रायपुर: छत्तीसगढ़ से बदलाव और उम्मीद की एक खास तस्वीर सामने आई है। कुछ समय पहले तक जिन महिलाओं के हाथों में हथियार हुआ करते थे, वे अब रैंप पर आत्मविश्वास के साथ कदम बढ़ाती नजर आईं।
राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के मौके पर रायपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में हाल ही में आत्मसमर्पण करने वाली 9 पूर्व महिला नक्सलियों ने रैंप वॉक किया। उन्होंने पारंपरिक हथकरघा और कोसा सिल्क से बने कपड़े पहनकर अपनी नई पहचान और आत्मविश्वास की झलक दिखाई।
इन महिलाओं ने फेमिना मिस इंडिया छत्तीसगढ़ अनुष्का सोन के साथ रैंप पर वॉक किया। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने उनका उत्साह बढ़ाया।
हथियार छोड़कर चुनी शांतिपूर्ण जिंदगी
इन महिलाओं ने नक्सलवाद का रास्ता छोड़कर अब सामान्य जिंदगी की ओर कदम बढ़ाया है। आत्मसमर्पण के बाद उन्हें अलग-अलग सामाजिक संगठनों के साथ जोड़ा जा रहा है और नए हुनर की ट्रेनिंग दी जा रही है।
उद्देश्य है कि ये महिलाएं आत्मनिर्भर बनें, रोजगार हासिल करें और सम्मान के साथ अपनी जिंदगी शुरू कर सकें।
9 पूर्व महिला नक्सलियों ने पहने पारंपरिक कपड़े
रायपुर के पंडित दीनदयाल उपाध्याय सभागार में 7 अगस्त को आयोजित राज्य स्तरीय बुनकर सम्मेलन में यह खास रैंप वॉक हुआ। इसमें सुकमा की 8 और बीजापुर की 1 पूर्व महिला नक्सली ने हिस्सा लिया।
उन्होंने हथकरघा और कोसा सिल्क से बने पारंपरिक परिधान पहनकर रैंप पर कदम रखा। यह आयोजन बदलते बस्तर और मुख्यधारा में लौट रही महिलाओं की नई तस्वीर के तौर पर देखा गया।
बोलीं- कभी नहीं सोचा था ऐसा दिन आएगा
सुकमा के चिंतागुफा क्षेत्र के एल्मागुंडा गांव की 22 वर्षीय पुनेम ज्योति ने बताया कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उनकी जिंदगी में ऐसा दिन आएगा। उन्होंने पिछले साल दिसंबर में हैदराबाद में आत्मसमर्पण किया था।
ज्योति ने बताया कि माओवादी आंदोलन छोड़ने के बाद उनकी जिंदगी में काफी बदलाव आया है।
एक अन्य 28 वर्षीय पूर्व महिला नक्सली ने बताया कि उन्होंने इससे पहले कभी फैशन शो नहीं देखा था। उन्होंने कहा कि जंगल में रहते हुए ऐसी चीजों के बारे में सोचना भी मुश्किल था।
उन्होंने बताया कि माओवादी संगठन के सांस्कृतिक विभाग से जुड़ी होने के कारण उन्हें लोगों के सामने कार्यक्रम करने का थोड़ा अनुभव था, जिससे रैंप वॉक करने में मदद मिली।
उन्होंने कहा कि हिंसा छोड़ने के बाद अब वे शांतिपूर्ण और सम्मानजनक जिंदगी जी रही हैं और इससे उन्हें खुशी मिलती है।
मुख्यधारा में शामिल करना बड़ी जिम्मेदारी
पूर्व महिला नक्सलियों का यह रैंप वॉक सिर्फ एक फैशन कार्यक्रम नहीं, बल्कि उनके जीवन में आए बदलाव की तस्वीर भी है। अब जरूरत है कि आत्मसमर्पण करने वाली इन महिलाओं को रोजगार, शिक्षा, प्रशिक्षण और आत्मनिर्भर बनने के पर्याप्त अवसर मिलें, ताकि वे समाज की मुख्यधारा में मजबूती से अपनी जगह बना सकें।
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