हमारी खुशी और दुख का सबसे बड़ा कारण हमारी भावनाएं होती हैं। जब मन में सकारात्मक विचार और भावनाएं होती हैं, तो हम अच्छा महसूस करते हैं। वहीं, गुस्सा, जलन, दुख या तनाव जैसी नकारात्मक भावनाएं हमें परेशान करती हैं।
आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रवि शंकर का कहना है कि आज के समय में ज्यादातर लोग अपनी भावनाओं को संभालने में कठिनाई महसूस करते हैं। उन्होंने एक वीडियो में बताया कि इमोशन्स को कंट्रोल करने का आसान तरीका हमारी सांस से जुड़ा है।
गुरुदेव के अनुसार, बचपन से हमें यह नहीं सिखाया जाता कि गुस्सा, दुख, जलन या अवसाद जैसी भावनाओं को कैसे संभालें। न घर में और न ही स्कूल में हमें यह सीख मिलती है कि जीवन के बुरे अनुभवों से बाहर कैसे निकला जाए। उन्होंने कहा कि अगर हम अपनी सांस पर ध्यान देना और उसे सही तरीके से नियंत्रित करना सीख लें, तो भावनाओं को बेहतर ढंग से संभाल सकते हैं और मानसिक रूप से अधिक शांत रह सकते हैं।
गुरुदेव आगे कहते हैं, ‘हमें अपनी जनता को समझाने की जरूरत है कि इस सवाल का जवाब उनकी नाक के ठीक नीचे है। जो कि हमारी खुद की सांस है। हर सांस की रिदम के साथ शरीर में एक कॉरस्पॉन्डिंग सेंसेशन और इमोशन पैदा होता है। तो ब्रीदिंग के बारे में थोड़ा बहुत सीखने से कोई भी अपने नेगेटिव इमोशन को मैनेज कर सकता है और नेगेटिव फीलिंग को कंट्रोल कर सकता है।’
बीमारी, चोट, आत्म विश्वास में कमी आदि से बचा जा सकता है
इमोशन का असर केवल आपके मूड पर ही नहीं पड़ता। यह धीरे-धीरे आपके मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है और फिर शारीरिक स्वास्थ्य पर प्रभाव दिखाने लगता है। सीडीसी बताता है कि इमोशनल वेल-बीइंग को मैनेज करके मेंटल और फिजीकल हेल्थ को फायदा पहुंचाया जा सकता है। बीमारी, चोट, आत्म विश्वास में कमी आदि से बचा जा सकता है।
सीडीसी के मुताबिक, इमोशनल वेल-बीइंग उसे कहते हैं, जब व्यक्ति अपने इमोशन, फीलिंग और विचारों को पोजीटिव रखता है। उसे नेगेटिव इमोशन्स को झेलना और मैनेज करना आता है। इसमें व्यक्ति जीवन की अनिश्चितताओं, तनाव और बदलाव को स्वीकार करने में सक्षम होता है।
