कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक और अध्यक्ष अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा कर बताया कि वह टाइफाइड से पीड़ित हैं। उन्होंने कहा कि उनकी ब्लड रिपोर्ट में टाइफाइड की पुष्टि हुई है और डॉक्टरों की देखरेख में उनका इलाज चल रहा है।
अभिजीत दिपके ने बताया कि उन्हें रोज सुबह और शाम IV (इंट्रावेनस) के जरिए दवाएं दी जा रही हैं। उन्होंने लोगों से भी अपील की कि लंबे समय तक बुखार या कमजोरी महसूस होने पर लापरवाही न करें और तुरंत डॉक्टर से जांच कराएं।
आइए जानते हैं कि टाइफाइड क्या है, यह कैसे फैलता है, इसके प्रमुख लक्षण क्या हैं और किन परिस्थितियों में यह बीमारी गंभीर रूप ले सकती है।

टाइफाइड के लक्षण क्या हैं, कैसे फैलता है ये बिमारी?
टाइफाइड के शुरुआती लक्षण आमतौर पर बैक्टीरिया के संपर्क में आने के 10 से 14 दिन बाद दिखाई देने लगते हैं. इस बीमारी में मरीज को धीरे-धीरे तेज बुखार आने लगता है. इसके अलावा सिरदर्द, थकान, कमजोरी, पेट दर्द, जी मिचलाना, उल्टी, भूख कम लगना, कब्ज या डायरिया, मांसपेशियों में दर्द और शरीर पर रैशेज भी हो सकते हैं. अगर इलाज न कराया जाए, तो यह बीमारी 3 से 4 हफ्ते या उससे ज्यादा समय तक बनी रह सकती है.
अगर टाइफाइड का समय पर इलाज नहीं कराया जाए, तो यह बीमारी गंभीर हो सकती है। डॉक्टरों के मुताबिक, शुरुआत में तेज बुखार, कमजोरी और पेट से जुड़ी समस्याएं होती हैं, लेकिन इलाज में देरी होने पर हालत बिगड़ सकती है।
गंभीर मामलों में पेट फूलना, तेजी से वजन कम होना, शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन), भ्रम की स्थिति (डिलीरियम), आंतों में गंभीर नुकसान, अंदरूनी रक्तस्राव, दिमाग में सूजन, किडनी फेल होना, निमोनिया, पैंक्रियाज में सूजन और मेनिन्जाइटिस जैसी खतरनाक समस्याएं हो सकती हैं।
इसलिए अगर कई दिनों तक तेज बुखार बना रहे या बीमारी के गंभीर लक्षण दिखाई दें, तो बिना देरी किए डॉक्टर से जांच और इलाज कराना चाहिए।
टाइफाइड पहचान और बचाव कैसे किया जाता है?
अगर किसी व्यक्ति में टाइफाइड जैसे लक्षण दिखाई दें, तो डॉक्टर जांच की सलाह देते हैं. इसके लिए ब्लड टेस्ट, ब्लड कल्चर, स्टूल और यूरिन टेस्ट, विडाल टेस्ट और टाइफी डॉट टेस्ट जैसे परीक्षण किए जा सकते हैं. कुछ गंभीर मामलों में, जब एंटीबायोटिक दवाओं के बाद भी सुधार नहीं होता, तब बोन मैरो कल्चर कराने की सलाह भी दी जा सकती है.
टाइफाइड से बचने के लिए साफ और सुरक्षित पानी पीना, ताजा और अच्छी तरह पका हुआ खाना, खाना खाने और बनाने से पहले साबुन से हाथ धोना, सड़क किनारे खुले में मिलने वाला खाना खाने से बचना और घर के आसपास साफ-सफाई बनाए रखना जरूरी है. जिन इलाकों में टाइफाइड के मामले ज्यादा होते हैं, वहां जाने से पहले डॉक्टर की सलाह पर टाइफाइड वैक्सीन भी लगवाई जा सकती है.
