अगर आप नजफगढ़ रोड, द्वारका मोड़, नवादा या उत्तम नगर से रोजाना सफर करते हैं, तो अभी ट्रैफिक से राहत नहीं मिलने वाली है। नवादा मेट्रो स्टेशन के पास धंसी सीवर लाइन की मरम्मत समय पर पूरी नहीं हो पाई है।
इस वजह से दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने 15 जुलाई तक ट्रैफिक डायवर्जन बढ़ा दिया है। इससे रोजाना हजारों यात्रियों को जाम, लंबा रास्ता और सफर में देरी जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
दिल्ली जल बोर्ड ने 20 मई की रात 10 बजे से नवादा मेट्रो स्टेशन के पास मेट्रो पिलर नंबर 722 और 723 के बीच धंस चुकी सीवर लाइन की मरम्मत शुरू की थी. इसके लिए द्वारका मोड़ से उत्तम नगर जाने वाली मुख्य लेन को बंद कर दिया गया था. ट्रेंचलेस तकनीक से किए जा रहे इस काम को 45 दिनों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन तय समय बीतने के बाद भी मरम्मत पूरी नहीं हो सकी.
दिल्ली जल बोर्ड ने मांगा अतिरिक्त समय
मरम्मत कार्य अधूरा रहने पर दिल्ली जल बोर्ड ने ट्रैफिक पुलिस से डायवर्जन की अवधि बढ़ाने का अनुरोध किया. इसके बाद ट्रैफिक पुलिस ने 15 जुलाई तक मौजूदा ट्रैफिक व्यवस्था जारी रखने की अनुमति दे दी. अधिकारियों का कहना है कि निर्माण कार्य पूरा होने के बाद ही सड़क को सामान्य यातायात के लिए खोला जाएगा.
द्वारका मोड़ से ककरोला तक लगा जाम
सड़क बंद होने के कारण द्वारका मोड़, नवादा, उत्तम नगर, डाबड़ी मोड़ और ककरोला सहित आसपास के इलाकों में रोजाना लंबा ट्रैफिक जाम लग रहा है. लगातार जाम के कारण ईंधन की खपत बढ़ रही है और वाहनों से निकलने वाले धुएं की वजह से वायु प्रदूषण भी बढ़ रहा है.
38 डीटीसी और क्लस्टर बसों के बदले रूट
डीटीसी और क्लस्टर की करीब 38 बसों के रूट बदल दिए गए हैं. पहले जो बसें उत्तम नगर और नवादा होते हुए नजफगढ़ व आसपास के ग्रामीण इलाकों तक सीधे जाती थीं, अब उन्हें डाबड़ी मोड़, पावर हाउस, द्वारका सेक्टर-3 और द्वारका मोड़ होकर लंबा चक्कर लगाना पड़ रहा है.
बसों में 50 प्रतिशत तक कमी
लंबे रूट और जाम के कारण बसों के फेरों में करीब 50 प्रतिशत तक कमी आ गई है. समय की कमी के चलते कई बसें अपने अंतिम स्टॉप तक पहुंचने के बजाय ककरोला से ही वापस लौट जाती हैं. इससे यात्रियों को बीच रास्ते उतरकर दूसरी बस पकड़नी पड़ रही है, जिससे उनका सफर और अधिक मुश्किल हो गया है.
भारी ट्रैफिक का असर इलेक्ट्रिक बसों के संचालन पर भी पड़ रहा है. बैटरी बचाने के लिए कई बार बसों का एयर कंडीशनर बंद करना पड़ता है. उमस और गर्मी के बीच बंद शीशों वाली बसों में सफर करना यात्रियों के लिए बेहद कठिन हो जाता है.
