पानी हर इंसान की सबसे जरूरी जरूरतों में से एक है। लेकिन दुनिया के अलग-अलग देशों में पीने के पानी की गुणवत्ता काफी अलग है। कुछ देशों में नल से सीधे बेहद साफ पानी मिलता है, जबकि कई जगहों पर लोगों को पीने के लिए बोतलबंद पानी पर निर्भर रहना पड़ता है।
फिनलैंड और आइसलैंड जैसे देश साफ पानी के मामले में दुनिया में आगे हैं। वहीं पानी के कारोबार में चीन और भारत की भी बड़ी भूमिका है। भारत खासतौर पर वर्चुअल वॉटर एक्सपोर्ट यानी फसलों और उत्पादों के जरिए अप्रत्यक्ष रूप से पानी के निर्यात के लिए जाना जाता है।
इन यूरोपीय देशों में नल का पानी बेहद साफ
यूरोप के कई देशों ने पीने के पानी की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए सख्त नियम बनाए हैं। डेनमार्क में पानी की सुरक्षा की नियमित और कड़ी जांच की जाती है। इसी वजह से वहां नल के पानी को काफी सुरक्षित माना जाता है।
आइसलैंड में पानी का बड़ा हिस्सा ग्लेशियरों और जमीन के नीचे मौजूद प्राकृतिक झरनों से आता है। जमीन के अंदर प्राकृतिक रूप से छनने के कारण यहां का पानी काफी साफ होता है।
स्विट्जरलैंड और नॉर्वे में भी पहाड़ी इलाकों और प्राकृतिक जल स्रोतों की वजह से कई जगहों पर सार्वजनिक फव्वारों का पानी पीने योग्य होता है।
फिनलैंड और आइसलैंड को मिले 100 में 100 अंक
पर्यावरण प्रदर्शन सूचकांक यानी Environmental Performance Index (EPI) में सुरक्षित पेयजल के मामले में फिनलैंड और आइसलैंड को 100 में 100 अंक मिलने की बात कही गई है।
इनके बाद यूनाइटेड किंगडम और स्विट्जरलैंड जैसे देशों का नाम आता है। इसका मतलब है कि इन देशों में लोगों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने की व्यवस्था काफी मजबूत है।
सिंगापुर ने तकनीक से बनाया पानी का इंतजाम
सिंगापुर के पास प्राकृतिक मीठे पानी के स्रोत सीमित हैं। इसके बावजूद उसने आधुनिक तकनीक की मदद से पानी को रिसाइकल करने और समुद्री पानी को पीने योग्य बनाने की व्यवस्था विकसित की है।
इससे पता चलता है कि प्राकृतिक संसाधन कम होने के बावजूद बेहतर तकनीक और योजना से पानी की जरूरत पूरी की जा सकती है।
कनाडा के पास ताजे पानी का बड़ा भंडार
कनाडा दुनिया के उन देशों में शामिल है, जहां ताजे पानी के प्राकृतिक संसाधन काफी ज्यादा हैं। यहां बड़ी संख्या में झीलें और मीठे पानी के स्रोत मौजूद हैं।
इसी वजह से कनाडा में पानी के संरक्षण और पर्यावरण से जुड़ी नीतियों को भी काफी महत्व दिया जाता है।
चीन है बोतलबंद पानी के बड़े निर्यातकों में
अंतरराष्ट्रीय जल कारोबार में चीन की बड़ी भूमिका है। मुख्यभूमि चीन से बोतलबंद पानी, बर्फ और प्राकृतिक जल का बड़े पैमाने पर निर्यात किया जाता है।
वहीं भारत का मामला थोड़ा अलग है। भारत वर्चुअल वॉटर के अप्रत्यक्ष निर्यात में सबसे आगे रहने वाले देशों में शामिल है।
चावल और गन्ने के जरिए भारत करता है वर्चुअल वॉटर एक्सपोर्ट
वर्चुअल वॉटर का मतलब उस पानी से है, जो किसी फसल या उत्पाद को तैयार करने में इस्तेमाल होता है। जब वह उत्पाद दूसरे देश को निर्यात किया जाता है तो उसमें इस्तेमाल हुआ पानी भी अप्रत्यक्ष रूप से दूसरे देश तक पहुंच जाता है।
भारत से चावल और गन्ने जैसी पानी की ज्यादा जरूरत वाली फसलों का बड़े पैमाने पर निर्यात होता है। इसलिए भारत का वर्चुअल वॉटर एक्सपोर्ट काफी बड़ा है।
साफ पानी के मामले में भारत के सामने चुनौती
भारत में साफ पेयजल और जल प्रदूषण को लेकर कई चुनौतियां हैं। नदियों में प्रदूषण, सीवेज ट्रीटमेंट की कमी और सभी लोगों तक साफ पानी की पहुंच बड़ी समस्याएं हैं।
2024 के एनवायरमेंटल परफॉर्मेंस इंडेक्स में भारत 180 देशों में 176वें स्थान पर था। यह स्थिति देश के सामने मौजूद जल और पर्यावरण से जुड़ी चुनौतियों को दिखाती है।
मेघालय की उमनगोट नदी है प्राकृतिक खूबसूरती की मिसाल
इन चुनौतियों के बावजूद भारत में कई प्राकृतिक जल स्रोत बेहद साफ और खूबसूरत हैं। मेघालय के डाउकी में बहने वाली उमनगोट नदी इसका शानदार उदाहरण है।
इस नदी का पानी कई जगहों पर इतना पारदर्शी दिखाई देता है कि उस पर चलती नाव पानी पर तैरने के बजाय हवा में उड़ती हुई नजर आती है। उमनगोट नदी भारत की प्राकृतिक जल संपदा और खूबसूरती की खास मिसाल है।
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