Sat. Jul 18th, 2026

नई दिल्ली: संसद का मॉनसून सत्र सोमवार से शुरू हो रहा है। सरकार की ओर से जारी शुरुआती एजेंडे में डिलिमिटेशन बिल शामिल नहीं है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक सरकार इसे सत्र के दौरान पेश कर सकती है। जानकारी के अनुसार, इस बिल को पास कराने के लिए एनडीए के नेता जरूरी समर्थन जुटाने में लगे हैं। वहीं, विपक्ष भी इस मुद्दे पर पूरी तरह सतर्क है।

डिलिमिटेशन से जुड़ा प्रस्ताव संविधान संशोधन का मामला है। इसलिए इसे पास कराने के लिए लोकसभा और राज्यसभा में मौजूद और मतदान करने वाले सदस्यों में से कम से कम दो-तिहाई का समर्थन जरूरी होगा।

इससे पहले अप्रैल में हुए विशेष सत्र के दौरान सरकार ने संविधान (131वां संशोधन) विधेयक पेश किया था, लेकिन उसे पर्याप्त समर्थन नहीं मिला। इसी वजह से डिलिमिटेशन विधेयक आगे नहीं बढ़ सका। अब बदले राजनीतिक हालात को देखते हुए सरकार मॉनसून सत्र में एक बार फिर इस बिल को लाने की तैयारी कर रही है।

  • सरकार इस बिल को लेकर कितना गंभीर है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि करीब एक महीने पहले एक सीनियर नेता ने ये कहा था कि अगर हमारे पास आज नंबर हो जाते हैं तो हम अगले हफ्ते ही स्पेशल सत्र बुलाकर बिल पास करवा लेंगे।
  • वैसे संसद में नंबर गेम कुछ बदला है। पिछले कुछ महीनों में विपक्षी दलों में लगातार टूट हुई। तृणमूल कांग्रेस के 20 लोकसभा सांसद और शिवसेना (यूबीटी) के 6 सांसद एनडीए के साथ आ गए। इससे लोकसभा में सरकार का संख्या बल पहले से ज्यादा मजबूत हो गया। बीजेपी इंडिया गठबंधन के दलों से भी संपर्क बढ़ा रही है।

बीजेपी सूत्रों के मुताबिक हालिया विधानसभा चुनावों के बाद जो राजनीतिक समीकरण बदले हैं उससे बीजेपी के लिए कई और दलों से भी बातचीत का रास्ता खुला है। एनसीपी (एसपी) के साथ ही डीएमके पर भी बीजेपी की नजर है। डीएमके के लोकसभा में 22 और राज्यसभा में 8 सांसद हैं। डीएमके और कांग्रेस के बीच की दूरी के बीच बीजेपी को अपने लिए कुछ मौका दिख सकता है। बीजेपी के एक नेता ने अनौपचारिक बातचीत में कहा कि पक्ष में वोट करने के अलावा वोटिंग से बाहर रहना भी समर्थन का एक तरीका हो सकता है।

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