झारखंड में फिर तेज हुआ छात्र आंदोलन
आंदोलनकारी छात्रों ने अब सीधे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को घेरने का ऐलान कर दिया है। छात्रों का कहना है कि अगर सरकार उनकी मांगों पर ठोस फैसला नहीं लेती है तो 20 अगस्त को मुख्यमंत्री आवास का घेराव किया जाएगा। प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री के इस्तीफे की भी मांग की है।
छात्रों का यह आंदोलन मुख्य रूप से झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं, पारदर्शिता और परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर चल रहा है।
20 अगस्त को CM आवास घेरने का ऐलान
JSSC-JPSC रिफॉर्म मंच से जुड़े प्रदर्शनकारियों ने घोषणा की है कि 20 अगस्त को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के आवास का घेराव किया जाएगा। आंदोलनकारियों ने मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग भी उठाई है।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सरकार उनकी शिकायतों पर पर्याप्त कार्रवाई नहीं कर रही है। उनका कहना है कि भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों से हजारों युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है।
JSSC-JPSC रिफॉर्म मंच के नेता रविंद्र पासवान ने कहा कि आंदोलनकारी मुख्यमंत्री से इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने यह भी कहा है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस फैसला नहीं होता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
स्वतंत्रता दिवस पर निकाली तिरंगा यात्रा – 20 अगस्त
15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर रांची में आंदोलन कर रहे छात्रों ने तिरंगा यात्रा निकाली। यात्रा की शुरुआत जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से हुई, जहां छात्र लंबे समय से प्रदर्शन कर रहे हैं।
हाथों में तिरंगा लेकर बड़ी संख्या में छात्र और प्रतियोगी परीक्षाओं के अभ्यर्थी यात्रा में शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने भारत माता की जय और वंदे मातरम के नारे भी लगाए। यात्रा अल्बर्ट एक्का चौक तक पहुंची।
रिपोर्ट के मुताबिक, आंदोलन में ऐसे प्रदर्शनकारी भी शामिल रहे जो व्हीलचेयर पर हैं और अनशन कर रहे हैं। छात्रों ने कहा कि उनका आंदोलन सिर्फ किसी एक परीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी भर्ती व्यवस्था में पारदर्शिता और भरोसा बहाल करने की मांग को लेकर है।
भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी क्या है?
छात्रों का आरोप है कि झारखंड में कुछ भर्ती परीक्षाओं की प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। आंदोलनकारी JSSC-CGL और कुछ JPSC परीक्षाओं को लेकर भी सवाल उठा रहे हैं।
छात्रों की मांग है कि जिन परीक्षाओं में कथित अनियमितताएं सामने आई हैं, उन्हें रद्द किया जाए और पूरी भर्ती प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच कराई जाए।
आंदोलनकारी चाहते हैं कि जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए। उनकी प्रमुख मांगों में CBI जांच या झारखंड से बाहर के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की समिति से जांच शामिल है।
छात्रों ने सरकार पर लगाया अनदेखी का आरोप- 20 अगस्त
प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि उन्होंने अपनी मांगों को लेकर सरकार के सामने कई बार अपनी बात रखी है, लेकिन उन्हें अपेक्षित समाधान नहीं मिला। इसी वजह से आंदोलन लगातार आगे बढ़ रहा है।
छात्र नेताओं का आरोप है कि JMM-कांग्रेस गठबंधन सरकार ने उनकी समस्याओं पर ठोस कार्रवाई नहीं की है। आंदोलनकारियों ने कहा कि अगर सरकार भर्ती परीक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर है तो उसे स्वतंत्र जांच और परीक्षा रद्द करने जैसी मांगों पर स्पष्ट निर्णय लेना चाहिए।
इसी नाराजगी के चलते अब छात्रों ने मुख्यमंत्री आवास के घेराव का फैसला लिया है।
राहुल गांधी से भी की समर्थन वापस लेने की मांग
छात्र आंदोलन अब केवल मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन तक सीमित नहीं रहा है। प्रदर्शनकारियों ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को भी निशाने पर लिया है।
छात्र नेताओं का कहना है कि राहुल गांधी ने पहले युवाओं के मुद्दों पर समर्थन जताया था, लेकिन उनके मुताबिक इसके बाद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। आंदोलनकारियों ने कहा है कि यदि झामुमो सरकार छात्रों की मांगों पर कार्रवाई नहीं करती है तो कांग्रेस को सरकार से अपना समर्थन वापस लेना चाहिए।
रविवार को राज्य के सभी 24 जिलों में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और राहुल गांधी के पुतले जलाने का भी ऐलान किया था। इससे साफ है कि आंदोलन अब राजनीतिक दबाव का रूप भी ले रहा है।
छात्रों की प्रमुख मांगें क्या हैं?

छात्रों और प्रतियोगी परीक्षाओं के अभ्यर्थियों की कई मांगें हैं। इनमें सबसे प्रमुख मांग भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच है।
आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं—
- कथित गड़बड़ी वाली परीक्षाओं को रद्द किया जाए।
- JSSC-CGL परीक्षा की जांच और आवश्यक कार्रवाई की जाए।
- संदिग्ध मानी जा रही JPSC परीक्षाओं की भी जांच हो।
- भर्ती प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच कराई जाए।
- जांच CBI या स्वतंत्र न्यायिक समिति से कराने की मांग।
- भर्ती परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाई जाए।
- भविष्य की परीक्षाओं में गड़बड़ी रोकने के लिए सुधार किए जाएं।
प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि यह लड़ाई केवल कुछ परीक्षाओं तक सीमित नहीं है। उनके अनुसार, यह हजारों युवाओं के भविष्य और भर्ती व्यवस्था पर भरोसे का सवाल है।
आंदोलन का 22वां दिन, हजारों युवा सड़क पर- 20 अगस्त
15 अगस्त को छात्रों का आंदोलन 22वें दिन में पहुंच गया था। रांची में निकाली गई तिरंगा यात्रा में हजारों छात्र और नौकरी की तैयारी कर रहे अभ्यर्थी शामिल हुए।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वह लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। कई छात्र धरना और अनशन भी कर रहे हैं।
इस आंदोलन के दौरान प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव की स्थिति भी सामने आई है। 10 अगस्त को रांची में प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस और पानी की बौछार का इस्तेमाल किया था।
अनशन पर बैठे प्रदर्शनकारी भी आंदोलन में शामिल
छात्र आंदोलन में कुछ प्रदर्शनकारी लंबे समय से अनशन पर हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, दो प्रदर्शनकारी व्हीलचेयर पर भी तिरंगा यात्रा में शामिल हुए।
वहीं JLKM नेता देवेंद्र नाथ महतो के बारे में भी रिपोर्ट सामने आई कि वह कई दिनों से अनशन पर हैं। तिरंगा यात्रा में शामिल होने को लेकर पुलिस के साथ उनके कथित विवाद की बात भी सामने आई। इस घटनाक्रम के वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में रहे।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार को छात्रों की मांगों को गंभीरता से लेना चाहिए और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करनी चाहिए।
पूर्व CM चंपई सोरेन ने भी सरकार को घेरा
छात्र आंदोलन को लेकर झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी नेता चंपई सोरेन ने भी हेमंत सोरेन सरकार पर निशाना साधा है।
उन्होंने सरकार पर भर्ती परीक्षा विवाद में CBI जांच की सिफारिश नहीं करने को लेकर सवाल उठाया। चंपई सोरेन ने कहा कि अगर सरकार किसी कथित भर्ती गिरोह का हिस्सा नहीं है तो CBI जांच की सिफारिश करने में परेशानी क्यों है।
उन्होंने आंदोलन कर रहे छात्रों का जिक्र करते हुए सरकार पर भी निशाना साधा।
सरकार ने दिया भर्ती व्यवस्था सुधारने का भरोसा
एक तरफ छात्र सरकार पर कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगा रहे हैं, वहीं राज्य सरकार ने भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने की बात कही है।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने स्वतंत्रता दिवस के संबोधन में भर्ती परीक्षाओं को लेकर उठे सवालों को गंभीर बताया। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं से नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं की एक पूरी पीढ़ी के भरोसे पर असर पड़ता है।
सरकार की ओर से भर्ती प्रक्रिया में सुधार और भविष्य में ऐसी गड़बड़ियों को रोकने के लिए कदम उठाने का आश्वासन दिया गया है।
अब 20 अगस्त पर टिकी नजर
छात्र आंदोलन के अगले चरण के तौर पर 20 अगस्त की तारीख सबसे महत्वपूर्ण हो गई है। आंदोलनकारियों ने उस दिन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के आवास के घेराव का ऐलान किया है।
प्रदर्शनकारी छात्रों ने राज्यभर के युवाओं से रांची पहुंचने की अपील की है। उनका कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, आंदोलन जारी रहेगा।
ऐसे में 20 अगस्त को प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर प्रशासन के सामने भी बड़ी चुनौती होगी। एक तरफ छात्रों की मांगों पर सरकार को अपना रुख स्पष्ट करना होगा, वहीं दूसरी तरफ कानून-व्यवस्था बनाए रखना भी अहम होगा।
क्या सरकार और छात्रों के बीच बनेगी सहमति?
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या 20 अगस्त से पहले सरकार और आंदोलनकारी छात्रों के बीच कोई समाधान निकलता है या नहीं।
छात्र परीक्षा रद्द करने, स्वतंत्र जांच और भर्ती प्रक्रिया में सुधार की मांग पर अड़े हैं। दूसरी ओर सरकार ने भर्ती व्यवस्था में सुधार का भरोसा दिया है।
अगर दोनों पक्षों के बीच बातचीत से समाधान नहीं निकलता है तो 20 अगस्त का प्रस्तावित घेराव आंदोलन को और बड़ा रूप दे सकता है।
निष्कर्ष
झारखंड में भर्ती परीक्षाओं को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार तेज हो रहा है। स्वतंत्रता दिवस पर रांची में निकाली गई तिरंगा यात्रा के बाद आंदोलनकारियों ने 20 अगस्त को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के आवास के घेराव का ऐलान किया है। साथ ही मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग भी उठाई गई है।
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