Business News | Sugar Price Hike | 27 अगस्त 2026 – त्योहारी सीजन शुरू होने से पहले देश में चीनी की कीमतों में तेज बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। महंगी चीनी का असर अब सिर्फ कीमत तक सीमित नहीं है, बल्कि कुछ ऑनलाइन ग्रॉसरी प्लेटफॉर्म और बड़े रिटेल स्टोर्स ने ग्राहकों के लिए खरीद की मात्रा भी सीमित कर दी है। Blinkit, Zepto और Swiggy Instamart जैसे क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर कुछ चीनी पैक्स की खरीद पर लिमिट लगाई गई है। वहीं कुछ ऑफलाइन स्टोर्स पर भी ग्राहकों को सीमित मात्रा में चीनी दी जा रही है।
चीनी की कीमत में कितना इजाफा हुआ?
केंद्र सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, चीनी की कीमत 20 जुलाई को 48.18 रुपये प्रति किलो थी, जो 20 अगस्त तक बढ़कर 55.70 रुपये प्रति किलो हो गई। यानी करीब एक महीने में लगभग 15.6 फीसदी की बढ़ोतरी हुई।
हालांकि, बाजार में पिछले दो महीनों के दौरान कीमतों में इससे भी ज्यादा तेजी की रिपोर्ट सामने आई है। इंडस्ट्री से जुड़े आंकड़ों के अनुसार कुछ बाजारों में चीनी की कीमत करीब 40 फीसदी तक बढ़ी है।
ऑनलाइन खरीद पर लगी लिमिट
चीनी की बढ़ती कीमत और सप्लाई को देखते हुए क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म भी खरीद की मात्रा नियंत्रित कर रहे हैं।
Zepto, Blinkit और Swiggy Instamart पर कुछ चीनी उत्पादों के लिए अलग-अलग खरीद सीमा दिखाई जा रही है। उदाहरण के तौर पर Swiggy Instamart पर एक चीनी प्रोडक्ट के लिए एक ऑर्डर में दो 1 किलो पैक की सीमा बताई गई। अलग-अलग प्लेटफॉर्म, ब्रांड और लोकेशन के हिसाब से लिमिट अलग हो सकती है।
ऑफलाइन दुकानों पर भी खरीद सीमित
चीनी खरीदने पर प्रतिबंध केवल ऑनलाइन प्लेटफॉर्म तक सीमित नहीं है। कुछ बड़े रिटेल स्टोर्स ने भी ग्राहकों के लिए मात्रा तय की है।
रिपोर्टों के अनुसार कुछ DMart और Reliance स्टोर्स में प्रति ग्राहक करीब 2 से 3 किलो तक खरीद की सीमा लगाई गई है। पुणे में DMart के एक स्टोर पर प्रति बिल 5 किलो की सीमा लगाए जाने की जानकारी भी सामने आई थी।
आखिर क्यों बढ़ रही है चीनी की कीमत?
सरकार के मुताबिक ची नी की कीमत बढ़ने के पीछे कई कारण हैं। इनमें घरेलू उत्पादन का अनुमान से कम रहना, त्योहारों से पहले बढ़ती मांग, गन्ने की फसल को मौसम से नुकसान, वैश्विक सप्लाई में कमी और कुछ स्तरों पर जमाखोरी व सट्टेबाजी शामिल हैं।
सर कार ने यह भी कहा है कि मौजूदा कीमत बढ़ोतरी को सिर्फ एथेनॉल उत्पादन के लिए ची नी डायवर्ट किए जाने से जोड़ना सही नहीं है।
सरकार ने उठाए कई बड़े कदम
बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने चीनी कारोबार पर कई कदम उठाए हैं।
सरकार ने 1 अगस्त से 30 नवंबर 2026 तक चीनी डीलरों के लिए 400 टन का स्टॉक लिमिट लागू किया है। इसके अलावा 1 सितंबर से बड़े उपभोक्ताओं को 15 दिनों की खपत से ज्यादा चीनी स्टॉक रखने की अनुमति नहीं होगी।
सरकार की टीमें ची नी मिलों में स्टॉक की भौतिक जांच भी कर रही हैं, ताकि जमाखोरी और कृत्रिम कमी को रोका जा सके।
10 लाख टन कच्ची चीनी के आयात की मंजूरी

घरेलू सप्लाई बढ़ाने के लिए सरकार ने 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची ची नी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी है। इसका उद्देश्य घरेलू बाजार में अतिरिक्त सप्लाई लाना और कीमतों पर दबाव कम करना है।
सरकार के इस कदम से आने वाले समय में बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ने की उम्मीद है। हालांकि, आयातित चीनी को बाजार तक पहुंचने में कुछ समय लग सकता है।
त्योहारों से पहले बढ़ी मांग
रक्षाबंधन समेत आने वाले त्योहारों के कारण घरों में मिठाइयां और पारंपरिक पकवान बनाने के लिए ची नी की मांग बढ़ती है। इसके अलावा मिठाई की दुकानों, बेकरी और फूड कारोबार में भी ची नी की खरीद बढ़ जाती है।
यही वजह है कि त्योहारी सीजन से ठीक पहले सप्लाई और कीमत दोनों पर दबाव देखने को मिल रहा है।
क्या चीनी की कमी है?
यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है। सरकार का कहना है कि देश में घरेलू खपत पूरी करने के लिए पर्याप्त चीनी उपलब्ध है। वहीं इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन से जुड़े एक अधिकारी ने भी कहा है कि मौजूदा तेजी वास्तविक कमी के बजाय जमाखोरी और सट्टेबाजी से जुड़ी हो सकती है।
इसलिए फिलहाल इसे देशव्यापी ची नी संकट कहना सही नहीं होगा।
अक्टूबर में बढ़ सकती है सप्लाई
सरकार ने राज्यों और चीनी मिलों को 15 अक्टूबर 2026 से क्रशिंग शुरू करने की सलाह दी है। सरकार का अनुमान है कि अक्टूबर में चीनी उत्पादन सामान्य 3-4 लाख मीट्रिक टन की तुलना में 10 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा हो सकता है। इससे त्योहारी सीजन में सप्लाई बेहतर होने की उम्मीद है।
आम ग्राहक पर क्या असर?
चीनी की कीमत बढ़ने और खरीद सीमा लगने से आम परिवारों पर दोहरा असर पड़ सकता है। एक तरफ उन्हें पहले से ज्यादा कीमत चुकानी पड़ रही है, वहीं कुछ प्लेटफॉर्म पर एक साथ ज्यादा चीनी खरीदने की सुविधा भी नहीं मिल रही।
हालांकि रोजमर्रा के लिए एक-दो किलो ची नी खरीदने वाले परिवारों पर खरीद सीमा का असर सीमित रह सकता है। ज्यादा मात्रा में खरीदारी करने वाले परिवारों और छोटे कारोबारियों को इसका असर ज्यादा महसूस हो सकता है।
PIB — Ministry of Consumer Affairs
Department of Food & Public Distribution
निष्कर्ष
चीनी की कीमतों में तेजी के बीच ऑनलाइन और ऑफलाइन खरीद पर लिमिट लगाए जाने से उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ गई है। सरकार ने स्टॉक लिमिट, स्टॉक की जांच और शुल्क-मुक्त कच्ची चीनी के आयात जैसे कदम उठाए हैं। सरकार का दावा है कि देश में पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और जमाखोरी-सट्टेबाजी पर कार्रवाई की जा रही है।
आने वाले हफ्तों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अतिरिक्त सप्लाई बाजार तक कितनी तेजी से पहुंचती है और क्या इससे Sugar Price Hike पर लगाम लगती है।
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