दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना को लेकर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने बीजेपी सरकार पर हादसों को रोकने के लिए पहले से जरूरी कदम नहीं उठाने और बाद में केवल बयानबाजी करने का आरोप लगाया।
राहुल गांधी ने कहा कि हादसे होने के बाद अक्सर कुछ छोटे अधिकारियों पर कार्रवाई की जाती है, जबकि असली जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय नहीं होती।
सत्य निकेतन हादसे को बताया गंभीर मामला
राहुल गांधी ने कहा कि सत्य निकेतन में छात्रों से भरी इमारत का गिरना कोई अकेली घटना नहीं है। उन्होंने दिल्ली में पिछले कुछ महीनों में हुए सैदुलाजाब हादसे और हौज रानी में आग की घटनाओं का भी जिक्र किया।
उन्होंने कहा कि इन हादसों में लोगों की जान जाती है, परिवारों के सपने टूटते हैं और कई जिंदगियां मलबे में दब जाती हैं, लेकिन हादसों के बाद जरूरी कार्रवाई नजर नहीं आती।
पीएम मोदी के बयान का भी किया जिक्र
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘दिमागी नक्सल’ और ‘नाराज फूफा’ जैसे बयानों का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार से जवाबदेही मांगने वालों को अलग-अलग नाम देकर चुप कराने की कोशिश की जाती है।
उन्होंने कहा कि दिल्ली में ‘ट्रिपल इंजन सरकार’ होने के बावजूद अगर ऐसे हादसे हो रहे हैं, तो सरकार को बताना चाहिए कि इसके लिए जिम्मेदारी किसकी है।
दिल्ली हाई कोर्ट ने जारी किया नोटिस
सत्य निकेतन हादसे को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने भी कई संस्थानों को नोटिस जारी किया है। इनमें दिल्ली विश्वविद्यालय (DU), दिल्ली नगर निगम (MCD), राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC), दिल्ली सरकार, केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस शामिल हैं।
याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत में कहा कि दिल्ली में कुछ समय के अंतराल पर इमारत गिरने, आग लगने और जलभराव जैसी घटनाएं होती रहती हैं। ऐसे मामलों को रोकने के लिए एमसीडी और संबंधित विभागों को ठोस कदम उठाने की जरूरत है।
दिल्ली में पहले भी हो चुके हैं बड़े हादसे
पिछले कुछ वर्षों में दिल्ली के कई इलाकों में इमारत गिरने की घटनाएं सामने आई हैं। रोहिणी, साकेत, वेलकम, करोल बाग, पहाड़गंज और मुस्तफाबाद समेत कई इलाकों में ऐसे हादसे हो चुके हैं।
साकेत मेट्रो स्टेशन के पास इमारत गिरने से छह लोगों की मौत हुई थी, जबकि रोहिणी सेक्टर-16 में हुए हादसे में तीन मजदूरों की जान गई। मुस्तफाबाद में चार मंजिला मकान गिरने से 11 लोगों की मौत हुई थी।
आग की घटनाओं में भी गई कई जानें
दिल्ली में इमारत गिरने के अलावा बड़े अग्निकांड भी होते रहे हैं। पालम में आग की घटना में 9 लोगों की मौत हुई थी। विवेक विहार अग्निकांड में भी 9 लोगों की जान गई।
मालवीय नगर के ‘फ्लोरिश स्टे’ होटल में आग लगने से 21 लोगों की मौत हुई थी। मृतकों में भारतीयों के अलावा बांग्लादेश, लाइबेरिया, नाइजीरिया और मोजाम्बिक के नागरिक भी शामिल थे।
मुंडका और अनाज मंडी हादसा भी नहीं भूले लोग
मई 2022 में दिल्ली के मुंडका इलाके में एक इमारत में आग लगने से 27 लोगों की मौत हुई थी। फरवरी 2019 में करोल बाग के एक होटल में आग लगने से 17 लोगों की जान गई थी।
इसी साल रानी झांसी रोड की अनाज मंडी में हुए भीषण अग्निकांड में 43 लोगों की मौत हुई थी। जनवरी 2018 में बवाना इंडस्ट्रियल एरिया में आग लगने से 17 लोगों की जान चली गई थी।
बारिश और जलभराव से भी हुआ बड़ा हादसा
दिल्ली में भारी बारिश और जलभराव भी जानलेवा साबित हुआ है। जुलाई 2024 में ओल्ड राजेंद्र नगर के एक कोचिंग सेंटर के बेसमेंट में बारिश का पानी भर गया था। इस हादसे में सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहे तीन छात्रों की मौत हो गई थी।
इन लगातार हो रही घटनाओं के बीच दिल्ली में इमारतों की सुरक्षा, फायर सेफ्टी और जलभराव से निपटने की व्यवस्था को लेकर सवाल उठते रहे हैं।
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