हिल्सा मछली के बिना फीकी पड़ सकती है बंगालियों की थाली
दुर्गा पूजा आते ही बंगाल, बांग्लादेश और दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में रहने वाले बंगाली परिवारों में उत्सव का माहौल बन जाता है। पूजा के दौरान बनने वाले पारंपरिक व्यंजनों में हिल्सा (इलिश) मछली का खास महत्व है। हालांकि, इस साल भारत में रहने वाले कई बंगाली परिवारों की थाली में हिल्सा का स्वाद नहीं मिल पाएगा।
बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने 23 सितंबर को एक आधिकारिक अधिसूचना जारी कर भारत को हिल्सा के निर्यात पर रोक लगा दी है। इस फैसले के बाद बंगाली समुदाय में निराशा देखने को मिल रही है।
हिल्सा मछली सिर्फ मछली नहीं, बंगाली संस्कृति की पहचान
बंगाली समाज में हिल्सा को केवल खाने की चीज नहीं माना जाता। इसका संबंध बंगाल की नदियों, संस्कृति, परंपराओं और पारिवारिक यादों से भी जुड़ा है। गंगा, ब्रह्मपुत्र, पद्मा और मेघना जैसी नदियों से जुड़ी हिल्सा सदियों से बंगाली जीवन का हिस्सा रही है।
इतिहास और साहित्य में भी हिल्सा का उल्लेख मिलता है। करीब 600 साल पुराने प्राकृतपैंगलम ग्रंथ में भी हिल्सा का जिक्र बताया जाता है। इसके अलावा गोपाल भार की लोककथाओं और मानिक बंद्योपाध्याय के प्रसिद्ध उपन्यास ‘पद्मा नदीर माझी’ में भी हिल्सा का उल्लेख मिलता है।
हिल्सा और बंगाली खाने का खास रिश्ता
बंगाली परिवारों में हिल्सा से कई तरह के पारंपरिक व्यंजन बनाए जाते हैं। खासकर त्योहारों और विशेष अवसरों पर हिल्सा को खास महत्व दिया जाता है।
गर्म चावल के साथ हिल्सा का स्वाद बंगाली खान-पान की पहचान माना जाता है। यही वजह है कि दुर्गा पूजा के दौरान हिल्सा की कमी कई परिवारों के लिए सिर्फ खाने से जुड़ा मुद्दा नहीं, बल्कि भावनाओं से भी जुड़ा विषय है।
1947 के बंटवारे के बाद भी नहीं टूटा रिश्ता
1947 में भारत के विभाजन के बाद बंगाल भी दो हिस्सों में बंट गया। राजनीतिक सीमा जरूर बन गई, लेकिन हिल्सा से जुड़ा बंगाली समाज का भावनात्मक रिश्ता खत्म नहीं हुआ।
पश्चिम बंगाल और भारत के दूसरे हिस्सों में आकर बसे कई परिवारों के लिए हिल्सा उनके पुराने घर, गांव, नदियों और बचपन की यादों से जुड़ी रही। घर में हिल्सा बनने पर उन्हें अपनी पुरानी सांस्कृतिक विरासत की याद आती रही।
भारत-बांग्लादेश के बंगालियों को जोड़ती है हिल्सा मछली
समय के साथ भारत और बांग्लादेश के बीच सीमा और राजनीतिक बदलाव आए, लेकिन हिल्सा दोनों देशों के बंगाली समुदाय के बीच सांस्कृतिक जुड़ाव का प्रतीक बनी रही।
यही कारण है कि भारत को हिल्सा के निर्यात पर रोक का फैसला केवल व्यापार से जुड़ा मामला नहीं माना जा रहा, बल्कि इसका असर बंगाली समुदाय की खान-पान की परंपरा और भावनात्मक जुड़ाव पर भी पड़ रहा है। (ABP NEWS)
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