नई दिल्ली: अक्टूबर 2026 धार्मिक नजरिए से काफी महत्वपूर्ण महीना रहने वाला है। इस महीने पितृ पक्ष, शारदीय नवरात्रि, महाष्टमी, महानवमी, विजयादशमी, पापांकुशा एकादशी और शरद पूर्णिमा समेत कई प्रमुख पर्व मनाए जाएंगे। आश्विन मास होने की वजह से इस महीने देवी पूजा और पितरों की आराधना का विशेष महत्व माना जाता है।
2 अक्टूबर 2026 – गांधी जयंती
गांधी जयंती महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर मनाई जाती है। यह दिन उनके सत्य, अहिंसा, सादगी और स्वच्छता के विचारों को याद करने का अवसर है।
3 अक्टूबर – जितिया व्रत और कालाष्टमी
जितिया व्रत संतान की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना से किया जाता है। इसी दिन महालक्ष्मी व्रत का समापन और कालाष्टमी भी रहेगी। कालाष्टमी पर भगवान काल भैरव की पूजा की जाती है।
6 अक्टूबर – इंदिरा एकादशी
इंदिरा एकादशी को पितरों की शांति और मोक्ष की कामना से महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा, व्रत और दान-पुण्य किया जाता है।
8 अक्टूबर – गुरु प्रदोष व्रत और मासिक शिवरात्रि
इस दिन भगवान शिव की पूजा के लिए प्रदोष व्रत और मासिक शिवरात्रि दोनों पड़ेंगे। भक्त शिवलिंग का अभिषेक और विशेष पूजा करते हैं।
10 अक्टूबर – सर्व पितृ अमावस्या
सर्व पितृ अमावस्या पितृ पक्ष का अंतिम दिन होता है। इस दिन ज्ञात और अज्ञात पितरों के लिए श्राद्ध, तर्पण और दान करने की परंपरा है।
11 अक्टूबर – शारदीय नवरात्रि शुरू
इस दिन से शारदीय नवरात्रि की शुरुआत होगी। घरों और मंदिरों में घटस्थापना के साथ मां दुर्गा की नौ दिनों तक पूजा की जाएगी। इसी दिन महाराजा अग्रसेन जयंती भी मनाई जाएगी।
14 अक्टूबर – कपर्दिश चतुर्थी
कपर्दिश चतुर्थी पर भगवान गणेश की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन विघ्नों को दूर करने और सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।
15 अक्टूबर – उपांग ललिता व्रत
इस दिन देवी ललिता त्रिपुरसुंदरी की पूजा की जाती है। भक्त सुख-समृद्धि और मनोकामना पूरी होने की कामना से व्रत रखते हैं।
16 अक्टूबर – सरस्वती आवाह्न और दुर्गा पूजा की शुरुआत
नवरात्रि के दौरान सरस्वती आवाह्न, बिल्व निमंत्रण, कल्पारंभ और अकाल बोधन जैसी परंपराएं निभाई जाएंगी। इसी क्रम में दुर्गा पूजा की तैयारियां और विशेष पूजा शुरू होगी।
17 अक्टूबर – नवपत्रिका पूजा और तुला संक्रांति
इस दिन नवपत्रिका पूजा की जाएगी। इसमें नौ प्रकार की वनस्पतियों को देवी के स्वरूप से जोड़कर पूजा की जाती है। साथ ही सूर्य के तुला राशि में प्रवेश के अवसर पर स्नान और दान का महत्व माना जाता है।
19 अक्टूबर – महाष्टमी, महानवमी और संधि पूजा
नवरात्रि के सबसे महत्वपूर्ण दिनों में महाष्टमी और महानवमी शामिल हैं। इस दौरान मां दुर्गा की विशेष पूजा, कन्या पूजन और हवन किया जाता है। अष्टमी और नवमी के बीच संधि पूजा भी होगी।
20 अक्टूबर – विजयादशमी और दुर्गा विसर्जन
विजयादशमी को बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। इस दिन आयुध पूजा के साथ कई जगहों पर मां दुर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन भी किया जाएगा।
21 अक्टूबर – बुद्ध जयंती
बुद्ध जयंती भगवान गौतम बुद्ध के जीवन और उनके शांति, करुणा, अहिंसा और सत्य के संदेशों को याद करने का अवसर है।
22 अक्टूबर – पापांकुशा एकादशी
पापांकुशा एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा और व्रत किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार यह व्रत आध्यात्मिक उन्नति और पापों से मुक्ति की कामना से जुड़ा है।
23 अक्टूबर – शुक्र प्रदोष व्रत
शुक्रवार को पड़ने वाले प्रदोष व्रत में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है। भक्त सुख-समृद्धि और दांपत्य जीवन की खुशहाली की कामना करते हैं।
25 अक्टूबर – कोजागर पूजा और शरद पूर्णिमा
शरद पूर्णिमा पर मां लक्ष्मी की विशेष पूजा की जाती है। कोजागर पूजा के दौरान रात में जागकर देवी लक्ष्मी की आराधना करने की परंपरा है।
26 अक्टूबर – वाल्मीकि जयंती
वाल्मीकि जयंती महर्षि वाल्मीकि की जयंती के रूप में मनाई जाती है। उन्हें रामायण के रचयिता और आदिकवि के रूप में सम्मान दिया जाता है।
29 अक्टूबर – करवा चौथ और वक्रतुंड चतुर्थी
करवा चौथ का व्रत सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र और दांपत्य सुख की कामना से रखती हैं। इसी दिन वक्रतुंड चतुर्थी पर भगवान गणेश की पूजा भी की जाएगी।
कुल मिलाकर, अक्टूबर 2026 में पितरों की आराधना से लेकर नवरात्रि, दुर्गा पूजा, विजयादशमी और शरद पूर्णिमा तक कई बड़े धार्मिक पर्व आएंगे।
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