में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। दर्ज एफआईआर में जगदीशपुर के डीएसपी, शाहपुर के तत्कालीन थानाध्यक्ष समेत अन्य पुलिसकर्मियों को आरोपित बनाया गया है।
मृतक की मां ने आवेदन में लगाया हत्या का आरोप
आशा देवी ने अपने आवेदन में आरोप लगाया है कि उनके पुत्र भरत भूषण तिवारी की पुलिस ने गोली मारकर हत्या की है। उन्होंने कहा कि घटना के दौरान भरत ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था। इसके बावजूद पुलिसकर्मियों ने उनके साथ मारपीट की और बाद में गोली चला दी, जिससे उनकी मौत हो गई।

बाढ़ पीड़ितों की मांग उठा रहे थे भरत भूषण
आवेदन के अनुसार, भरत भूषण तिवारी जवइनिया क्षेत्र के बाढ़ विस्थापितों की समस्याओं को लगातार प्रशासन के समक्ष उठा रहे थे। आशा देवी का आरोप है कि 17 जून की सुबह जगदीशपुर डीएसपी और शाहपुर थानाध्यक्ष के नेतृत्व में पुलिस टीम उनके घर पहुंची और भरत को बाढ़ प्रभावित इलाके में चलकर समस्याएं दिखाने को कहा।

भरत ने कर दिया था पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण
मां के अनुसार, जवइनिया पहुंचने के बाद भरत भूषण फेसबुक लाइव के माध्यम से बाढ़ पीड़ितों की मांगों को रख रहे थे।उन्होंने आरोप लगाया कि मांगें रखने के बाद भरत ने अपने हाथ में मौजूद हथियार जमीन पर फेंक दिया और पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। इसके बावजूद पुलिस ने उन्हें धक्का देकर गिरा दिया।
भरत को मारी गईं पांच गोलियां’
एफआईआर में गंभीर आरोप लगाया गया है कि जगदीशपुर डीएसपी के निर्देश पर पुलिसकर्मियों ने भरत भूषण तिवारी को पांच गोलियां मारीं। गोली लगने के बाद वह गंभीर रूप से घायल हो गए, जिसके बाद पुलिस उन्हें वाहन में बैठाकर अपने साथ ले गई। बाद में परिजनों को उनकी मौत की सूचना दी गई। वहीं आपको बता दें कि आशा देवी ने आवेदन में यह भी कहा है कि घटना के बाद उनके पति काशीनाथ तिवारी को थाने ले जाकर पूरे दिन बैठाए रखा गया। शाम में पुलिस की ओर से परिवार को सूचना दी गई कि भरत भूषण तिवारी की मौत हो चुकी है।
मामले में भोजपुर के एसपी राज ने कहा है कि प्राप्त आवेदन के आधार पर जांच कराई जा रही है। एफआईआर दर्ज होने के बाद अब पूरे मामले की जांच पर सभी की नजरें टिकी हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मुठभेड़ की परिस्थितियां क्या थीं और लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।
वहीं अब “मामले को लेकर अलग-अलग पक्षों की ओर से दावे और आरोप लगाए जा रहे हैं, लेकिन अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। न्यायिक जांच से यह उम्मीद की जा रही है कि तथ्यों के आधार पर सच्चाई सामने आएगी और यदि किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन हुआ है तो कानून के अनुसार उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।”
