हिंदी सिनेमा में इन दिनों मध्यवर्गीय परिवारों की कहानियों को बड़े ही रोचक और संवेदनशील अंदाज़ में पेश किया जा रहा है। इसी कड़ी में आई फिल्म ‘उत्तर दा पुत्तर’ एक हल्की-फुल्की लेकिन विचारोत्तेजक फैमिली कॉमेडी है, जो हंसाने के साथ-साथ एक अहम संदेश भी देती है। निर्देशक रविंदर सिवाच की यह फिल्म कर्म और किस्मत के बीच चलने वाली बहस को बेहद मनोरंजक तरीके से सामने लाती है।
प्रोमोडोम मोशन पिक्चर्स के बैनर तले बनी है फिल्म
इस फिल्म का निर्माण संदीप कपूर और प्रिया कपूर ने प्रोमोडोम मोशन पिक्चर्स के बैनर तले किया है। फिल्म का लेखन और निर्देशन रविंदर सिवाच ने किया है, जो संदीप कपूर की कहानी पर आधारित है। कहानी के केंद्र में हैं प्रोफेसर साई राम टुटेजा (अन्नू कपूर), जो पेशे से फिजिक्स के शिक्षक हैं, लेकिन निजी जीवन में वास्तु और अंधविश्वास पर गहरा भरोसा रखते हैं। यही विरोधाभास फिल्म की कहानी को रोचक बनाता है।

फिल्म का प्लॉट है दिलचस्प
फिल्म का प्लॉट तब दिलचस्प मोड़ लेता है जब प्रोफेसर अपने परिवार के लिए एक ‘परफेक्ट वास्तु’ वाला घर ढूंढ लेते हैं, लेकिन एक अप्रत्याशित घटना उनके विश्वास को झकझोर देती है। इसके बाद शुरू होती है उनकी एक नई यात्रा—अपनी जिंदगी और रिश्तों को संभालने की।
फिल्म में अन्नू कपूर, पवन मल्होत्रा, रुखसार रहमान, बृजेंद्र काला, जीवेशु अहलूवालिया, राजेंद्र सेठी, समिट गुलाटी और नितिन अरोड़ा जैसे दमदार कलाकार हैं, जिन्होंने अपने-अपने किरदारों में जान डाल दी है और फिल्म को मजबूत बनाया है।
अन्नू कपूर ने भावनात्मक दृश्यों पर पकड़ बेमिसाल
अभिनय की बात करें तो अन्नू कपूर ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि कॉमेडी और भावनात्मक दृश्यों में उनकी पकड़ बेमिसाल है। उनकी कॉमिक टाइमिंग दर्शकों को हंसने पर मजबूर करती है, वहीं गंभीर पलों में भी वे गहरी छाप छोड़ते हैं। पवन मल्होत्रा, बृजेंद्र काला और रुखसार रहमान ने भी अपने किरदारों को पूरी ईमानदारी से निभाया है।
दिल्ली के मध्यवर्गीय परिवेश को बड़े ही वास्तविक अंदाज़ में दिखाया गया
निर्देशन सधा हुआ है और फिल्म कहीं भी भटकती नजर नहीं आती। दिल्ली के मध्यवर्गीय परिवेश को बड़े ही वास्तविक अंदाज़ में दिखाया गया है, जो दर्शकों को कहानी से जोड़ता है। संवाद चुटीले हैं और बैकग्राउंड स्कोर कॉमेडी को और प्रभावी बनाता है।
हालांकि, फिल्म का दूसरा हिस्सा थोड़ी धीमी गति का शिकार होता है और कुछ किरदारों को और विस्तार दिया जा सकता था। इसके बावजूद फिल्म अपनी पकड़ बनाए रखती है और अंत तक दर्शकों का मनोरंजन करती है।
वर्डिक्ट: ‘उत्तर दा पुत्तर’ एक साफ-सुथरी फैमिली एंटरटेनर है, जो हंसी के साथ एक सकारात्मक संदेश भी देती है। अगर आप ऐसी फिल्म देखना चाहते हैं जो आपको गुदगुदाए और सोचने पर मजबूर करे, तो यह फिल्म आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प है।
