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जयपुर के कालवाड़ (मुंडोता) स्थित प्रभा देवी मेमोरियल पीजी कॉलेज में पैरामेडिकल डिप्लोमा परीक्षा के दौरान सामूहिक नकल का मामला सामने आया है। पुलिस जांच में पता चला कि झुंझुनूं के एक कॉलेज के 45 छात्रों को एक ही कमरे में बैठाकर नकल कराने की योजना बनाई गई थी। इसके लिए करीब 5.50 लाख रुपये का सौदा तय किया गया था। मामले की जांच जारी है। खोरा बीसल थाना पुलिस ने कार्रवाई करते हुए कॉलेज संचालक रामकृष्ण मंडीवाल, उसके भतीजे देवकृष्ण और दो वीक्षकों को गिरफ्तार किया है। पुलिस को मौके से विद्यार्थियों के नाम लिखी पर्चियां और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज भी मिले। वहीं घटना की जानकारी मिलते ही परीक्षा केंद्र पर मौजूद अन्य अभ्यर्थी भड़क गए। नाराज छात्रों ने कॉलेज परिसर के बाहर जमकर नारेबाजी, हंगामा और तोड़फोड़ की। प्रदर्शन के दौरान कुर्सियां फेंकी गईं और परीक्षा रद्द करने की मांग उठी।

तत्काल प्रभाव से परीक्षा की गई रद्द

अतिरिक्त पुलिस बल मौके पर तैनात किया गया। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित कर छात्रों को शांत कराया। मामले की सूचना परीक्षा आयोजित कराने वाली एजेंसी को भी दी गई। राजस्थान पैरामेडिकल काउंसिल ने गड़बड़ी के बाद संबंधित परीक्षा तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी। काउंसिल ने परीक्षा केंद्र की मान्यता भी निरस्त करने का निर्णय लिया। पुलिस अब पूरे नकल रैकेट और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।

 पैरामेडिकल डिप्लोमा परीक्षा?

बता दें कि पैरामेडिकल डिप्लोमा परीक्षा स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े तकनीकी कर्मचारियों के चयन और प्रशिक्षण की महत्वपूर्ण परीक्षा मानी जाती है। इस परीक्षा के माध्यम से विभिन्न पैरामेडिकल डिप्लोमा पाठ्यक्रमों में अध्ययनरत विद्यार्थियों का मूल्यांकन किया जाता है। सफल अभ्यर्थियों को संबंधित क्षेत्र में डिप्लोमा प्रदान किया जाता है, जिससे वे सरकारी और निजी अस्पतालों, डायग्नोस्टिक सेंटरों, लैब और स्वास्थ्य संस्थानों में नौकरी के लिए पात्र बनते हैं।

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