बांग्लादेश की निर्वासित लेखिका तस्लीमा नसरीन की कोलकाता वापसी को लेकर पश्चिम बंगाल में राजनीति तेज हो गई है। उनकी यात्रा को लेकर बीजेपी और तृणमूल कांग्रेस (TMC) आमने-सामने आ गई हैं और दोनों दल एक-दूसरे पर निशाना साध रहे हैं।
तस्लीमा नसरीन 1 अगस्त 2026 को कोलकाता में आयोजित एक कट्टरवाद विरोधी साहित्यिक कार्यक्रम में हिस्सा लेने वाली हैं। करीब 20 साल बाद उनकी कोलकाता वापसी होने जा रही है। उनकी इस यात्रा को लेकर अभिव्यक्ति की आजादी, धर्मनिरपेक्षता और धार्मिक मुद्दों पर एक बार फिर बहस शुरू हो गई है।
सोशल मीडिया पर दी कोलकाता वापसी की जानकारी
तस्लीमा नसरीन ने अपने कोलकाता वापसी की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक पोस्ट के जरिए साझा की. उन्होंने कहा कि वह एक अगस्त को कोलकाता के रविंद्र सदन में आयोजित होने वाले एंटी-फंडामेंटलिज्म लिटरेरी इवेंट यानी कट्टरवाद-विरोधी साहित्यिक कार्यक्रम में भाग लेंगी. इसके साथ ही, कार्यक्रम में उनके कविता पाठ होने की भी संभावना है.
तस्लीमा नसरीन की कोलकाता वापसी की घोषणा के बाद बंगाल की वर्तमान सत्तारूढ़ पार्टी भाजपा और पूर्ववर्ती सताधारी पार्टी टीएमसी लगातार एक-दूसरे पर हमला कर रहे है. नसरीन की कोलकाता यात्रा को लेकर टीएमसी के विधायक अखरुज्जमान ने न्यूज एजेंसी IANS ने बातचीत में कहा, ‘तस्लीमा नसरीन बांग्लादेश की लेखिका थीं. उन्होंने मुस्लिम समुदाय और इस्लाम में शरिया के खिलाफ कई तरह की टिप्पणियां की हैं और अगर कोई मुसलमानों के खिलाफ बयान देता है, तो यह डबल इंजन की सरकार उसे शय देगी, उसका सम्मान करेगी.’
जबकि बंगाल सरकार में मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने पूर्ववर्ती टीएमसी सरकार पर लेखिका की सुरक्षा में विफल रहने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा, ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास और सभी की जिम्मेदारी. जिम्मेदारी तय की जा रही है, वामपंथी सरकार तस्लीमा नसरीन जैसी लेखिका को सुरक्षा नहीं दे सकी. उन्होंने मुसलमानों के साथ राजनीति की, लेकिन सुरक्षा मुहैया नहीं कराई या यूं कहें कि उन्होंने सुरक्षा दी ही नहीं.’
उन्होंने आगे कहा, ‘ममता बनर्जी के शासनकारी को तो छोड़ दी ही दीजिए, आज पहली तारीख है, मैंने सुना है कि तस्लीमा जी कोलकाता आ रही हैं. मैं उनकी लेखनी की बहुत बड़ी प्रशंसक हूं.’
तस्लीमा नसरीन ने क्यों छोड़ा था कोलकाता?
दरअसल, साल 1994 में बांग्लादेश में भारी विरोध और आलोचना के बाद तस्लीमा नसरीन ने अपना देश छोड़ दिया था और वे अमेरिका और यूरोप में रहने लगी थीं. बाद में साल 2004 में वो भारत आ गईं और कोलकाता में रहने लगीं, लेकिन साल 2007 में उनकी लेखनी के कारण मुस्लिम संगठनों के कुछ वर्गों ने प्रदर्शन शुरू कर दिए. जिसके बाद तत्कालीन वाम मोर्चा सरकार ने नसरीन को राज्य छोड़ने का आदेश दे दिया. इसके बाद से वो लेफ्ट सरकार या टीएमसी के शासनकाल के दौरान कभी बंगाल की धरती पर वापस नहीं आईं.
