मुरादाबाद: उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद स्थित आयुक्त न्यायालय में शुक्रवार को रामपुर की जौहर यूनिवर्सिटी की 38 इमारतों के ध्वस्तीकरण से जुड़े मामले में सुनवाई हुई। यूनिवर्सिटी ट्रस्ट की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता जुनैद एजाज ने इमारतों के नक्शों से संबंधित रिकॉर्ड जिलाधिकारी रामपुर के कार्यालय से मंगाने की मांग की। कोर्ट ने इस मांग को स्वीकार कर लिया है।
हालांकि, कोर्ट ने इसके लिए एक शर्त भी रखी है। पहले यूनिवर्सिटी ट्रस्ट को यह साबित करना होगा कि संबंधित इमारतों के नक्शे पहले ही जिलाधिकारी रामपुर को उपलब्ध कराए गए थे। मामले की अगली सुनवाई अब 22 अक्टूबर को होगी।
38 इमारतों को बताया गया था अवैध
दरअसल, 15 जुलाई 2026 को रामपुर विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष और जिलाधिकारी ने जौहर यूनिवर्सिटी की 40 में से 38 इमारतों को अवैध बताते हुए उनके ध्वस्तीकरण का आदेश दिया था। प्राधिकरण का कहना था कि इन 38 इमारतों के नक्शे स्वीकृत नहीं कराए गए थे। वहीं, केवल दो इमारतों के नक्शे जिला पंचायत से स्वीकृत होने की बात सामने आई थी।
डीएम के इस आदेश के खिलाफ जौहर यूनिवर्सिटी ट्रस्ट ने रामपुर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष और मुरादाबाद मंडलायुक्त की कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। सुनवाई के दौरान तत्कालीन मंडलायुक्त आंजनेय कुमार सिंह की कोर्ट ने ध्वस्तीकरण के आदेश पर रोक लगा दी थी। साथ ही यूनिवर्सिटी ट्रस्ट से सभी इमारतों के नक्शे कोर्ट में पेश करने को कहा गया था।
ट्रस्ट ने नक्शों को लेकर क्या दलील दी?
यूनिवर्सिटी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता जुनैद एजाज ने दलील दी थी कि जिला पंचायत से नक्शों के संबंध में जारी नोटिफिकेशन वर्ष 2012 का है, जबकि यूनिवर्सिटी की ज्यादातर इमारतें इससे पहले ही बनाई जा चुकी थीं।
इसके बाद कमिश्नर कोर्ट ने ट्रस्ट से इमारतों के नक्शों की प्रतियां दाखिल करने को कहा था। जवाब में ट्रस्ट ने दावा किया कि ये नक्शे लोक निर्माण विभाग और श्रम विभाग के माध्यम से पहले ही जिलाधिकारी रामपुर को उपलब्ध कराए जा चुके हैं।
डीएम कार्यालय से रिकॉर्ड मंगाने की मांग
ट्रस्ट का कहना है कि जब नक्शे पहले ही डीएम कार्यालय को दिए जा चुके हैं तो उन्हें दोबारा ट्रस्ट से मंगाने के बजाय जिलाधिकारी कार्यालय से संबंधित रिकॉर्ड तलब किया जाना चाहिए।
जुनैद एजाज के अनुसार, तत्कालीन मंडलायुक्त आंजनेय कुमार सिंह ने पहले इस अर्जी को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि साक्ष्य पेश करने की जिम्मेदारी ट्रस्ट की है। शुक्रवार को मौजूदा मंडलायुक्त संगीता सिंह के सामने भी ट्रस्ट ने यही दलील रखी।
पहले ट्रस्ट को देना होगा सबूत
कोर्ट ने डीएम रामपुर से रिकॉर्ड तलब करने की मांग को स्वीकार कर लिया है, लेकिन ट्रस्ट को पहले यह साबित करना होगा कि यूनिवर्सिटी के नक्शे पहले जिलाधिकारी रामपुर को उपलब्ध कराए गए थे।
ट्रस्ट की ओर से संबंधित साक्ष्य पेश किए जाने के बाद ही डीएम रामपुर के कार्यालय से रिकॉर्ड तलब किया जाएगा। इसके बाद मामले में आगे की कार्रवाई होगी। अब इस मामले की अगली सुनवाई 22 अक्टूबर 2026 को होगी।



