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क्लब और कंसर्ट में तेज म्यूजिक से सावधान, कान ही नहीं दिमाग पर भी पड़ सकता है असर

अगर आपको क्लब, पार्टी और कंसर्ट में जाना पसंद है तो अपनी सेहत को लेकर थोड़ा सावधान रहने की जरूरत है. डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक लंबे समय तक तेज आवाज…

Priyanka Shaw 15 September 2026, 9:38 am
1 मिनट पढ़ें
क्लब और कंसर्ट में तेज म्यूजिक से सावधान, कान ही नहीं दिमाग पर भी पड़ सकता है असर
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अगर आपको क्लब, पार्टी और कंसर्ट में जाना पसंद है तो अपनी सेहत को लेकर थोड़ा सावधान रहने की जरूरत है. डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक लंबे समय तक तेज आवाज के संपर्क में रहने से कानों को नुकसान हो सकता है. इसका असर आगे चलकर दिमाग की सेहत पर भी पड़ सकता है.

क्लब और कंसर्ट में तेज म्यूजिक, भीड़ और तेज बीट्स के बीच लोग खूब एंजॉय करते हैं. लेकिन अगर लंबे समय तक बहुत तेज आवाज के बीच रहें तो कानों में सीटी या घंटी जैसी आवाज सुनाई दे सकती है. आसपास की आवाज कुछ समय के लिए धीमी लग सकती है या कान बंद-बंद महसूस हो सकते हैं.

अक्सर लोग इसे सामान्य परेशानी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए.

तेज आवाज से कोशिकाओं को नुकसान

न्यूरोसर्जन के मुताबिक तेज आवाज के कारण कानों में होने वाली परेशानी कई बार कान के अंदर मौजूद बेहद संवेदनशील कोशिकाओं और नसों पर दबाव का संकेत हो सकती है.

ये कोशिकाएं आवाज को दिमाग तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं. एक बार इन कोशिकाओं को गंभीर नुकसान पहुंचने के बाद इनके दोबारा ठीक होने की संभावना बहुत कम होती है.

वैज्ञानिकों के मुताबिक लगातार तेज आवाज के संपर्क में रहने से सिर्फ सुनने की क्षमता ही प्रभावित नहीं होती, बल्कि इसका असर दिमाग की सेहत पर भी पड़ सकता है.

उम्र बढ़ने के साथ याददाश्त, सोचने-समझने की क्षमता और डिमेंशिया से जुड़े शोध में सुनने की क्षमता में कमी को एक महत्वपूर्ण जोखिम कारक माना गया है.

सुनने की क्षमता कम होने से डिमेंशिया का खतरा

अमेरिका की न्यूरोसर्जन डॉ. रूपा जुथानी के मुताबिक कंसर्ट या क्लब जैसी जगहों पर जाते समय ईयरप्लग का इस्तेमाल करना जरूरी है.

उनका कहना है कि सुनने की क्षमता में कमी डिमेंशिया के उन जोखिम कारकों में शामिल है, जिन्हें समय रहते नियंत्रित किया जा सकता है.

तेज आवाज के संपर्क में थोड़े समय के लिए आने से भी कान के अंदर मौजूद संवेदनशील नसों और संरचनाओं को नुकसान हो सकता है. लंबे समय में इसका असर ब्रेन हेल्थ पर पड़ सकता है.

इसलिए कंसर्ट से लौटने के बाद कानों में घंटी या सीटी की आवाज सुनाई देना या कुछ समय तक आवाज धीमी सुनाई देना केवल मामूली परेशानी नहीं हो सकती.

85 डेसिबल से ज्यादा आवाज में बढ़ता है खतरा

डॉ. जुथानी के मुताबिक जब आवाज करीब 85 डेसिबल से ज्यादा हो जाती है तो कान के अंदर मौजूद कोक्लिया की हेयर सेल्स पर दबाव पड़ना शुरू हो जाता है.

कोक्लिया कान के अंदर मौजूद एक महत्वपूर्ण संरचना है, जो आवाज को ऐसे संकेतों में बदलती है जिन्हें दिमाग समझ सकता है. इस प्रक्रिया में हेयर सेल्स की महत्वपूर्ण भूमिका होती है.

तेज आवाज के संपर्क में आने पर सबसे पहले ‘टेम्परेरी थ्रेशोल्ड शिफ्ट’ हो सकता है. आसान भाषा में इसका मतलब है कि कुछ समय के लिए सुनने की क्षमता कम हो जाना.

इसके साथ कानों में घंटी या सीटी जैसी आवाज यानी टिनिटस भी हो सकता है. आमतौर पर यह समस्या 16 से 48 घंटे में ठीक हो जाती है.

हालांकि, आवाज का दोबारा सामान्य हो जाना इस बात की गारंटी नहीं है कि कानों को कोई नुकसान नहीं हुआ.

सुनने की क्षमता और ब्रेन हेल्थ का संबंध

डॉ. जुथानी के मुताबिक सुनने की क्षमता में कमी डिमेंशिया के खतरे को बढ़ाने वाले कारकों में शामिल है. हालांकि, यह ऐसा जोखिम कारक है जिसे समय रहते नियंत्रित किया जा सकता है.

इसलिए कानों की सुरक्षा सिर्फ अच्छी सुनने की क्षमता बनाए रखने के लिए ही जरूरी नहीं है, बल्कि लंबे समय तक दिमाग को स्वस्थ रखने से भी जुड़ी हो सकती है.

लैंसेट कमीशन ऑन डिमेंशिया की रिपोर्ट में भी सुनने की क्षमता में कमी को जीवन के मध्य चरण में डिमेंशिया के महत्वपूर्ण कारणों में से एक बताया गया है.

करीब 15 लाख लोगों पर किए गए एक मेटा-विश्लेषण में पाया गया कि सुनने की क्षमता में हर 10 डेसिबल की कमी के साथ डिमेंशिया का जोखिम 16 प्रतिशत बढ़ सकता है.

हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि तेज संगीत सुनने वाला हर व्यक्ति डिमेंशिया का शिकार होगा. लेकिन लंबे समय तक तेज आवाज के संपर्क में रहना कानों और लंबे समय में दिमाग की सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है.

क्लब और कंसर्ट में कैसे रखें कानों का ध्यान?

अगर आप अक्सर क्लब, पार्टी या कंसर्ट में जाते हैं तो कुछ सावधानियां बरत सकते हैं:

  • तेज स्पीकर के बिल्कुल पास खड़े होने से बचें.
  • लंबे समय तक तेज आवाज के संपर्क में न रहें.
  • कंसर्ट और क्लब जैसी जगहों पर ईयरप्लग का इस्तेमाल करें.
  • अगर कार्यक्रम के बाद कानों में लगातार सीटी या घंटी की आवाज आती है या सुनने में परेशानी होती है, तो इसे नजरअंदाज न करें.
  • सुनने की क्षमता में लगातार बदलाव महसूस हो तो डॉक्टर या ईएनटी विशेषज्ञ से सलाह लें.

अस्वीकरण: यह जानकारी केवल जागरूकता और सामान्य जानकारी के लिए है। इसे चिकित्सकीय सलाह न मानें। किसी बीमारी या स्वास्थ्य संबंधी समस्या के लिए डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।

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Priyanka Shaw

NAV24 News की संपादकीय टीम से प्रकाशित रिपोर्ट।

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