नई दिल्ली: इस वीकेंड पूरी दुनिया की नजरें नई दिल्ली पर रहेंगी। 12 और 13 सितंबर को BRICS Summit 2026 आयोजित होने जा रहा है। भारत इस बार BRICS की अध्यक्षता कर रहा है। ऐसे समय में जब दुनिया के कई हिस्सों में युद्ध और तनाव का माहौल है, भारत BRICS के मंच से शांति, बातचीत और कूटनीति का संदेश देने की कोशिश करेगा।
समिट से पहले रूस के राष्ट्रपति के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा है कि यूक्रेन युद्ध को शांतिपूर्ण तरीके से खत्म करने के लिए भारत की किसी भी पहल का रूस स्वागत करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि युद्ध के समाधान को लेकर भारत और रूस की सोच काफी हद तक एक जैसी है।
युद्ध किसी समस्या का स्थायी समाधान नहीं
दुनिया इस समय रूस-यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया में तनाव और कई अन्य विवादों से जूझ रही है। भारत लगातार यह कहता रहा है कि युद्ध किसी समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। बातचीत और कूटनीति के जरिए ही विवादों का समाधान निकाला जाना चाहिए।
BRICS Summit में भारत इसी सोच को आगे बढ़ा सकता है। इस बार चर्चा केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह भी देखा जाएगा कि क्या भारत अपनी बढ़ती कूटनीतिक भूमिका के जरिए अलग-अलग देशों को बातचीत की मेज पर ला सकता है।
रूस-यूक्रेन युद्ध पर भारत का शांति संदेश
रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से भारत ने लगातार बातचीत और कूटनीति पर जोर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के सामने भी कहा है कि दुनिया को ‘एंडलेस वॉर’ यानी अंतहीन युद्ध नहीं, बल्कि ‘एंड ऑफ वॉर’ यानी युद्ध खत्म करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
भारत ने इस मामले में किसी एक पक्ष का समर्थन करने के बजाय शांति की कोशिशों पर जोर दिया है। यही वजह है कि भारत के रूस और यूक्रेन दोनों के साथ बातचीत के रास्ते खुले हुए हैं।
इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष और ईरान-अमेरिका तनाव जैसे मामलों में भी भारत ने बातचीत और तनाव कम करने का समर्थन किया है।
BRICS में एक साथ होंगे ईरान और UAE
दिल्ली में होने वाले BRICS Summit का एक अहम पहलू यह भी है कि ईरान और UAE जैसे देश एक ही मंच पर मौजूद होंगे। दोनों देशों के बीच कई क्षेत्रीय मुद्दों पर मतभेद रहे हैं।
मई में दिल्ली में हुई BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक में भी ईरान और UAE के अलग-अलग रुख के कारण साझा बयान जारी नहीं हो सका था।
ऐसे में इस बार यह देखना अहम होगा कि भारत की मेजबानी में क्या अलग-अलग विचार रखने वाले देश संवाद का रास्ता बनाए रख पाते हैं। कूटनीति के लिहाज से एक ही मंच पर बैठकर बातचीत की संभावना बनना भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
BRICS को पश्चिम विरोधी मंच नहीं बनाना चाहता भारत
भारत की BRICS अध्यक्षता की एक खास बात यह है कि वह इस समूह को अमेरिका या पश्चिमी देशों के खिलाफ किसी गठबंधन के रूप में पेश नहीं करना चाहता।
भारत BRICS को मुख्य रूप से आर्थिक और विकास से जुड़े सहयोग के मंच के तौर पर मजबूत करना चाहता है। भारत की प्राथमिकताओं में वैश्विक संस्थाओं में सुधार, न्यू डेवलपमेंट बैंक को मजबूत करना, डिजिटल तकनीक, स्वास्थ्य, ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा जैसे मुद्दे शामिल हैं।
इसके अलावा स्थानीय मुद्राओं में कारोबार और सीमा पार डिजिटल पेमेंट को आसान बनाने जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हो सकती है।
भारत का संदेश साफ है कि BRICS का इस्तेमाल टकराव बढ़ाने के बजाय सहयोग बढ़ाने के लिए होना चाहिए।
चौथी बार भारत कर रहा है BRICS की मेजबानी
भारत इससे पहले 2012, 2016 और 2021 में BRICS की अध्यक्षता कर चुका है। लेकिन इस बार स्थिति पहले से अलग है। BRICS का विस्तार हो चुका है और अब इसमें पहले के मुकाबले ज्यादा देश शामिल हैं।
इस वजह से भारत के सामने चुनौती भी बड़ी है। सभी सदस्य देशों के हित और विदेश नीति एक जैसी नहीं हैं। ऐसे में भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी कि वह इतने अलग-अलग देशों को एक साझा एजेंडे पर साथ कैसे लाता है।
नई दिल्ली में होने वाला BRICS Summit इसलिए सिर्फ आर्थिक सहयोग की बैठक नहीं, बल्कि भारत की बढ़ती वैश्विक और कूटनीतिक भूमिका की परीक्षा भी माना जा रहा है।
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