आजकल काम का दबाव, पढ़ाई, रिश्तों की परेशानी और दूसरी वजहों से कई लोग चिंता या एंग्जायटी महसूस करते हैं। लेकिन हर व्यक्ति में एंग्जायटी का स्तर एक जैसा नहीं होता। इसे समझने के लिए डॉक्टर GAD-7 टेस्ट जैसे स्क्रीनिंग टूल का इस्तेमाल कर सकते हैं।
GAD-7 में 7 सवाल होते हैं और जवाबों के आधार पर 0 से 21 तक स्कोर मिलता है। स्कोर जितना ज्यादा होता है, चिंता के लक्षणों की गंभीरता उतनी अधिक मानी जाती है।
GAD-7 में स्कोर का क्या मतलब है?
- 0-4 अंक: बहुत कम या सामान्य चिंता
- 5-9 अंक: हल्की चिंता
- 10-14 अंक: मध्यम स्तर की चिंता
- 15-21 अंक: गंभीर स्तर की चिंता
ध्यान रखें कि GAD-7 एक स्क्रीनिंग टूल है। केवल इसके स्कोर के आधार पर किसी व्यक्ति को एंग्जायटी डिसऑर्डर होने का फैसला नहीं किया जा सकता। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर लक्षणों और व्यक्ति की स्थिति का अलग से मूल्यांकन करते हैं।
एंग्जायटी लेवल 3 क्या होता है?
अगर GAD-7 में किसी व्यक्ति का स्कोर 10 से 14 के बीच आता है, तो इसे मध्यम स्तर की चिंता माना जाता है। इस स्तर पर चिंता के लक्षण रोजमर्रा के कामों, पढ़ाई, नौकरी या पारिवारिक जीवन को प्रभावित कर सकते हैं।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति को निश्चित रूप से Generalized Anxiety Disorder (GAD) है। सही जानकारी के लिए मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।
दुनिया में कितने लोग एंग्जायटी से प्रभावित हैं?
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, 2021 में दुनिया भर में करीब 35.9 करोड़ लोग एंग्जायटी डिसऑर्डर से प्रभावित थे। यह दुनिया की आबादी का लगभग 4.4 प्रतिशत है। WHO के मुताबिक महिलाओं में एंग्जायटी डिसऑर्डर पुरुषों की तुलना में अधिक पाया जाता है।
एंग्जायटी डिसऑर्डर दुनिया में सबसे आम मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है। इसके बावजूद जरूरतमंद लोगों में से लगभग एक-चौथाई को ही इलाज मिल पाता है।
भारत में एंग्जायटी की स्थिति
भारत में एंग्जायटी और तनाव से जुड़ी समस्याओं को लेकर अलग-अलग अध्ययनों में अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं। पुराने National Mental Health Survey में तनाव और उससे जुड़े मानसिक विकारों के मामलों में महिलाओं में दर पुरुषों से अधिक पाई गई थी।
वहीं, Global Burden of Disease (GBD) अध्ययन अलग-अलग देशों में मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का अनुमान लगाने के लिए व्यापक डेटा का इस्तेमाल करता है। इसके नवीनतम GBD 2021 आंकड़े 204 देशों और क्षेत्रों को कवर करते हैं।
इसलिए भारत में एंग्जायटी से प्रभावित लोगों की संख्या बताते समय यह देखना जरूरी है कि आंकड़ा किस साल, किस अध्ययन और किस परिभाषा के आधार पर दिया गया है।
एंग्जायटी को नजरअंदाज न करें
लगातार डर या चिंता, बेचैनी, नींद में परेशानी, ध्यान लगाने में कठिनाई, चिड़चिड़ापन, दिल की धड़कन तेज होना या रोजमर्रा के काम प्रभावित होना एंग्जायटी से जुड़े लक्षण हो सकते हैं। WHO के अनुसार, जब डर और चिंता लंबे समय तक बनी रहे और दैनिक जीवन को प्रभावित करने लगे, तो चिकित्सकीय मदद लेना जरूरी है।
जरूरी बात: अगर आपको लगातार एंग्जायटी महसूस हो रही है, तो खुद से बीमारी का निष्कर्ष निकालने के बजाय डॉक्टर या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से बात करें। एंग्जायटी के लिए प्रभावी उपचार उपलब्ध हैं।
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