संसद परिसर और दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध प्रदर्शन को लेकर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है।
अखिलेश यादव ने कहा कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का दबाव इसलिए नहीं बन पा रहा है, क्योंकि सरकार को डर है कि अगर उन्होंने इस्तीफा दिया तो कई छिपी हुई बातें सामने आ सकती हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि आजादी के बाद किसी सरकार से इस तरह के व्यवहार की उम्मीद नहीं थी। अखिलेश के मुताबिक, लोकतंत्र में छात्रों और युवाओं की आवाज को दबाना सही नहीं है और सरकार को उनकी बात सुननी चाहिए।
यह निर्मम सरकार है- डिंपल यादव
सपा सांसद डिंपल यादव ने कहा कि प्रदर्शन करने पहुंचे युवा सरकार को यह बताना चाहते थे कि उसका सिस्टम बीमार हो चुका है और उनके हितों की रक्षा नहीं कर रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर लाठीचार्ज किया गया, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। यह एक निर्मम सरकार है, जिसे युवाओं के आंसुओं पर भी दया नहीं आ रही। डिंपल यादव ने शिक्षा मंत्री को पद से हटाने की मांग दोहराते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार को बदलने का सबसे बड़ा माध्यम वोट है।
सपा सांसद राम गोपाल यादव ने सवाल उठाया कि यदि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वास्तव में युवाओं के साथ हैं, तो फिर युवा अनशन पर क्यों बैठे हैं? प्रदर्शनकारियों पर पुलिस द्वारा किए गए कथित लाठीचार्ज निंदनीय है। जब छात्र शांतिपूर्ण विरोध कर रहे थे, तो उनको क्यों मारा गया? शांतिपूर्ण विरोध लोकतांत्रिक अधिकार है और इस पर बल प्रयोग उचित नहीं है।
वहीं, सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने कहा कि देशभर के लाखों बेरोजगार युवा पेपर लीक जैसे गंभीर मुद्दों को लेकर अपनी आवाज उठाने दिल्ली पहुंचे थे, लेकिन उनकी समस्याएं सुनने के बजाय उन पर लाठीचार्ज किया गया। उन्होंने राम मंदिर चढ़ावा चोरी का जिक्र करते हुए कहा कि इस मामले पर भी चर्चा होनी चाहिए और दोषियों को बचाने की कोशिश नहीं होनी चाहिए।
सपा सांसद वीरेंद्र सिंह ने कहा कि भारत लोकतांत्रिक देश है और महात्मा गांधी ने जन आंदोलनों की अहमियत सिखाई है। उनके अनुसार छात्र इसलिए सड़कों पर उतरे, क्योंकि उनकी बात नहीं सुनी जा रही थी। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने संवेदनशीलता नहीं दिखाई और पूरे मामले को कमजोर करने की कोशिश की। युवाओं की समस्याओं का समाधान संवाद के माध्यम से किया जाए और लोकतांत्रिक अधिकारों का सम्मान सुनिश्चित किया जाए।
