इटली में बढ़ती महंगाई, महंगे मकानों के किराये और शिक्षा पर कम सरकारी खर्च के खिलाफ हजारों लोग सड़कों पर उतर आए हैं. शुक्रवार (30 अक्टूबर 2026) को देश के 40 से ज्यादा शहरों में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए. इस आंदोलन में छात्र, मजदूर, किसान और ट्रेड यूनियन के सदस्य शामिल हुए. प्रदर्शनकारियों ने सरकार से बेहतर वेतन, सस्ती शिक्षा, कम किराया और अच्छी सार्वजनिक सुविधाएं देने की मांग की.
लोगों ने प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की सरकार की सैन्य खर्च बढ़ाने की नीति का भी विरोध किया. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार को हथियारों और युद्ध पर खर्च बढ़ाने के बजाय आम लोगों की जरूरतों पर ध्यान देना चाहिए.
24 घंटे की हड़ताल के दौरान हुआ प्रदर्शन
यह देशव्यापी आंदोलन ट्रेड यूनियन संगठन ‘यूनिओन सिंडाकेल डि बेस’ (USB) की ओर से बुलाई गई 24 घंटे की हड़ताल का हिस्सा था. ज्यादातर शहरों में प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे, लेकिन कुछ जगहों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव बढ़ गया.
हालात काबू में करने के लिए पुलिस ने कई जगह वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया. समाचार एजेंसी ANSA के मुताबिक, संसद की ओर बढ़ रही भीड़ को रोकने के दौरान आठ लोगों को हिरासत में लिया गया.
छात्रों की मांग- शिक्षा और रहने का खर्च कम करे सरकार
इस आंदोलन में बड़ी संख्या में छात्र भी शामिल हुए. उनकी मांग है कि सरकार शिक्षा के लिए बजट बढ़ाए, कॉलेज की फीस कम करे और छात्रों के लिए सस्ते हॉस्टल की व्यवस्था करे.
रोम की 21 वर्षीय छात्रा बीट्रिस चिलेली ने समाचार एजेंसी AFP को बताया कि छात्रों के लिए पढ़ाई और रहने का खर्च उठाना मुश्किल हो गया है. उनके मुताबिक, रोम में छात्र आवास के लिए एक कमरे का किराया 1,200 यूरो प्रति महीने तक पहुंच सकता है. ऐसे में छात्रों को अपने खर्च के लिए माता-पिता पर निर्भर रहना पड़ रहा है.
18 वर्षीय छात्र आंदोलन की प्रवक्ता लॉरा तेरेसी ने भी सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि महंगाई और शिक्षा के बजट में कटौती का असर छात्रों, मजदूरों और आम परिवारों पर पड़ रहा है.
ट्यूरिन में पुलिस ने चलाया वॉटर कैनन, आठ लोग हिरासत में
ट्यूरिन शहर में प्रदर्शनकारियों ने सरकारी इमारत के आसपास लगाए गए बैरिकेड्स की तरफ बढ़ने की कोशिश की. इस दौरान पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए वॉटर कैनन चलाया.
शाम को तनाव उस समय और बढ़ गया, जब प्रदर्शनकारियों के एक समूह ने संसद की ओर मार्च करने की कोशिश की. पुलिस ने भीड़ को हटाया और बैरिकेड्स तोड़ने की कोशिश करने वाले आठ लोगों को हिरासत में लिया.
रोम में कोलोसियम तक पहुंचा प्रदर्शन, लगाए गए टेंट
राजधानी रोम में हजारों लोगों ने टर्मिनी रेलवे स्टेशन से मार्च शुरू किया. प्रदर्शनकारी झंडे और बैनर लेकर कोलोसियम के पास से गुजरे. इस दौरान उन्होंने सरकार के खिलाफ नारे लगाए.
प्रदर्शनकारियों के एक नारे ने खास ध्यान खींचा. उन्होंने कहा, ‘हमें बम नहीं, ज्यादा घर चाहिए.’ इसके जरिए वे सरकार से सैन्य खर्च कम करके आम लोगों के लिए घर और दूसरी जरूरी सुविधाओं पर पैसा खर्च करने की मांग कर रहे थे.
कुछ प्रदर्शनकारियों ने गाजा में युद्ध के दौरान आम नागरिकों की मुश्किलों को दिखाने के लिए एक प्रस्तुति भी दी. वहीं, कई लोग फिलिस्तीन के समर्थन में झंडे लेकर पहुंचे. कुछ प्रदर्शनकारियों ने ऐलान किया कि वे सप्ताहांत में भी टेंट लगाकर अपना आंदोलन जारी रखेंगे.
जेनोआ में 15 हजार लोगों ने किया प्रदर्शन
इटली के बंदरगाह शहर जेनोआ में भी बड़ा प्रदर्शन देखने को मिला. यहां करीब 15 हजार बंदरगाह कर्मचारी, छात्र और अन्य लोग आंदोलन में शामिल हुए.
प्रदर्शनकारियों ने महंगाई और कम वेतन के साथ-साथ बंदरगाहों के जरिए युद्ध प्रभावित क्षेत्रों में हथियार भेजे जाने का भी विरोध किया. उनका कहना था कि व्यापारिक बंदरगाहों का इस्तेमाल युद्ध के लिए हथियार भेजने में नहीं होना चाहिए.
मिलान, बोलोग्ना और नेपल्स में भी निकाले गए मार्च
मिलान में प्रदर्शनकारियों ने सेंट्रल रेलवे स्टेशन से मार्च शुरू किया. यहां पुलिस ने कई सड़कों पर बैरिकेड्स लगाए और जुलूस को उन इलाकों से दूर रखा, जहां पहले हिंसक प्रदर्शन हुए थे.
छात्रों ने बैनर के जरिए सरकार से अपने भविष्य को सुरक्षित करने की मांग की. इसके अलावा बोलोग्ना और नेपल्स में भी प्रदर्शन हुए. आंदोलन में शिक्षक, टैक्सी चालक, ट्रक ड्राइवर, किसान और बुजुर्ग भी शामिल हुए.
हिंसक प्रदर्शनों के बाद सरकार ने सख्त किए नियम
इटली में पिछले कुछ हफ्तों से महंगाई और शिक्षा के मुद्दे पर लगातार विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. 17 और 18 अक्टूबर को मिलान में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हिंसक झड़पें हुई थीं. इस दौरान कुछ दुकानों में लूटपाट और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं भी सामने आई थीं.
इसके बाद प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की सरकार ने सार्वजनिक प्रदर्शनों से जुड़े नियम सख्त कर दिए. साथ ही नाबालिगों को हिरासत में लेने के नियमों में भी बदलाव किया गया.
ट्रक ड्राइवरों और किसानों के लिए 175.2 मिलियन यूरो का राहत पैकेज
बढ़ती ईंधन कीमतों से परेशान ट्रक ड्राइवरों, किसानों और मछुआरों को राहत देने के लिए इटली सरकार ने 175.2 मिलियन यूरो के सहायता पैकेज पर सहमति जताई है.
इसके अलावा सरकार के 2027 के प्रस्तावित बजट में युवाओं और परिवारों के लिए भी कुछ योजनाओं पर विचार किया जा रहा है. इसमें 30 साल से कम उम्र के कर्मचारियों को हर साल 2,500 यूरो का बोनस देने का प्रस्ताव शामिल है.
मेलोनी बोलीं- युवाओं की समस्याओं का समाधान करना चाहती है सरकार
प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने 28 अक्टूबर को कहा था कि सरकार की प्रस्तावित योजनाओं से युवाओं की समस्याओं को दूर करने में मदद मिलेगी. उन्होंने उम्मीद जताई कि इन योजनाओं से उन युवाओं को राहत मिलेगी, जिन्हें लगता है कि सरकार उनकी परेशानियों पर ध्यान नहीं दे रही है.
हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि सरकारी राहत उन लोगों के लिए नहीं है, जो दुकानों में तोड़फोड़ करते हैं या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाते हैं.
फिलहाल इटली में महंगाई, महंगी शिक्षा और सैन्य खर्च को लेकर सरकार पर दबाव बढ़ता जा रहा है. छात्र और मजदूर अपनी मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखने की बात कह रहे हैं. वहीं, सरकार राहत योजनाओं और सख्त कानूनों के जरिए हालात संभालने की कोशिश कर रही है.



