कोलकाता का ईडन गार्डन्स आमतौर पर क्रिकेट मैचों के लिए जाना जाता है, लेकिन इस बार महालया की शाम यहां का माहौल पूरी तरह अलग होगा। 10 अक्टूबर 2026 को महालया के मौके पर ईडन गार्डन्स में दुर्गा पूजा से जुड़ा बड़ा सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।
इस कार्यक्रम में करीब 15 हजार ढाकी एक साथ ढाक बजाएंगे। इसके अलावा दुर्गा पूजा की थीम पर ड्रोन शो और कई सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भी इस कार्यक्रम में शामिल होने की सूचना है।
इस आयोजन के बीच चक्षुदान की परंपरा भी चर्चा में है। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि चक्षुदान क्या है और इसका महालया से क्या संबंध है।
क्या होता है मां दुर्गा का चक्षुदान?
बंगाल में चक्षुदान को ‘चोख्खुदान’ (Chokkhu Daan) कहा जाता है। बंगाली भाषा में ‘चोख्खु’ का मतलब आंख और ‘दान’ का मतलब देना होता है।
आसान शब्दों में कहें तो मिट्टी से बनी मां दुर्गा की प्रतिमा की आंखों को अंतिम रूप देने की परंपरा को चक्षुदान कहा जाता है।
मूर्ति बनाने के दौरान पहले शरीर और चेहरे का आकार तैयार किया जाता है। इसके बाद आंखों का चित्रांकन किया जाता है। इसे बेहद सावधानी और बारीकी से किया जाता है और आमतौर पर अनुभवी मूर्तिकार ही यह काम करते हैं।
माना जाता है कि आंखों के चित्रांकन से प्रतिमा के चेहरे पर भाव, तेज और शक्ति का स्वरूप उभरकर आता है।
महालया से चक्षुदान का क्या संबंध है?
बंगाल में महालया का विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। इसे पितृ पक्ष के समापन और देवी पक्ष की शुरुआत से जोड़ा जाता है। इसी दिन से मां दुर्गा के धरती पर आगमन की प्रतीकात्मक शुरुआत मानी जाती है।
पुरानी परंपरा के अनुसार दुर्गा प्रतिमा लगभग तैयार होने के बाद उसकी आंखें महालया के दिन बनाई जाती थीं। हालांकि आज समय और काम की जरूरतों के कारण कई मूर्तिकार महालया से पहले ही प्रतिमाओं की आंखें बना देते हैं।
इसके बावजूद चक्षुदान का सांस्कृतिक और धार्मिक संबंध आज भी महालया से काफी गहरा माना जाता है।
चक्षुदान और प्राण प्रतिष्ठा एक नहीं
चक्षुदान और प्राण प्रतिष्ठा को एक ही रस्म समझना सही नहीं है। चक्षुदान मुख्य रूप से प्रतिमा की आंखों के चित्रांकन से जुड़ी परंपरा है।
वहीं, दुर्गा पूजा में बोधन और प्राण प्रतिष्ठा जैसे धार्मिक अनुष्ठान अलग-अलग चरणों में किए जाते हैं। इसलिए सिर्फ आंखें बनाने के साथ ही प्रतिमा की औपचारिक प्राण प्रतिष्ठा हो जाती है, ऐसा नहीं माना जाता।
ईडन गार्डन्स में क्यों हो रही है इसकी चर्चा?
ईडन गार्डन्स जैसे ऐतिहासिक क्रिकेट मैदान में महालया के मौके पर दुर्गा पूजा से जुड़ा इतना बड़ा कार्यक्रम अपने आप में खास है। हजारों ढाकियों की प्रस्तुति, ड्रोन शो और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के बीच चक्षुदान की परंपरा को शामिल किए जाने की चर्चा ने लोगों का ध्यान खींचा है।
इस आयोजन के जरिए महालया से जुड़ी बंगाल की एक पुरानी परंपरा भी सामने आ रही है। चक्षुदान की बारीक कला ही दुर्गा प्रतिमा के चेहरे को उसका खास भाव और पहचान देने में अहम भूमिका निभाती है।
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