अमेरिका और इजरायल के हमलों को करीब छह महीने हो चुके हैं। इस दौरान ईरान को सैन्य और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। उसके शीर्ष नेतृत्व को भी नुकसान पहुंचा और तेल कारोबार पर दबाव बढ़ा है।
अमेरिका ने प्रतिबंधों और समुद्री नाकाबंदी के जरिए ईरान पर दबाव बनाने की कोशिश की है। इसके बावजूद ईरान पीछे हटने को तैयार नहीं है।
इसकी एक बड़ी वजह होर्मुज जलडमरूमध्य को माना जा रहा है। ईरान के पास अभी भी इस महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते पर दबाव बनाने की क्षमता है। वहीं, तेहरान को लगता है कि अमेरिका लंबे समय तक महंगे युद्ध का खर्च नहीं उठाना चाहेगा।
ज्योतिषीय विश्लेषण के अनुसार, ईरान के लिए 9 सितंबर तक का समय ज्यादा संवेदनशील बताया गया है। इसके बाद बातचीत की संभावना बढ़ सकती है। नवंबर के आखिरी सप्ताह से राहत के संकेत बताए गए हैं।
एक महीने बाद फिर आमने-सामने अमेरिका और ईरान
30 अगस्त को अमेरिकी सेना ने होर्मुज के पास ईरान के लारक द्वीप पर दो रॉकेट लॉन्चरों को निशाना बनाने का दावा किया। अमेरिका के मुताबिक, ईरानी सेना समुद्र में बारूदी सुरंगें बिछाने की तैयारी कर रही थी।
इसके जवाब में ईरान ने जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी ठिकानों की ओर बैलिस्टिक मिसाइलें दागने का दावा किया।
यह एक महीने से ज्यादा समय बाद दोनों देशों के बीच सीधे सैन्य टकराव की खबर थी। इसके बाद कच्चे तेल की कीमतों में भी तेजी देखी गई। इससे पता चलता है कि होर्मुज क्षेत्र में तनाव का असर पूरी दुनिया के तेल बाजार पर पड़ सकता है।
ईरान अब तक क्यों नहीं झुका?
ईरान को सैन्य नुकसान पहुंचाना और उसे आत्मसमर्पण के लिए मजबूर करना अलग-अलग बातें हैं। छह महीने के हमलों के बावजूद ईरान की सरकार और सैन्य ढांचा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
ईरान यह भी मानता है कि लंबा युद्ध अमेरिका के सैन्य खर्च और घरेलू राजनीति पर दबाव बढ़ा सकता है। दूसरी ओर, चीन और भारत जैसे देशों के साथ उसके आर्थिक रिश्ते भी उसके लिए महत्वपूर्ण हैं।
ईरान ऐसा समझौता नहीं करना चाहता जिसे उसके देश में आत्मसमर्पण के तौर पर देखा जाए। इसलिए वह नुकसान के बावजूद बातचीत में अपनी स्थिति मजबूत रखने की कोशिश कर रहा है।
कुंडली के आधार पर क्या कहता है विश्लेषण?
दिए गए ज्योतिषीय विश्लेषण में ईरान की कुंडली के लिए 1 अप्रैल 1979, दोपहर 3 बजे, तेहरान का समय आधार माना गया है। इसमें सिंह लग्न बताया गया है।
विश्लेषण के मुताबिक, लग्न में शनि और राहु की स्थिति दबाव, अविश्वास और मुश्किल परिस्थितियों में भी पीछे न हटने की प्रवृत्ति दिखाती है। वहीं सूर्य की मजबूत स्थिति को सत्ता के टिके रहने से जोड़ा गया है।
हालांकि, यह ज्योतिषीय मान्यता पर आधारित विश्लेषण है, वैज्ञानिक भविष्यवाणी नहीं।
गुरु से संकट से निकलने की उम्मीद
ज्योतिषीय गणना के अनुसार गुरु की स्थिति ईरान को मुश्किल समय में वैकल्पिक रास्ते मिलने का संकेत देती है। इसमें पर्दे के पीछे बातचीत, दूसरे देशों की मदद और आर्थिक रास्ते तलाशने जैसी संभावनाओं का उल्लेख किया गया है।
इस विश्लेषण में यह भी कहा गया है कि ईरान भारी नुकसान के बावजूद पूरी तरह टूटने की स्थिति में नहीं दिखाई देता।
बातचीत में बार-बार क्यों आ सकती है रुकावट?
ज्योतिषीय विश्लेषण के मुताबिक, ईरान पर गुरु की महादशा में राहु की अंतरदशा 10 जून 2027 तक चल रही है। इसे एक तरफ समाधान की कोशिश और दूसरी तरफ विवाद बढ़ने वाली स्थिति से जोड़ा गया है।
30 जुलाई से 24 दिसंबर 2026 के बीच शुक्र की प्रत्यंतर दशा बताई गई है। इसके आधार पर दूसरे देशों के साथ बातचीत और समझौते की कोशिशें बढ़ने की संभावना जताई गई है, लेकिन अविश्वास के कारण बातचीत में रुकावट भी आ सकती है।
9 सितंबर तक क्यों बताया गया संवेदनशील समय?
दिए गए वर्षफल के अनुसार 26 अगस्त से 9 सितंबर तक का समय ज्यादा चुनौतीपूर्ण बताया गया है। इस अवधि को सैन्य कार्रवाई, अचानक घटनाओं और नेतृत्व पर दबाव से जोड़ा गया है।
इसी दौरान 30 अगस्त को अमेरिका की ओर से लारक द्वीप पर कार्रवाई की खबर सामने आई। ज्योतिषीय विश्लेषण में इसे इस संवेदनशील अवधि से जोड़कर देखा गया है।
हालांकि, 9 सितंबर को युद्ध खत्म होने की तारीख नहीं बताया जा सकता। इसे सिर्फ ज्योतिषीय विश्लेषण के अनुसार तनाव के एक महत्वपूर्ण चरण का अंत माना गया है।
9 सितंबर के बाद क्या हो सकता है?
विश्लेषण के मुताबिक, 9 सितंबर से 31 अक्टूबर के बीच बातचीत की संभावना बढ़ सकती है। इस दौरान ओमान, कतर या किसी अन्य मध्यस्थ देश की भूमिका सामने आ सकती है।
होर्मुज में जहाजों की आवाजाही, प्रतिबंधों और युद्धविराम को लेकर बातचीत हो सकती है। हालांकि, दोनों पक्षों के बीच मतभेद बने रहने की भी संभावना जताई गई है।
31 अक्टूबर से 21 नवंबर के बीच फिर से अनिश्चितता बढ़ने की बात कही गई है। इसके बाद 21 नवंबर से शुक्र की दशा शुरू होने पर बातचीत और समझौते के लिए बेहतर समय बताया गया है।
नवंबर के आखिर से राहत के संकेत
ज्योतिषीय विश्लेषण के अनुसार, नवंबर 2026 के अंतिम सप्ताह से जनवरी 2027 के बीच युद्धविराम, कैदियों की रिहाई, होर्मुज को लेकर अस्थायी समझौते या प्रतिबंधों में कुछ राहत जैसी संभावनाएं बन सकती हैं।
हालांकि, इस विश्लेषण में यह भी कहा गया है कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव का पूरी तरह खत्म होना आसान नहीं होगा। 2026 के अंत में सीमित समझौता या युद्धविराम संभव बताया गया है, लेकिन स्थायी शांति को लेकर अनिश्चितता बनी रहने की बात कही गई है।
FAQs
अमेरिका-ईरान युद्ध कब खत्म हो सकता है?
ईरान की कुंडली के अनुसार 9 सितंबर 2026 तक सैन्य तनाव अधिक रह सकता है. इसके बाद बातचीत बढ़ने और नवंबर के अंतिम सप्ताह से सीमित समझौते की संभावना बनती है.
छह महीने बाद भी ईरान ने आत्मसमर्पण क्यों नहीं किया?
ईरान की सत्ता और सैन्य क्षमता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है. होर्मुज जलडमरूमध्य पर उसका प्रभाव भी अमेरिका के खिलाफ बड़ा दबाव बनाने वाला हथियार है.
ईरान की कुंडली में अभी कौन-सी दशा चल रही है?
ईरान की कुंडली में गुरु की महादशा और राहु की अंतरदशा चल रही है. राहु की अंतरदशा 10 जून 2027 तक रहेगी.
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