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जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर अक्सर लोगों से राजनीति में जाति और धर्म से ऊपर उठकर मतदान करने की अपील करते हैं। उनका कहना है कि अगर राजनीति में बदलाव लाना है, तो मतदाताओं को जातीय और धार्मिक आधार पर वोट नहीं देना चाहिए।

हालांकि, अब उनके विरोधियों ने उन पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया है। आलोचकों का कहना है कि प्रशांत किशोर खुद अपने सिद्धांतों पर अमल नहीं कर रहे हैं।

विरोधियों का आरोप है कि भोजपुर के बिलौटी गांव में भरत तिवारी के परिजनों से मुलाकात कर उन्होंने ब्राह्मण वोटों को साधने की कोशिश की। उनका कहना है कि जो नेता जनता से जाति से ऊपर उठने की बात करते हैं, उन्हें पहले खुद इसका उदाहरण पेश करना चाहिए।

यह आरोप विपक्षी नेताओं की ओर से लगाए गए हैं। प्रशांत किशोर की ओर से इस पर क्या प्रतिक्रिया है, इसकी जानकारी इस रिपोर्ट में उपलब्ध नहीं है।

बता दें कि अभी जांच रिपोर्ट आई भी नहीं है और वे उपचुनाव में भरत तिवारी को शहीद बता रहे हैं। करबिगहिया में बंटी यादव की मां से मिल कर वे यह बता रहे हैं कि पुलिस, गमछे का हरा रंग देख कर गोली मार रही है। निशाना सम्राट चौधरी पर है। उन्होंने कहा था कि आई हरा रंग के गमछा वालों को तुरंत पकड़ लेगा। यहां हरा रंग का गमछा का प्रयोग परोक्ष रूप से राजद के लिए किया गया है।

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