देश की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट में एक वकील के हंगामे का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में वकील अदालत के अंदर मुख्य न्यायाधीश (CJI) के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करता और कागज उछालता हुआ दिखाई दे रहा है।
इतना ही नहीं, वकील ने यह भी दावा किया कि वह लखनऊ के एक पुलिस अधिकारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दे रहा है। अदालत के अंदर हुए इस पूरे घटनाक्रम ने सभी को हैरान कर दिया।
हालांकि, इस मामले में वीडियो की परिस्थितियों और संबंधित दावों की आधिकारिक पुष्टि संबंधित अधिकारियों की ओर से की जानी बाकी है।
मिली जानकारी के मुताबिक याचिकाकर्ता की पहचान प्रबल प्रताप के तौर पर हुई है. इसने जस्टिस केवी विश्वनाथ और जस्टिस आलोक अराधे की दो जजों वाले बेंच को न्यायिक सेवक यानी ज्यूडिशियल सर्वेंट कहा. साथ ही कि वह संप्रभु है. वकील इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश की याचिका को चुनौती देने वाली याचिका पर बहस कर रहा था.
वायरल वीडियो में वकील कह रहा है कि मिस्टर न्यायिक सेवक, मैं आपको आदेश देता हूं कि आप लखनऊ के एसीपी विकास नगर के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दें.
कोर्ट रूम में केस से जुड़े कागज हवा में उछाल दिए
इस पर जस्टिस विश्वनाथ ने कहा कि आप हमें आदेश दे रहे हैं. उसने इस पर जवाब दिया कि मैं संप्रभु हूं. माहौल यहीं नहीं थमा, उसने कोर्ट रूम में केस से जुड़े कागज हवा में उछाल दिए. कोर्ट के साथ बदसलूकी की. इस दौरान जब कोर्ट अधिकारी उसे बाहर ले जा रहे थे, तो उसने अपशब्दों का इस्तेमाल किया. साथ ही कहा कि यह सीजेआई को दे देना.
याचिकाकर्ता पर कोई कार्रवाई नहीं करेंगे
इस पूरे नाटक के बाद भी कोर्ट ने आदेश सुनाया. सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने मामले के तथ्यों पर गौर किया और आदेश पारित किया. जज की तरफ से साफ कहा गया कि वे याचिकाकर्ता के अपमानजनक व्यवहार पर उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं करेंगे. बेंच ने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता की स्थिति को देखते हुए हम उसके खिलाफ कोई कार्रवाई न करने का प्रस्ताव नहीं रखते हैं. इसलिए स्पेशल लीव पिटीशनत याचिका खारिज की जाती है. खुद पेश होने और बहस करने की अनुमति और याचिका दायर करने की अनुमति के लिए लंबित सभी आवेदन भी निपटाए हुए मानें जाएंगे.
