नई दिल्ली: क्राइम ब्रांच ने नकली दवाएं बनाने और उन्हें देशभर में सप्लाई करने वाले बड़े गिरोह के मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार आरोपी की पहचान मुजफ्फरनगर के रहने वाले मोहम्मद अकदस सिद्दीकी के रूप में हुई है।
जामिया मिलिया इस्लामिया से बीबीए पास है मुख्य आरोपी
पुलिस के अनुसार, मोहम्मद अकदस सिद्दीकी ने जामिया मिलिया इस्लामिया से बीबीए की पढ़ाई की है। वह 1 अप्रैल को मुजफ्फरनगर स्थित उसकी फैक्ट्री पर हुई छापेमारी के बाद से फरार था।
आरोपी की गिरफ्तारी के लिए अदालत से गैर-जमानती वारंट भी जारी किया गया था। अब क्राइम ब्रांच उससे पूछताछ कर रही है ताकि नकली दवाओं के पूरे नेटवर्क और इसमें शामिल अन्य लोगों का पता लगाया जा सके।
इस मामले में पहले ही दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद और लखनऊ से दवा सप्लायर, फर्जी जीएसटी फर्म उपलब्ध कराने वाले, बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले और अन्य सहयोगियों समेत नौ आरोपितों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
जांच में पता चला था कि गिरोह मुजफ्फरनगर में हाई-टेक फैक्ट्री में नामी कंपनियों की जीवनरक्षक दवाओं की नकली पैकिंग, लेबल और ट्रेडमार्क बनाकर दवाएं तैयार करता था।
इन्हें बाजार मूल्य से करीब 60 प्रतिशत कम कीमत पर कई राज्यों में बेचकर भारी मुनाफा कमाया जाता था। क्राइम ब्रांच के उपायुक्त आदित्य गौतम के मुताबिक, एसीपी पाटिल स्वागत राजकुमार की देखरेख में और इंस्पेक्टर मंजीत कुमार के नेतृत्व में गठित टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर फरार चल रहे अकदस को गिरफ्तार किया।
नकली दवाइयां बनाता था गिरोह
इनके निशाने पर कई नामी कंपनियों की दवाएं थीं, जिनमें स्टेमेटिल एमडी, गैबापिन-एनटी (इनटस), जोई-1, जोई एम-1, जोई एम-2, शेलकैल (टोरेंट) और सीसीएम (जीएसके) शामिल हैं। ये दवाएं उल्टी, चक्कर, नसों के दर्द, डायबिटिक न्यूरोपैथी, विटामिन-बी12 की कमी, हड्डियों की कमजोरी और कैल्शियम की कमी जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होती हैं।
वित्तीय नेटवर्क की चल रही जांच
पुलिस के मुताबिक, आरोपी बेहद कम लागत में नकली दवाएं बनाकर उन्हें असली ब्रांड के नाम पर बाजार में बेचते थे। पुलिस पूरे वित्तीय नेटवर्क की भी जांच कर रही है।
