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भारत पर मंडरा रहा बड़ा बाढ़ खतरा: 2500 से ज्यादा ग्लेशियल झीलें संवेदनशील, 27 राज्य-UT जोखिम में

National News | Flood Risk India | GLOF | 27 अगस्त 2026 – भारत में बाढ़ का खतरा केवल लगातार बारिश या नदियों के बढ़ते जलस्तर तक सीमित नहीं है। देश के…

Niharika Gupta 27 August 2026, 8:20 pm
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भारत पर मंडरा रहा बड़ा बाढ़ खतरा: 2500 से ज्यादा ग्लेशियल झीलें संवेदनशील, 27 राज्य-UT जोखिम में
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National News | Flood Risk India | GLOF | 27 अगस्त 2026 – भारत में बाढ़ का खतरा केवल लगातार बारिश या नदियों के बढ़ते जलस्तर तक सीमित नहीं है। देश के 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में से 27 प्रदेश आपदा के लिहाज से अत्यधिक संवेदनशील या जोखिम वाली स्थिति में हैं। चिंता की एक बड़ी वजह हिमालयी क्षेत्र में मौजूद 2500 से ज्यादा संवेदनशील ग्लेशियल झीलें हैं। इनके फटने से Glacial Lake Outburst Flood यानी GLOF जैसी अचानक और बेहद तेज बाढ़ आ सकती है।

2500 से ज्यादा ग्लेशियल झीलें बनीं चिंता

हिमालयी क्षेत्र में 2500 से अधिक ग्लेशियल झीलों को संवेदनशील स्थिति में बताया गया है। इसके अलावा 400 से ज्यादा हिमनदीय झीलों के तेजी से पिघलने की बात सामने आई है। अगर इनमें से कोई झील अचानक टूटती है, तो भारी मात्रा में पानी और मलबा नीचे की ओर तेजी से बढ़ सकता है। इससे नदी घाटियों और निचले इलाकों में अचानक बाढ़ का खतरा पैदा होता है।

हाल में नेपाल के रसुवा जिले में भोटेकोशी नदी में आई विनाशकारी बाढ़ ने इस खतरे की गंभीरता को सामने ला दिया है। नेपाल-तिब्बत सीमा के पास हुई इस त्रासदी के पीछे भी हिमनदीय झील के फटने की आशंका जताई गई है।

बाढ़ मैदानों पर अतिक्रमण बढ़ा रहा खतरा

विशेषज्ञों और संसदीय समिति की रिपोर्ट में बाढ़ के मैदानों पर अतिक्रमण को गंभीर समस्या बताया गया है। कई जगह नदी के प्राकृतिक बहाव वाले क्षेत्रों में निर्माण और दूसरी गतिविधियां हो रही हैं।

बाढ़ के दौरान यही क्षेत्र अतिरिक्त पानी को फैलने और नियंत्रित करने में मदद करते हैं। लेकिन जब इन इलाकों पर निर्माण या अतिक्रमण हो जाता है, तो पानी के प्राकृतिक रास्ते प्रभावित होते हैं और बाढ़ का नुकसान बढ़ सकता है।

संसदीय समिति ने नदी तल और बाढ़-मैदानी क्षेत्रों में अतिक्रमण की निगरानी और उसे हटाने के लिए व्यापक राष्ट्रीय ढांचा तैयार करने की सिफारिश की है।

नदी बेसिन स्तर पर योजना की जरूरत

बाढ़ से निपटने के लिए केवल शहर या जिले के स्तर पर तैयारी पर्याप्त नहीं मानी जा रही है। नदी के पूरे बेसिन को ध्यान में रखते हुए योजना बनाने की जरूरत बताई गई है।

अगर नदी के ऊपरी हिस्से में अचानक पानी बढ़ता है, तो उसका असर कई जिलों और राज्यों तक पहुंच सकता है। इसलिए नदी बेसिन स्तर पर जल प्रवाह, बाढ़ मैदान, जल निकासी और आबादी की स्थिति का आकलन जरूरी है।

संसदीय समिति ने भी river basin-level planning की कमी को बाढ़ से होने वाले नुकसान का एक महत्वपूर्ण कारण बताया है।

सरकार कर रही ग्लेशियल झीलों की निगरानी

ग्लेशियल झीलों से जुड़े खतरे की निगरानी के लिए केंद्रीय जल आयोग ने रिमोट सेंसिंग तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाया है। आयोग ने Google Earth Engine आधारित ऐसा प्लेटफॉर्म विकसित किया है, जो उपग्रह तस्वीरों का विश्लेषण करके ग्लेशियल झीलों और दूसरे जल निकायों के क्षेत्रफल को मापने में मदद करता है।

इसके जरिए संभावित जोखिम वाली झीलों और उनके जल प्रवाह मार्गों की पहचान की जा रही है। संबंधित जानकारी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और दूसरी एजेंसियों के साथ साझा की जाती है।

AI की मदद से बाढ़ का पूर्वानुमान

केंद्रीय जल आयोग हर महीने निगरानी रिपोर्ट तैयार करता है। संवेदनशील ग्लेशियल झीलों की पहचान और जोखिम के आधार पर उनकी श्रेणी तय करने की प्रक्रिया भी जारी है।

आधुनिक तकनीक और AI आधारित प्रणालियों की मदद से बाढ़ का पूर्वानुमान पहले से बेहतर बनाने की कोशिश की जा रही है। समय रहते चेतावनी मिलने से संवेदनशील इलाकों में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में मदद मिल सकती है।

भारत का कितना हिस्सा बाढ़ के खतरे में?

देश के कुल भूभाग का करीब 12 प्रतिशत हिस्सा, यानी 40 मिलियन हेक्टेयर से ज्यादा क्षेत्र, बाढ़ और नदी कटाव की चपेट में आने योग्य बताया गया है।

इसके अलावा देश के 5161 शहरी स्थानीय निकाय बाढ़ के प्रति संवेदनशील बताए गए हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन और हिमस्खलन का खतरा अलग से मौजूद है। करीब 15 प्रतिशत भूभाग भूस्खलन के खतरे वाले क्षेत्रों में आता है।

भूकंप और बाढ़ दोनों का खतरा

भारत प्राकृतिक आपदाओं के लिहाज से कई तरह के जोखिमों का सामना करता है। देश के करीब 58.6 प्रतिशत भूभाग को मध्यम से अत्यधिक तीव्रता वाले भूकंपों के लिहाज से संवेदनशील बताया गया है।

ऐसे में हिमालयी क्षेत्रों में भूकंप, भूस्खलन, ग्लेशियर पिघलने और अचानक बाढ़ जैसे खतरे एक-दूसरे से जुड़े हो सकते हैं। इसलिए आपदा प्रबंधन में केवल एक खतरे पर ध्यान देने के बजाय बहु-आपदा योजना की जरूरत है।

बाढ़ मैदानों की मैपिंग पर जोर

संसदीय समिति ने सुझाव दिया है कि जिन इलाकों में बाढ़ मैदानों या नदी तल पर अतिक्रमण हो चुका है, उन्हें मैप पर चिन्हित किया जाए।

इससे संबंधित एजेंसी या विभाग की जिम्मेदारी तय करने में मदद मिलेगी। साथ ही भविष्य में नए अतिक्रमण और नियमों के उल्लंघन को रोकना भी आसान होगा।

जहां अतिक्रमण हो चुका है, वहां उसे हटाकर पानी के प्राकृतिक प्रवाह को बहाल करने पर जोर दिया गया है।

शहरों में ड्रेनेज मास्टर प्लान जरूरी

बारिश के दौरान शहरी बाढ़ की समस्या भी तेजी से बढ़ रही है। इसलिए शहरों के लिए जल निकासी मास्टर प्लान और आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रोटोकॉल तैयार करने की जरूरत बताई गई है।

नगर स्तर पर बाढ़ प्रबंधन योजना होने से भारी बारिश के समय जलभराव वाले इलाकों की पहचान, यातायात प्रबंधन और राहत-बचाव अभियान को तेजी से लागू किया जा सकता है।

सरकार पहले से बाढ़ मैदान जोनिंग को बाढ़ नियंत्रण का महत्वपूर्ण उपाय मानती रही है। जल शक्ति मंत्रालय ने राज्यों को बाढ़ मैदान क्षेत्रीकरण के लिए तकनीकी दिशानिर्देश भी जारी किए हैं।

नेपाल की त्रासदी ने बढ़ाई चिंता

नेपाल-तिब्बत सीमा पर हालिया फ्लैश फ्लड ने हिमालयी क्षेत्रों में GLOF के खतरे को फिर चर्चा में ला दिया है। अचानक आई बाढ़ ने दिखाया कि पहाड़ी इलाकों में कुछ ही समय में पानी और मलबे का प्रवाह कितना विनाशकारी हो सकता है।

भारत के हिमालयी राज्यों में भी ऐसी घटनाओं को लेकर लगातार निगरानी और शुरुआती चेतावनी प्रणाली को मजबूत करना जरूरी है।

Central Water Commission

National Disaster Management Authority

India Meteorological Department

Ministry of Jal Shakti

निष्कर्ष

भारत के सामने GLOF और बाढ़ का खतरा गंभीर है। 2500 से ज्यादा संवेदनशील ग्लेशियल झीलों, हिमालयी ग्लेशियरों के पिघलने और बाढ़ मैदानों पर बढ़ते अतिक्रमण के कारण जोखिम कई स्तरों पर बढ़ सकता है। देश के 27 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश आपदा के लिहाज से संवेदनशील बताए गए हैं।

ऐसे में बाढ़ मैदानों से अतिक्रमण हटाना, नदी के प्राकृतिक बहाव को बनाए रखना, ग्लेशियल झीलों की लगातार निगरानी और समय पर चेतावनी जारी करना बेहद जरूरी है।

यह भी पढ़ें – Sugar Price Hike: महंगी हुई चीनी, खरीद पर भी लिमिट; Blinkit-Zepto-Swiggy समेत दुकानों में तय मात्रा

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Niharika Gupta

NAV24 News की संपादकीय टीम से प्रकाशित रिपोर्ट।

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